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ड्रामा - Drama - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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ड्रामा - Drama
ड्रामा - Drama
123 unique murli dates in this topic
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ગુજરાતી
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122 murlis in हिंदी
25/01/1969
“समर्पण की ऊंची स्टेज - श्वांसों-श्वांस स्मृति”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
05/03/1970
“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”
05/11/1970
“डिले इज़ डेन्जर”
08/06/1971
“जीवन के लिए तीन चीजों की आवश्यकता - खुराक, खुशी और खज़ाना”
11/07/1971
“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”
02/08/1972
“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”
08/07/1973
“समय की पुकार”
02/08/1973
“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”
15/04/1974
“विघ्न-विनाशक बनकर अंगद समान माया पर विजय प्राप्त करो”
10/02/1975
“सर्व शक्तियों सहित सेवा में समर्पण”
02/08/1975
“विदेशों में ईश्वरीय सेवा का महत्व”
23/01/1976
“संकल्प, वाणी और स्वरूप के हाईएस्ट और होलीएस्ट होने से बाप की प्रत्यक्षता”
01/02/1976
“रूहानी शमा और तीन प्रकार के रूहानी परवाने”
18/01/1977
“18 जनवरी का विशेष महत्व”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
14/05/1977
“स्वमान और फ़रमान”
19/05/1977
“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”
02/06/1977
“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”
07/06/1977
“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”
10/06/1977
“मन्त्र और यन्त्र के निरन्तर प्रयोग से अन्तर समाप्त”
14/06/1977
“देश और विदेश का सैर-समाचार”
20/06/1977
“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”
22/06/1977
“सितारों की दुनिया का रहस्य”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
02/01/1978
“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
01/04/1978
“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”
03/12/1978
“पाप और पुण्य की गुह्य गति”
01/01/1979
“नए वर्ष के लिए बाप द्वारा कराया गया दृढ़ संकल्प”
08/01/1979
“संगमयुग पर समानता में समीप और भविष्य के सम्बन्ध में समीप”
10/01/1979
“अब वेस्ट और वेट को समाप्त करो”
14/01/1979
“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”
16/01/1979
“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”
12/11/1979
“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”
05/12/1979
“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”
15/12/1979
“विदेशी बच्चों के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”
19/12/1979
“सहज याद का साधन - स्वयं को खुदाई खिदमतगार समझो”
20/01/1981
“मन, बुद्धि, संस्कार के अधिकारी ही वरदानी मूर्त”
07/03/1981
“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”
11/03/1981
“सफलता के दो मुख्य आधार”
17/03/1981
“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”
07/04/1981
“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”
17/10/1981
“सभी परिस्थितियों का समाधान उड़ता पंछी बनो”
02/01/1982
“विश्व-परिवर्तन की जिम्मेवारी - संगमयुगी ब्राह्मणों पर”
04/01/1982
“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”
12/03/1982
“चैतन्य पुष्पों में रंग, रुप, खुशबू का आधार”
24/03/1982
“ब्राह्मण जीवन की विशेषता है - पवित्रता”
30/07/1983
“जहाँ सच्चा स्नेह है वहाँ दु:ख की लहर नहीं”
01/12/1983
“सुख, शान्ति और पवित्रता के तीन अधिकार”
14/01/1984
“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”
13/02/1984
“अशान्ति का कारण अप्राप्ति और अप्राप्ति का कारण अपवित्रता है”
28/02/1984
“बिन्दु और बूंद का रहस्य”
15/03/1984
“होली उत्सव - पवित्र बनने, बनाने का यादगार”
17/04/1984
“पद्मापद्म भाग्यशाली की निशानी”
07/05/1984
“बैलेन्स रखने से ही ब्लैसिंग की प्राप्ति”
21/03/1985
“स्वदर्शन चक्र से विजय चक्र की प्राप्ति”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
20/02/1986
“उड़ती कला से सर्व का भला”
10/03/1986
“बेफिकर बादशाह बनने की युक्ति”
16/03/1986
“रुहानी ड्रिल”
07/04/1986
“तपस्वी-मूर्त, त्याग मूर्त, विधाता ही विश्व-राज्य अधिकारी”
11/04/1986
“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की युक्ति”
21/01/1987
“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”
23/01/1987
“सफलता के सितारे की विशेषतायें”
20/02/1987
“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”
22/11/1987
“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”
06/12/1987
“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”
18/12/1987
“कर्मातीत स्थिति की गुह्य परिभाषा”
14/01/1988
“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”
20/02/1988
“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”
24/02/1988
“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”
28/02/1988
“डबल विदेशी ब्राह्मण बच्चों की विशेषतायें”
11/11/1989
“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
02/01/1990
“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
18/01/1990
“स्वयं और सेवा में तीव्रगति के परिवर्तन का गुह्य राज़”
20/01/1990
“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
25/03/1990
“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”
18/01/1991
“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
17/03/1991
“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”
03/04/1991
“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”
04/12/1991
“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
16/03/1992
“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”
01/04/1992
“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
03/10/1992
“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
02/12/1993
“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
23/12/1993
“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”
18/01/1996
“सदा समर्थ रहने की सहज विधि - शुभचिंतन करो और शुभचिंतक बनो”
27/02/1996
“सत्यता का फाउण्डेशन है पवित्रता और निशानी है - चलन वा चेहरे में दिव्यता”
10/03/1996
“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”
31/12/1996
“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”
18/01/1997
“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
13/11/1997
“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”
14/12/1997
“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”
15/11/1999
“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”
30/11/1999
“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”
31/12/1999
“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”
11/11/2000
“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”
25/11/2000
“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”
16/12/2000
“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”
18/01/2002
“स्नेह की शक्ति द्वारा समर्थ बनो, सर्व आत्माओं को सुख-शान्ति की अंचली दो''
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
17/02/2004
“शिवरात्रि जन्म उत्सव का विशेष स्लोगन - सर्व को सहयोग दो और सहयोगी बनाओ, सदा अखण्ड भण्डारा चलता रहे''
30/11/2004
“अभी अपने चलन और चेहरे द्वारा ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाओ, साक्षात्कार मूर्त बनो''
30/11/2005
“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”
28/03/2006
“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”
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