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Laziness-आलस्य/अलबेलापन - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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Laziness-आलस्य/अलबेलापन
Laziness-आलस्य/अलबेलापन
99 unique murli dates in this topic
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ગુજરાતી
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99 murlis in हिंदी
06/02/1969
“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”
18/09/1969
“त्रिनेत्री, त्रिकालदर्शी और त्रिलोकीनाथ बनने की युक्तियां”
25/06/1970
“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”
23/10/1970
“महारथी बनने का पुरुषार्थ”
11/02/1971
“अंत:वाहक शरीर द्वारा सेवा”
29/04/1971
“बेहद के पेपर में पास होने का साधन”
04/03/1972
“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”
15/03/1972
“त्याग और भाग्य”
20/05/1972
“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”
31/05/1972
“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”
14/06/1972
“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”
19/09/1972
“मजबूरियों को समाप्त करने का साधन - मजबूती”
04/05/1973
“अधिकारी और अधीन”
03/02/1974
“उपराम-वृत्ति व ज्वाला रूप के दृढ़ संकल्प से विनाश का कार्य सम्पन्न करो”
06/02/1974
“परखने की शक्ति से महारथी की परख”
18/06/1974
“लाइट हाउस और माइट हाउस बन, नई दुनिया के मेकर बनो”
08/07/1974
“मास्टर नॉलेजफुल व सर्व-शक्तिवान् विभिन्न प्रकार की क्यू से मुक्त”
09/01/1975
“सम्पूर्ण बनने में सबसे बड़ा विघ्न अलबेलापन”
02/02/1975
“स्व-चिन्तक, शुभ-चिन्तक और विश्व-परिवर्तक”
01/09/1975
“समीप और समान, महीन और महान”
10/09/1975
“नॉलेजफुल और पावरफुल आत्मा ही सक्सेसफुल”
22/09/1975
“स्वमान में स्थित होना ही सर्व खजानें और खुशी की चाबी है”
26/10/1975
“विकारी देह रूपी साँप से सारी कमाई खत्म”
27/10/1975
“क्वेश्चन, करेक्शन और कोटेशन से पुरुषार्थ में ढीलापन”
24/01/1976
“पुरुषार्थ की युक्ति - अब नहीं तो कब नहीं”
23/04/1977
“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”
07/06/1977
“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”
14/06/1977
“देश और विदेश का सैर-समाचार”
16/06/1977
“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”
03/12/1978
“पाप और पुण्य की गुह्य गति”
23/11/1979
“नम्रता रूपी कवच द्वारा स्नेह और सहयोग की प्राप्ति”
10/12/1979
“पुण्य आत्माओं के लक्षण”
17/12/1979
“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”
23/01/1980
“पवित्रता का महत्व”
06/02/1980
“अशरीरी बनने की सहज विधि”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
18/11/1981
“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”
22/01/1982
“बधाई और विदाई दो”
19/03/1982
“कर्म - आत्मा का दर्शन कराने का दर्पण”
11/04/1982
“व्यर्थ का त्याग कर समर्थ बनो”
02/05/1982
“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”
11/04/1983
“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”
13/04/1983
“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”
27/04/1983
“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”
29/12/1983
“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”
16/01/1984
“‘स्वराज्य’ - आपका बर्थ राईट है”
20/02/1984
“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”
19/04/1984
“भावुक आत्मा तथा ज्ञानी आत्मा के लक्षण”
19/11/1984
“बेहद की वैराग्य वृत्ति से सिद्धियों की प्राप्ति”
24/03/1985
“अब नहीं तो कब नहीं”
13/01/1986
“ब्राह्मण जीवन - सदा बेहद की खुशियों का जीवन”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
22/11/1987
“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”
10/01/1988
“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”
18/01/1988
“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
14/01/1990
“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
26/03/1993
“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
02/12/1993
“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
23/12/1993
“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”
26/01/1995
“ब्रह्मा बाप के और दो कदम - फ़रमानबरदार-व़फादार”
16/03/1995
“सर्व प्राप्ति सम्पन्न आत्मा की निशानी - सन्तुष्टता और प्रसन्नता”
16/11/1995
“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”
31/12/1995
“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”
22/03/1996
“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”
23/02/1997
“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”
13/03/1998
“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”
01/03/1999
“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”
15/03/1999
“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”
31/12/1999
“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”
03/03/2000
“जन्म दिन की विशेष गिफ्ट - शुभ भाव और प्रेम भाव को इमर्ज कर क्रोध महाशत्रु पर विजयी बनो”
16/12/2000
“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”
31/12/2000
“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”
18/01/2001
“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”
31/12/2001
“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''
03/02/2002
“लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ, सर्व खजानों में सम्पन्न बनो''
28/03/2002
“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
31/12/2002
“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”
15/12/2004
“बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले''
25/03/2005
“मास्टर ज्ञान सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ, विधाता बनो, तपस्वी बनो''
30/11/2005
“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”
31/12/2005
“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''
28/03/2006
“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”
16/11/2006
“अपने स्वमान की शान में रहो और समय के महत्व को जान एवररेडी बनो”
31/12/2006
“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“
15/02/2007
“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”
05/03/2008
“संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो, शिवमंत्र से मैं-पन का परिवर्तन करो”
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