अंतिम सेवा - Final Seva
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26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”21/01/1972“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”21/06/1972“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”14/07/1972“अन्तिम सेवा के लिए रमतायोगी बनो”28/07/1972“अपवित्रता और वियोग को संघार करने वाली शक्तियाँ ही असुर संघारनी हैं”02/08/1972“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”04/08/1972“सर्विसएबुल, सेंसीबुल और इसेंसफुल की निशानियां”06/08/1972“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”09/11/1972“ज्ञान सितारों का सम्बन्ध ज्ञान सूर्य और ज्ञान चन्द्रमा के साथ”20/11/1972“स्थिति का आइना - सर्विस”22/11/1972“अन्तिम सर्विस का अन्तिम स्वरूप”24/12/1972“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”13/04/1973“भक्त और भावना का फल”13/09/1974“मुरब्बी बच्चे बन अपनी स्टेज को योग-युक्त व युक्ति-युक्त बनाओ”14/09/1975“अकाल तख्त-नशीन और महाकाल-मूर्त बन समेटने की शक्ति का प्रयोग करो”16/01/1977“सन्तुष्ट आत्मा ही अनेक आत्माओं का इष्ट बन सकती है”18/01/1977“18 जनवरी का विशेष महत्व”28/01/1977“ब्राह्मणों का धर्म और कर्म”06/02/1977“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”03/05/1977“कर्मों की अति गुह्य गति”05/05/1977“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”11/05/1977“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”28/06/1977“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”28/12/1978“परमात्म प्रत्यक्षता का आधार सत्यता और सत्यता का आधार स्वच्छता और निर्भयता”12/01/1979“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”23/01/1980“पवित्रता का महत्व”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”04/10/1981“संकल्प शक्ति का महत्व”30/04/1982“विस्तार को बिन्दी में समाओ”01/03/1983“विश्व के हर स्थान पर आध्यात्मिक लाइट और ज्ञान जल पहुँचाओ”10/11/1983“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”26/11/1984“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”12/12/1984“विशेष आत्माओं का फर्ज”15/03/1985“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”20/02/1986“उड़ती कला से सर्व का भला”16/03/1986“रुहानी ड्रिल”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”09/04/1986“सच्चे सेवाधारी की निशानी”01/10/1987“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”27/11/1987“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”14/12/1987“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”19/11/1989“तन, मन, धन और जन का भाग्य”23/11/1989“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”14/01/1990“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”13/02/1991“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”22/12/1995“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”20/02/2001“शिव जयन्ती, व्रत लेने और सर्व समर्पण होने का यादगार है''04/11/2001“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''15/12/2001“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”20/10/2008“सन्तुष्टमणि बन विश्व में सन्तुष्टता की लाइट फैलाओ, सन्तुष्ट रहो और सबको सन्तुष्ट करो”
