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Situation/Problem-परिस्थिति/समस्या - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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Situation/Problem-परिस्थिति/समस्या
Situation/Problem-परिस्थिति/समस्या
90 unique murli dates in this topic
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89 murlis in हिंदी
06/02/1969
“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”
17/04/1969
“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”
23/07/1969
“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”
16/10/1969
“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
18/01/1970
“सम्पूर्ण विल करने से विल-पावर की प्राप्ति”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
28/05/1970
“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”
18/06/1970
“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
30/11/1970
“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
24/05/1971
“पोज़ीशन में ठहरने से अपोज़ीशन समाप्त”
19/07/1971
“सिम्पल बनो, सैम्पल बनो”
03/10/1971
“निर्मानता के गुण से विश्व निर्माता”
27/02/1972
“होलीहंस बनने का यादगार - होली”
03/05/1972
“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”
12/07/1972
“मरजीवापन की स्मृति से गृहस्थी वा प्रवृत्ति की विस्मृति”
04/08/1972
“सर्विसएबुल, सेंसीबुल और इसेंसफुल की निशानियां”
12/11/1972
“अलौकिक कर्म करने की कला”
20/10/1975
“परहेज द्वारा संगमयुग के सर्व सुखों की अनुभूति”
08/12/1975
“बच्चे की विभिन्न स्टेजेस”
25/01/1976
“डबल लाइट स्वरूप बनो”
06/02/1977
“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”
19/05/1977
“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”
24/05/1977
“बाप के डायरेक्ट बच्चे ही डबल पूजा के अधिकारी बनते हैं”
16/06/1977
“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”
18/06/1977
“योग की पॉवरफुल स्टेज कैसे बने?”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
16/02/1978
“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”
29/11/1978
“सन्तुष्टता से प्रसन्नता और प्रशंसा की प्राप्ति”
03/12/1978
“पाप और पुण्य की गुह्य गति”
26/11/1979
“प्रीत की रीति”
25/03/1981
“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”
17/10/1981
“सभी परिस्थितियों का समाधान उड़ता पंछी बनो”
08/11/1981
“अन्तर सम्पन्न करने का साधन ‘तुरन्त दान महापुण्य’”
11/11/1981
“बिन्दु का महत्व”
13/11/1981
“परखने और निर्णय शक्ति का आधार - साइलेन्स की शक्ति”
22/01/1982
“बधाई और विदाई दो”
02/05/1982
“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”
07/05/1983
“ब्राह्मणों का संसार - बेगमपुर”
10/11/1983
“सहज शब्द की लहर को समाप्त कर साक्षात्कार मूर्त बनो”
20/01/1984
“महादानी बनो, वरदानी बनो”
07/03/1984
“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”
08/04/1984
“संगमयुग पर प्राप्त अधिकारों से विश्व राज्य अधिकारी”
26/11/1984
“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”
27/03/1986
“सदा के स्नेही बनो”
31/03/1986
“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”
23/01/1987
“सफलता के सितारे की विशेषतायें”
10/11/1987
“शुभचिन्तक-मणि बन विश्व को चिन्ताओं से मुक्त करो”
25/12/1989
“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”
02/01/1990
“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”
03/10/1992
“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
09/01/1993
“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”
23/12/1993
“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
18/01/1994
“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”
03/04/1994
“सन्तुष्टता का आधार - सम्बन्ध, सम्पत्ति और सेहत (तन्दुरुस्ती)”
23/12/1994
“अपने तीन स्वरूप सदा स्मृति में रहें - 1- संगमयुगी ब्राह्मण, 2- ब्राह्मण सो फ़रिश्ता और 3- फ़रिश्ता सो देवता”
26/02/1995
“संगमयुग उत्सव का युग है - उत्सव मनाना अर्थात् अविनाशी उमंग-उत्साह में रहना”
07/03/1995
“ब्राह्मण अर्थात् धर्म सत्ता और स्वराज्य सत्ता की अधिकारी आत्मा”
18/01/1996
“सदा समर्थ रहने की सहज विधि - शुभचिंतन करो और शुभचिंतक बनो”
16/02/1996
“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”
06/03/1997
“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”
14/12/1997
“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”
13/03/1998
“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”
01/03/1999
“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”
15/12/1999
“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”
31/12/1999
“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”
15/02/2000
“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”
25/11/2000
“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”
25/11/2001
“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''
03/02/2002
“लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ, सर्व खजानों में सम्पन्न बनो''
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
17/03/2003
“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''
17/10/2003
“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''
02/11/2004
“स्व-उपकारी बन अपकारी पर भी उपकार करो, सर्व शक्ति, सर्व गुण सम्पन्न सम्मान दाता बनो”
03/02/2005
“सेवा करते उपराम और बेहद वृत्ति द्वारा एवररेडी बन ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न बनो''
15/11/2005
“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''
28/03/2006
“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”
18/01/2007
“अब स्वयं को मुक्त कर मास्टर मुक्तिदाता बन सबको मुक्ति दिलाने के निमित्त बनो”
02/02/2007
“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”
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