Laziness-आलस्य/अलबेलापन
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06/02/1969“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”18/09/1969“त्रिनेत्री, त्रिकालदर्शी और त्रिलोकीनाथ बनने की युक्तियां”25/06/1970“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”23/10/1970“महारथी बनने का पुरुषार्थ”11/02/1971“अंत:वाहक शरीर द्वारा सेवा”29/04/1971“बेहद के पेपर में पास होने का साधन”04/03/1972“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”15/03/1972“त्याग और भाग्य”20/05/1972“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”31/05/1972“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”14/06/1972“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”19/09/1972“मजबूरियों को समाप्त करने का साधन - मजबूती”04/05/1973“अधिकारी और अधीन”03/02/1974“उपराम-वृत्ति व ज्वाला रूप के दृढ़ संकल्प से विनाश का कार्य सम्पन्न करो”06/02/1974“परखने की शक्ति से महारथी की परख”18/06/1974“लाइट हाउस और माइट हाउस बन, नई दुनिया के मेकर बनो”08/07/1974“मास्टर नॉलेजफुल व सर्व-शक्तिवान् विभिन्न प्रकार की क्यू से मुक्त”09/01/1975“सम्पूर्ण बनने में सबसे बड़ा विघ्न अलबेलापन”02/02/1975“स्व-चिन्तक, शुभ-चिन्तक और विश्व-परिवर्तक”01/09/1975“समीप और समान, महीन और महान”10/09/1975“नॉलेजफुल और पावरफुल आत्मा ही सक्सेसफुल”22/09/1975“स्वमान में स्थित होना ही सर्व खजानें और खुशी की चाबी है”26/10/1975“विकारी देह रूपी साँप से सारी कमाई खत्म”27/10/1975“क्वेश्चन, करेक्शन और कोटेशन से पुरुषार्थ में ढीलापन”24/01/1976“पुरुषार्थ की युक्ति - अब नहीं तो कब नहीं”23/04/1977“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”07/06/1977“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”14/06/1977“देश और विदेश का सैर-समाचार”16/06/1977“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”03/12/1978“पाप और पुण्य की गुह्य गति”23/11/1979“नम्रता रूपी कवच द्वारा स्नेह और सहयोग की प्राप्ति”10/12/1979“पुण्य आत्माओं के लक्षण”17/12/1979“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”23/01/1980“पवित्रता का महत्व”06/02/1980“अशरीरी बनने की सहज विधि”05/04/1981“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”18/11/1981“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”22/01/1982“बधाई और विदाई दो”19/03/1982“कर्म - आत्मा का दर्शन कराने का दर्पण”11/04/1982“व्यर्थ का त्याग कर समर्थ बनो”02/05/1982“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”11/04/1983“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”13/04/1983“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”27/04/1983“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”29/12/1983“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”16/01/1984“‘स्वराज्य’ - आपका बर्थ राईट है”20/02/1984“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”19/04/1984“भावुक आत्मा तथा ज्ञानी आत्मा के लक्षण”19/11/1984“बेहद की वैराग्य वृत्ति से सिद्धियों की प्राप्ति”24/03/1985“अब नहीं तो कब नहीं”13/01/1986“ब्राह्मण जीवन - सदा बेहद की खुशियों का जीवन”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”22/11/1987“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”10/01/1988“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”18/01/1988“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”15/11/1989“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”14/01/1990“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”31/03/1990“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”13/02/1991“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”18/12/1991“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”21/11/1992“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”07/03/1993“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”26/03/1993“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”02/12/1993“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”23/12/1993“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”26/01/1995“ब्रह्मा बाप के और दो कदम - फ़रमानबरदार-व़फादार”16/03/1995“सर्व प्राप्ति सम्पन्न आत्मा की निशानी - सन्तुष्टता और प्रसन्नता”16/11/1995“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”31/12/1995“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”22/03/1996“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”23/02/1997“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”13/03/1998“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”01/03/1999“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”15/03/1999“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”31/12/1999“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”03/03/2000“जन्म दिन की विशेष गिफ्ट - शुभ भाव और प्रेम भाव को इमर्ज कर क्रोध महाशत्रु पर विजयी बनो”16/12/2000“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”31/12/2000“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”18/01/2001“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”31/12/2001“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''03/02/2002“लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ, सर्व खजानों में सम्पन्न बनो''28/03/2002“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''31/12/2002“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”15/12/2004“बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले''25/03/2005“मास्टर ज्ञान सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ, विधाता बनो, तपस्वी बनो''30/11/2005“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''28/03/2006“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”16/11/2006“अपने स्वमान की शान में रहो और समय के महत्व को जान एवररेडी बनो”31/12/2006“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“15/02/2007“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”05/03/2008“संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो, शिवमंत्र से मैं-पन का परिवर्तन करो”
