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अंतिम सेवा - Final Seva - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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अंतिम सेवा - Final Seva
अंतिम सेवा - Final Seva
55 unique murli dates in this topic
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54 murlis in हिंदी
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
21/01/1972
“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”
21/06/1972
“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”
14/07/1972
“अन्तिम सेवा के लिए रमतायोगी बनो”
28/07/1972
“अपवित्रता और वियोग को संघार करने वाली शक्तियाँ ही असुर संघारनी हैं”
02/08/1972
“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”
04/08/1972
“सर्विसएबुल, सेंसीबुल और इसेंसफुल की निशानियां”
06/08/1972
“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”
09/11/1972
“ज्ञान सितारों का सम्बन्ध ज्ञान सूर्य और ज्ञान चन्द्रमा के साथ”
20/11/1972
“स्थिति का आइना - सर्विस”
22/11/1972
“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”
24/12/1972
“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”
13/04/1973
“भक्त और भावना का फल”
13/09/1974
“मुरब्बी बच्चे बन अपनी स्टेज को योग-युक्त व युक्ति-युक्त बनाओ”
14/09/1975
“अकाल तख्त-नशीन और महाकाल-मूर्त बन समेटने की शक्ति का प्रयोग करो”
16/01/1977
“सन्तुष्ट आत्मा ही अनेक आत्माओं का इष्ट बन सकती है”
18/01/1977
“18 जनवरी का विशेष महत्व”
28/01/1977
“ब्राह्मणों का धर्म और कर्म”
06/02/1977
“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
11/05/1977
“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”
28/06/1977
“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”
28/12/1978
“परमात्म प्रत्यक्षता का आधार सत्यता और सत्यता का आधार स्वच्छता और निर्भयता”
12/01/1979
“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”
23/01/1980
“पवित्रता का महत्व”
27/03/1981
“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”
04/10/1981
“संकल्प शक्ति का महत्व”
30/04/1982
“विस्तार को बिन्दी में समाओ”
01/03/1983
“विश्व के हर स्थान पर आध्यात्मिक लाइट और ज्ञान जल पहुँचाओ”
10/11/1983
“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”
26/11/1984
“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”
12/12/1984
“विशेष आत्माओं का फर्ज”
15/03/1985
“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
20/02/1986
“उड़ती कला से सर्व का भला”
16/03/1986
“रुहानी ड्रिल”
31/03/1986
“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”
09/04/1986
“सच्चे सेवाधारी की निशानी”
01/10/1987
“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”
27/11/1987
“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”
14/12/1987
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”
19/11/1989
“तन, मन, धन और जन का भाग्य”
23/11/1989
“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”
14/01/1990
“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
22/12/1995
“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”
03/04/1997
“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”
20/02/2001
“शिव जयन्ती, व्रत लेने और सर्व समर्पण होने का यादगार है''
04/11/2001
“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''
15/12/2001
“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”
20/10/2008
“सन्तुष्टमणि बन विश्व में सन्तुष्टता की लाइट फैलाओ, सन्तुष्ट रहो और सबको सन्तुष्ट करो”