श्रेष्ठा भाग्यवान आत्मा - Great fortunate soul

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20/12/1969“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”22/01/1970“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”15/03/1972“त्याग और भाग्य”19/09/1972“मजबूरियों को समाप्त करने का साधन - मजबूती”06/12/1975“याद में समा जाना अर्थात् लवलीन होना”18/01/1976“समर्थी दिवस के रूप में स्मृति दिवस”02/02/1977“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”12/12/1978“परोपकारी कैसे बनें?”28/12/1978“परमात्म प्रत्यक्षता का आधार सत्यता और सत्यता का आधार स्वच्छता और निर्भयता”14/01/1979“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”16/01/1979“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”23/01/1979“सदा सुहागिन ही सदा सम्पन्न है”30/11/1979“स्वमान में स्थित आत्मा के लक्षण”25/01/1980“बिन्दु रूप परमात्मा का बिन्दु रूप आत्मा से मिलन”04/02/1980“भाग्य विधाता बाप और भाग्यशाली बच्चे”07/03/1981“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”13/04/1981“रूहे-गुलाब की विशेषता”06/10/1981“ज्ञान सूर्य बाप की मास्टर ज्ञान सूर्य बच्चों को सेवा की बधाई”09/10/1981“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”14/01/1982“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”22/01/1982“बधाई और विदाई दो”07/03/1982“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”09/03/1982“होली मनाने और जलाने की अलौकिक रीति”01/04/1982“भाग्य का आधार त्याग”25/12/1982“विधि, विधान और वरदान”21/04/1983“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”19/12/1983“परमात्म प्यार - नि:स्वार्थ प्यार”12/01/1984“सदा समर्थ सोचो तथा वर्णन करो”01/03/1984“एक का हिसाब”02/04/1984“बिन्दु का महत्व”17/04/1984“पद्मापद्म भाग्यशाली की निशानी”01/05/1984“विस्तार में सार की सुन्दरता”19/11/1984“बेहद की वैराग्य वृत्ति से सिद्धियों की प्राप्ति”26/12/1984“सत्यता की शक्ति”09/01/1985“श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं की रूहानी पर्सनैलिटी”16/01/1985“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”16/02/1985“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”18/02/1985“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”27/02/1985“शिव शक्ति पाण्डव सेना की विशेषतायें”18/03/1985“सन्तुष्टता”01/01/1986“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”01/03/1986“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”09/04/1986“सच्चे सेवाधारी की निशानी”18/01/1987“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”21/01/1987“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”20/03/1987“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”01/10/1987“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”17/10/1987“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”18/11/1987“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”27/11/1987“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”26/01/1988“संगमयुग पर नम्बरवन पूज्य बनने की अलौकिक विधि”07/03/1988“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”15/03/1988“नई दुनिया की तस्वीर का आधार वर्तमान श्रेष्ठ ब्राह्मण जीवन”27/03/1988“सर्वश्रेष्ठ सितारा - ‘सफलता का सितारा’”19/11/1989“तन, मन, धन और जन का भाग्य”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”29/12/1989“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”02/01/1990“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”18/01/1991“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”03/04/1991“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”11/12/1991“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”03/10/1992“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”02/12/1993“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”31/12/1993“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”17/11/1994“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”16/02/1996“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”06/03/1997“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”13/11/1997“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”28/11/1997“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”31/01/1998“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”21/11/1998“सेवा के साथ देह में रहते विदेही अवस्था का अनुभव बढ़ाओ”12/12/1998“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”13/02/1999“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”30/03/1999“तीव्र पुरुषार्थ की लगन को ज्वाला रूप बनाकर बेहद के वैराग्य की लहर फैलाओ”11/11/2000“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''11/03/2002“विशेषतायें परमात्म देन हैं - इन्हें विश्व सेवा में अर्पण करो''28/03/2002“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”08/10/2002“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''28/02/2003“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''17/03/2003“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''30/11/2003“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''15/12/2003“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''17/02/2004“शिवरात्रि जन्म उत्सव का विशेष स्लोगन - सर्व को सहयोग दो और सहयोगी बनाओ, सदा अखण्ड भण्डारा चलता रहे''15/10/2004“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''30/11/2004“अभी अपने चलन और चेहरे द्वारा ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाओ, साक्षात्कार मूर्त बनो''03/02/2005“सेवा करते उपराम और बेहद वृत्ति द्वारा एवररेडी बन ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न बनो''20/02/2005“दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो''25/03/2005“मास्टर ज्ञान सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ, विधाता बनो, तपस्वी बनो''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''14/03/2006“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''15/12/2006“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''18/01/2007“अब स्वयं को मुक्त कर मास्टर मुक्तिदाता बन सबको मुक्ति दिलाने के निमित्त बनो”17/03/2007“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”31/03/2007“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”15/10/2007“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”31/10/2007“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”15/12/2007“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”

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