सायन्स और साइलेंस - Science /Silence
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06/02/1969“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”05/04/1970“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”25/06/1970“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”02/07/1970“साइलेन्स बल का प्रयोग”22/10/1970“फुल की निशानी - फ्लोलेस”29/10/1970“दीपमाला का सच्चा रहस्य”01/11/1970“बाप समान बनने की युक्तियां”09/12/1970“पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर”31/12/1970“अमृतवेले से परिवर्तन शक्ति का प्रयोग”11/07/1971“विश्व-कल्याणकारी बनने के लिए मुख्य धारणाएं”18/07/1971“विल पावर और कन्ट्रोलिंग पावर”27/07/1971“बुद्धि रूपी नेत्र क्लीयर और पावरफुल बनाओ”03/10/1971“निर्मानता के गुण से विश्व निर्माता”24/12/1972“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”23/01/1973“सम्पूर्ण मूर्त बनने के चार स्तम्भ”16/05/1973“अन्तिम पुरुषार्थ”15/07/1973“लगाव और स्वभाव के बदलने से विश्व-परिवर्तन”25/01/1974“निराकार स्वरूप की स्मृति में रहने तथा आनन्द रस लेने की सहज विधि”24/04/1974“त्रिमूर्ति लाइट के साक्षात्कार-मूर्त बनने की डेट फिक्स करो”30/06/1974“अव्यक्त स्थिति में स्थित होने से पुरुषार्थ की गति में तीव्रता”05/12/1974“व्यर्थ संकल्पों को समर्थ बनाने से काल पर विजय”10/02/1975“सर्व शक्तियों सहित सेवा में समर्पण”11/10/1975“अन्त:वाहक अर्थात् अव्यक्त फरिश्ते रूप द्वारा सैर”23/10/1975“इन्तज़ार को छोड़कर इन्तज़ाम करो!”07/01/1977“विश्व-कल्याणकारी कैसे बनें?”26/01/1977“अन्तर्मुखता द्वारा सूक्ष्म शक्ति की लीलाओं का अनुभव”14/05/1977“स्वमान और फ़रमान”02/06/1977“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”12/06/1977“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”14/06/1977“देश और विदेश का सैर-समाचार”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”01/12/1978“सर्व खजानों की चाबी - एकनामी बनना”03/12/1978“पाप और पुण्य की गुह्य गति”10/12/1978“विस्तार को न देख सार अर्थात् बिन्दु को देखो”01/01/1979“नए वर्ष के लिए बाप द्वारा कराया गया दृढ़ संकल्प”10/01/1979“अब वेस्ट और वेट को समाप्त करो”30/01/1979“सर्व बन्धनों से मुक्ति की युक्ति”03/12/1979“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”10/12/1979“पुण्य आत्माओं के लक्षण”17/12/1979“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”14/01/1980“रूहानी सेनानियों से रूहानी कमाण्डर की मुलाकात”04/02/1980“भाग्य विधाता बाप और भाग्यशाली बच्चे”15/03/1981“स्वदर्शन चक्रधारी तथा चक्रवर्ती ही विश्व-कल्याणकारी”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”31/12/1981“निर्बल को बल देने वाले महाबलवान बनो”12/01/1982“विश्व का उद्धार - आधारमूर्त आत्माओं पर निर्भर”14/01/1982“कर्मेन्द्रिय जीत ही विश्व राज्य अधिकारी”18/01/1982“18 जनवरी जिम्मेवारी के ताजपोशी का दिवस”16/04/1982“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”21/02/1983“शान्ति की शक्ति”05/03/1984“शान्ति की शक्ति का महत्व”05/12/1984“सम्पूर्ण काम जीत अर्थात् हद की कामनाओं से परे”21/01/1985“ईश्वरीय जन्म दिन की गोल्डन गिफ्ट - ‘दिव्य बुद्धि’”23/01/1985“दिव्य जन्म की गिफ्ट - दिव्य नेत्र”28/01/1985“विश्व सेवा का सहज साधन मन्सा सेवा”21/02/1985“शीतलता की शक्ति”06/01/1986“संगमयुग - जमा करने का युग”04/03/1986“सर्व श्रेष्ठ नई रचना का फाउण्डेशन - निस्वार्थ स्नेह”20/02/1987“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”05/10/1987“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”14/11/1987“पूज्य देव आत्मा बनने का साधन - पवित्रता की शक्ति”18/11/1987“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”27/11/1987“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”28/02/1988“डबल विदेशी ब्राह्मण बच्चों की विशेषतायें”19/03/1988“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”11/11/1989“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”23/11/1989“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”27/11/1989“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”14/01/1990“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”01/03/1990“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”25/02/1991“सोच और कर्म में समानता लाना ही परमात्म प्यार निभाना है”11/12/1991“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”18/12/1991“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”13/02/1992“अनेक जन्म का प्यार सम्पन्न जीवन बनाने का आधार - इस जन्म का परमात्म-प्यार”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”21/11/1992“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”07/03/1993“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”01/02/1994“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”14/04/1994“स्नेह का रिटर्न है - स्वयं को टर्न (परिवर्तन) करना”28/11/1997“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”31/12/1998“इस नये वर्ष में हिम्मत के आधार पर स्वयं को मेहनत मुक्त सदा विजयी अनुभव करो”13/02/1999“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”23/10/1999“समय की पुकार - दाता बनो”15/12/1999“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”18/01/2000“ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा का वायब्रेशन विश्व में फैलाओ”18/01/2001“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”28/03/2002“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”15/11/2005“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''30/11/2005“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''28/03/2006“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”02/02/2007“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”17/03/2007“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”18/01/2008“सच्चे स्नेही बन, सब बोझ बाप को देकर मौज का अनुभव करो, मेहनत मुक्त बनो”18/02/2008“विश्व परिवर्तन के लिए शान्ति की शक्ति का प्रयोग करो”
