मा . सर्वशक्तिवान - Master Almighty
67 unique murli dates in this topic
66 murlis in हिंदी
05/04/1970“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”23/10/1970“महारथी बनने का पुरुषार्थ”30/11/1970“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”09/04/1971“अव्यक्त स्थिति में सर्व गुणों का अनुभव”24/05/1971“पोज़ीशन में ठहरने से अपोज़ीशन समाप्त”22/06/1971“तीव्र पुरुषार्थी की निशानियाँ”29/08/1971“सबसे सूक्ष्म बन्धन - बुद्धि का अभिमान”12/03/1972“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”22/07/1972“नष्टोमोहा बनने की भिन्न-भिन्न युक्तियाँ”08/07/1974“मास्टर नॉलेजफुल व सर्व-शक्तिवान् विभिन्न प्रकार की क्यू से मुक्त”07/02/1976“अव्यक्त फरिश्तों की सभा”02/02/1977“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”23/04/1977“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”02/01/1978“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”03/02/1979“सर्व पर रहम करो, ‘वहम' और ‘अहम' भाव को मिटाओ”06/01/1982“सगंमयुगी ब्राह्मण जीवन में पवित्रता का महत्व”19/03/1982“कर्म - आत्मा का दर्शन कराने का दर्पण”26/04/1982“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”28/04/1982“सर्वन्श त्यागी की निशानियाँ”13/01/1983“स्वदर्शन चक्रधारी ही चक्रवर्ती राज्य भाग्य के अधिकारी”11/04/1983“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”14/04/1983“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”12/01/1984“सदा समर्थ सोचो तथा वर्णन करो”15/04/1984“स्नेही, सहयोगी, शक्तिशाली बच्चों की तीन अवस्थाएं”01/05/1984“विस्तार में सार की सुन्दरता”15/03/1985“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”18/03/1985“सन्तुष्टता”29/10/1987“तन, मन, धन और सम्बन्ध की शक्ति”14/12/1987“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”27/03/1988“सर्वश्रेष्ठ सितारा - ‘सफलता का सितारा’”15/11/1989“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”19/11/1989“तन, मन, धन और जन का भाग्य”21/12/1989“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”14/01/1990“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”31/12/1990“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”18/01/1991“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”17/03/1991“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”18/12/1991“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”07/03/1993“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”26/03/1993“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”18/11/1993“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”25/11/1993“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”02/12/1993“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”23/12/1993“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”31/12/1993“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”15/02/2000“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”30/03/2000“मन को दुरुस्त रखने के लिए बीच-बीच में 5 सेकेण्ड भी निकाल कर मन की एक्सरसाइज करो”16/12/2000“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”18/01/2001“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''18/01/2004“वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ''02/11/2004“स्व-उपकारी बन अपकारी पर भी उपकार करो, सर्व शक्ति, सर्व गुण सम्पन्न सम्मान दाता बनो”15/12/2005“नये वर्ष में स्नेह और सहयोग की रूपरेखा स्टेज पर लाओ, हर एक को गुण और शक्तियों की गिफ्ट दो”31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''28/03/2006“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”31/03/2007“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”30/11/2007“सत्यता और पवित्रता की शक्ति को स्वरूप में लाते बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो”15/12/2007“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”
