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Karma Afflictions & Diseases-कर्मभोग &बीमारी - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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Karma Afflictions & Diseases-कर्मभोग &बीमारी
Karma Afflictions & Diseases-कर्मभोग &बीमारी
73 unique murli dates in this topic
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73 murlis in हिंदी
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
20/11/1972
“स्थिति का आइना - सर्विस”
04/12/1972
“महावीर आत्माओं की रूहानी ड्रिल”
03/04/1981
“ज्ञान मार्ग की यादगार भक्ति मार्ग”
07/04/1981
“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”
15/04/1981
“नम्बरवन तकदीरवान की विशेषताएं”
24/10/1981
“सच्चे आशिक की निशानी”
18/01/1982
“18 जनवरी जिम्मेवारी के ताजपोशी का दिवस”
07/03/1982
“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”
21/02/1983
“शान्ति की शक्ति”
27/03/1983
“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”
03/04/1983
“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”
07/04/1983
“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”
04/05/1983
“सदा एक मत, एक ही रास्ते से एकरस स्थिति”
19/05/1983
“साक्षी दृष्टा कैसे बनें?”
12/12/1983
“एकाग्रता से सर्व शक्तियों की प्राप्ति”
12/01/1984
“सदा समर्थ सोचो तथा वर्णन करो”
24/02/1984
“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”
07/01/1985
“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”
18/02/1985
“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”
06/03/1985
“होली का रूहानी रहस्य”
15/03/1985
“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”
24/03/1985
“अब नहीं तो कब नहीं”
13/01/1986
“ब्राह्मण जीवन - सदा बेहद की खुशियों का जीवन”
20/02/1986
“उड़ती कला से सर्व का भला”
07/03/1986
“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”
16/03/1986
“रुहानी ड्रिल”
22/03/1986
“सुख, शान्ति और खुशी का आधार - पवित्रता”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
20/02/1987
“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”
20/03/1987
“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”
29/10/1987
“तन, मन, धन और सम्बन्ध की शक्ति”
14/12/1987
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”
18/12/1987
“कर्मातीत स्थिति की गुह्य परिभाषा”
24/02/1988
“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”
07/03/1988
“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”
23/11/1989
“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
25/12/1989
“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”
06/01/1990
“होलीहँस की परिभाषा”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
18/01/1991
“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
16/03/1992
“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”
01/04/1992
“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
09/01/1993
“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
25/01/1994
“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”
17/11/1994
“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”
22/12/1995
“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”
18/01/1996
“सदा समर्थ रहने की सहज विधि - शुभचिंतन करो और शुभचिंतक बनो”
22/03/1996
“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”
14/12/1997
“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”
30/11/1999
“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”
15/12/1999
“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”
18/01/2002
“स्नेह की शक्ति द्वारा समर्थ बनो, सर्व आत्माओं को सुख-शान्ति की अंचली दो''
25/10/2002
“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
28/02/2003
“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''
31/12/2003
“इस वर्ष निमित्त और निर्माण बन जमा के खाते को बढ़ाओ और अखण्ड महादानी बनो''
30/11/2005
“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”
15/12/2005
“नये वर्ष में स्नेह और सहयोग की रूपरेखा स्टेज पर लाओ, हर एक को गुण और शक्तियों की गिफ्ट दो”
15/02/2007
“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”
31/03/2007
“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”
15/10/2007
“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”
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