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मन्सा सेवा (Service through mind) - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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मन्सा सेवा (Service through mind)
मन्सा सेवा (Service through mind)
84 unique murli dates in this topic
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हिंदी
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తెలుగు
84 murlis in हिंदी
06/02/1969
“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”
06/07/1969
“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
19/06/1970
“त्रिमूर्ति लाइट्स का साक्षात्कार”
11/07/1970
“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”
27/07/1970
“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
07/01/1977
“विश्व-कल्याणकारी कैसे बनें?”
26/01/1977
“अन्तर्मुखता द्वारा सूक्ष्म शक्ति की लीलाओं का अनुभव”
31/01/1977
“भक्तों को सर्व प्राप्ति कराने का आधार है - इच्छा मात्रम् अविद्या की स्थिति”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
28/06/1977
“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
18/01/1978
“बापदादा की सेवा का रिटर्न”
24/01/1978
“निरन्तर सेवाधारी”
16/02/1978
“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”
12/01/1979
“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”
14/01/1979
“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”
05/02/1979
“मधुबन निवासियों के साथ बापदादा की रूहरिहान''
19/11/1979
“बेहद के वानप्रस्थी अर्थात् निरन्तर एकान्त में सदा स्मृति स्वरूप”
30/11/1979
“स्वमान में स्थित आत्मा के लक्षण”
03/12/1979
“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”
15/12/1979
“विदेशी बच्चों के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”
17/12/1979
“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”
09/01/1980
“अलौकिक ड्रेस और अलौकिक श्रृंगार”
21/01/1980
“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”
23/01/1980
“पवित्रता का महत्व”
25/01/1980
“बिन्दु रूप परमात्मा का बिन्दु रूप आत्मा से मिलन”
30/01/1980
“स्नेह, सहयोग और शक्ति स्वरूप के पेपर्स की चेकिंग और रिजल्ट”
04/02/1980
“भाग्य विधाता बाप और भाग्यशाली बच्चे”
20/01/1981
“मन, बुद्धि, संस्कार के अधिकारी ही वरदानी मूर्त”
15/04/1981
“नम्बरवन तकदीरवान की विशेषताएं”
04/10/1981
“संकल्प शक्ति का महत्व”
29/12/1981
“दूरदेशी बच्चों से दूर देशी बापदादा का मिलन”
14/03/1982
“बापदादा द्वारा देश-विदेश का समाचार”
27/03/1982
“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”
03/04/1982
“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”
28/12/1982
“सदा एक रस, सम्पूर्ण चमकता हुआ सितारा बनो”
13/04/1983
“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”
10/11/1983
“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”
18/02/1984
“ब्राह्मण जीवन - अमूल्य जीवन”
07/03/1984
“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”
19/04/1984
“भावुक आत्मा तथा ज्ञानी आत्मा के लक्षण”
19/11/1984
“बेहद की वैराग्य वृत्ति से सिद्धियों की प्राप्ति”
28/01/1985
“विश्व सेवा का सहज साधन मन्सा सेवा”
18/02/1985
“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”
27/02/1985
“शिव शक्ति पाण्डव सेना की विशेषतायें”
06/01/1986
“संगमयुग - जमा करने का युग”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
18/02/1986
“निरन्तर सेवाधारी तथा निरन्तर योगी बनो”
06/11/1987
“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”
10/11/1987
“शुभचिन्तक-मणि बन विश्व को चिन्ताओं से मुक्त करो”
18/11/1987
“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”
27/11/1989
“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”
31/12/1989
“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”
25/03/1990
“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
17/03/1991
“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
26/03/1993
“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
18/11/1993
“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”
13/11/1997
“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”
30/03/1998
“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”
31/12/2000
“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”
04/11/2001
“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''
15/12/2001
“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”
24/02/2002
“बाप को प्रत्यक्ष करने के लिए अपनी वा दूसरों की वृत्ति को पॉजिटिव बनाओ''
28/03/2002
“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
15/12/2002
“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”
31/12/2002
“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”
18/01/2003
“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
28/02/2003
“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''
17/03/2003
“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''
15/11/2003
“मन को एकाग्र कर, एकाग्रता की शक्ति द्वारा फरिश्ता स्थिति का अनुभव करो''
14/03/2006
“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''
28/03/2006
“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”
31/10/2006
“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''
30/11/2006
“ज्वालामुखी तपस्या द्वारा मैं-पन की पूंछ को जलाकर बापदादा समान बनो तब समाप्ति समीप आयेगी''
03/03/2007
“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”
17/03/2007
“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”
31/12/2007
“नये वर्ष में अखण्ड महादानी, अखण्ड निर्विघ्न, अखण्ड योगी और सदा सफलतामूर्त बनना”
20/10/2008
“सन्तुष्टमणि बन विश्व में सन्तुष्टता की लाइट फैलाओ, सन्तुष्ट रहो और सबको सन्तुष्ट करो”
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