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माताए - mothers - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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माताए - mothers
माताए - mothers
72 unique murli dates in this topic
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72 murlis in हिंदी
18/09/1969
“त्रिनेत्री, त्रिकालदर्शी और त्रिलोकीनाथ बनने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
01/03/1971
“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”
15/03/1972
“त्याग और भाग्य”
08/10/1981
“ब्रह्मा बाप की एक शुभ आशा”
01/11/1981
“सेवा के सफलता की कुन्जी”
28/11/1981
“आप पूर्वजों से सर्व आत्माओं की आशाएं”
15/01/1983
“सहजयोगी और प्रयोगी की व्याख्या”
21/03/1983
“भारत माता शक्ति अवतार द्वारा विश्व का उद्धार”
03/04/1983
“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”
07/04/1983
“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”
11/04/1983
“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”
13/04/1983
“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”
11/05/1983
“हे युवकों विश्व परिवर्तन के कार्य में निमित्त बनो”
12/12/1983
“एकाग्रता से सर्व शक्तियों की प्राप्ति”
09/05/1984
“सदा एकरस उड़ने और उड़ाने के गीत गाओ”
12/12/1984
“विशेष आत्माओं का फर्ज”
14/01/1985
“शुभ चिन्तक बनने का आधार स्वचिन्तन और शुभ चिन्तन”
18/02/1985
“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”
27/02/1985
“शिव शक्ति पाण्डव सेना की विशेषतायें”
06/03/1985
“होली का रूहानी रहस्य”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
04/03/1986
“सर्व श्रेष्ठ नई रचना का फाउण्डेशन - निस्वार्थ स्नेह”
17/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”
14/01/1988
“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”
22/01/1988
“हिम्मत का पहला कदम - समर्पणता”
30/01/1988
“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
23/11/1989
“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
06/01/1990
“होलीहँस की परिभाषा”
14/01/1990
“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
11/12/1991
“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
09/01/1993
“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
18/11/1993
“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
31/12/1993
“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
25/01/1994
“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”
01/02/1994
“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”
17/11/1994
“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”
16/11/1995
“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”
13/12/1995
“व्यर्थ बोल, डिस्टर्ब करने वाले बोल से स्वयं को मुक्त कर बोल की एकॉनॉमी करो”
14/12/1997
“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”
30/03/1999
“तीव्र पुरुषार्थ की लगन को ज्वाला रूप बनाकर बेहद के वैराग्य की लहर फैलाओ”
25/11/2000
“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”
18/01/2001
“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”
25/11/2001
“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''
15/12/2001
“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”
31/12/2001
“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''
31/12/2002
“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”
28/02/2003
“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''
15/11/2003
“मन को एकाग्र कर, एकाग्रता की शक्ति द्वारा फरिश्ता स्थिति का अनुभव करो''
30/11/2003
“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''
05/03/2004
“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''
07/03/2005
“सम्पूर्ण पवित्रता का व्रत रखना और मैं पन को समर्पित करना ही शिवजयन्ती मनाना है''
14/03/2006
“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''
15/02/2007
“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”
31/10/2007
“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”
18/01/2008
“सच्चे स्नेही बन, सब बोझ बाप को देकर मौज का अनुभव करो, मेहनत मुक्त बनो”
18/03/2008
“कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन कर मास्टर मुक्तिदाता बनो, सबको बाप के संग का रंग लगाकर समान बनने की होली मनाओ”
02/04/2008
”इस वर्ष चारों ही सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”