ड्रामा - Drama
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25/01/1969“समर्पण की ऊंची स्टेज - श्वांसों-श्वांस स्मृति”28/11/1969“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”05/03/1970“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”05/11/1970“डिले इज़ डेन्जर”08/06/1971“जीवन के लिए तीन चीजों की आवश्यकता - खुराक, खुशी और खज़ाना”11/07/1971“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”02/08/1972“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”08/07/1973“समय की पुकार”02/08/1973“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”15/04/1974“विघ्न-विनाशक बनकर अंगद समान माया पर विजय प्राप्त करो”10/02/1975“सर्व शक्तियों सहित सेवा में समर्पण”02/08/1975“विदेशों में ईश्वरीय सेवा का महत्व”23/01/1976“संकल्प, वाणी और स्वरूप के हाईएस्ट और होलीएस्ट होने से बाप की प्रत्यक्षता”01/02/1976“रूहानी शमा और तीन प्रकार के रूहानी परवाने”18/01/1977“18 जनवरी का विशेष महत्व”28/04/1977“सदा सुहागिन की निशानियाँ”03/05/1977“कर्मों की अति गुह्य गति”14/05/1977“स्वमान और फ़रमान”19/05/1977“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”02/06/1977“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”07/06/1977“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”10/06/1977“मन्त्र और यन्त्र के निरन्तर प्रयोग से अन्तर समाप्त”14/06/1977“देश और विदेश का सैर-समाचार”20/06/1977“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”22/06/1977“सितारों की दुनिया का रहस्य”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”02/01/1978“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”01/04/1978“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”03/12/1978“पाप और पुण्य की गुह्य गति”01/01/1979“नए वर्ष के लिए बाप द्वारा कराया गया दृढ़ संकल्प”08/01/1979“संगमयुग पर समानता में समीप और भविष्य के सम्बन्ध में समीप”10/01/1979“अब वेस्ट और वेट को समाप्त करो”14/01/1979“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”16/01/1979“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”12/11/1979“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”05/12/1979“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”15/12/1979“विदेशी बच्चों के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”19/12/1979“सहज याद का साधन - स्वयं को खुदाई खिदमतगार समझो”20/01/1981“मन, बुद्धि, संस्कार के अधिकारी ही वरदानी मूर्त”07/03/1981“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”11/03/1981“सफलता के दो मुख्य आधार”17/03/1981“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”07/04/1981“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”17/10/1981“सभी परिस्थितियों का समाधान उड़ता पंछी बनो”02/01/1982“विश्व-परिवर्तन की जिम्मेवारी - संगमयुगी ब्राह्मणों पर”04/01/1982“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”12/03/1982“चैतन्य पुष्पों में रंग, रुप, खुशबू का आधार”24/03/1982“ब्राह्मण जीवन की विशेषता है - पवित्रता”30/07/1983“जहाँ सच्चा स्नेह है वहाँ दु:ख की लहर नहीं”01/12/1983“सुख, शान्ति और पवित्रता के तीन अधिकार”14/01/1984“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”13/02/1984“अशान्ति का कारण अप्राप्ति और अप्राप्ति का कारण अपवित्रता है”28/02/1984“बिन्दु और बूंद का रहस्य”15/03/1984“होली उत्सव - पवित्र बनने, बनाने का यादगार”17/04/1984“पद्मापद्म भाग्यशाली की निशानी”07/05/1984“बैलेन्स रखने से ही ब्लैसिंग की प्राप्ति”21/03/1985“स्वदर्शन चक्र से विजय चक्र की प्राप्ति”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”20/02/1986“उड़ती कला से सर्व का भला”10/03/1986“बेफिकर बादशाह बनने की युक्ति”16/03/1986“रुहानी ड्रिल”07/04/1986“तपस्वी-मूर्त, त्याग मूर्त, विधाता ही विश्व-राज्य अधिकारी”11/04/1986“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की युक्ति”21/01/1987“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”23/01/1987“सफलता के सितारे की विशेषतायें”20/02/1987“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”22/11/1987“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”06/12/1987“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”18/12/1987“कर्मातीत स्थिति की गुह्य परिभाषा”14/01/1988“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”20/02/1988“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”24/02/1988“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”28/02/1988“डबल विदेशी ब्राह्मण बच्चों की विशेषतायें”11/11/1989“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”05/12/1989“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”02/01/1990“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”10/01/1990“होलीहँस की विशेषतायें”18/01/1990“स्वयं और सेवा में तीव्रगति के परिवर्तन का गुह्य राज़”20/01/1990“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”01/03/1990“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”18/01/1991“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”13/02/1991“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”17/03/1991“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”03/04/1991“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”04/12/1991“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”18/12/1991“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”31/12/1991“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”01/04/1992“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”03/10/1992“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”31/12/1992“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”02/12/1993“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”23/12/1993“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”18/01/1996“सदा समर्थ रहने की सहज विधि - शुभचिंतन करो और शुभचिंतक बनो”27/02/1996“सत्यता का फाउण्डेशन है पवित्रता और निशानी है - चलन वा चेहरे में दिव्यता”10/03/1996“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”31/12/1996“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”18/01/1997“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”13/11/1997“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”14/12/1997“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”30/11/1999“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”31/12/1999“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”11/11/2000“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”25/11/2000“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”16/12/2000“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”18/01/2002“स्नेह की शक्ति द्वारा समर्थ बनो, सर्व आत्माओं को सुख-शान्ति की अंचली दो''08/10/2002“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”17/02/2004“शिवरात्रि जन्म उत्सव का विशेष स्लोगन - सर्व को सहयोग दो और सहयोगी बनाओ, सदा अखण्ड भण्डारा चलता रहे''30/11/2004“अभी अपने चलन और चेहरे द्वारा ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाओ, साक्षात्कार मूर्त बनो''30/11/2005“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”28/03/2006“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”
