आँखों का महत्व एक बात - Importance of digits one thing

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02/02/1969“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”18/05/1969“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी”26/05/1969“सम्पूर्ण स्नेही की परख”18/06/1969“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”19/07/1969“ज़ीरो और हीरो बनो”16/10/1969“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”20/10/1969“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”25/10/1969“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”25/12/1969“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”05/03/1970“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”11/06/1970“विश्वपति बनने की सामग्री”30/07/1970“महारथी अर्थात् महानता”21/01/1971“अब नहीं तो कब नहीं”03/05/1972“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”02/02/1977“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”02/01/1979“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”10/01/1979“अब वेस्ट और वेट को समाप्त करो”12/01/1979“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”16/01/1979“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”23/01/1979“सदा सुहागिन ही सदा सम्पन्न है”25/01/1979“सम्मान देना ही सम्मान लेना है”14/11/1979“ब्राह्मण जीवन की निशानी है - सदा खुशी की झलक”21/11/1979“विश्व परिवर्तन के लिए सर्व की एक ही वृत्ति का होना आवश्यक”03/12/1979“विश्व-कल्याणकारी ही विश्व का मालिक बन सकता है”14/01/1980“रूहानी सेनानियों से रूहानी कमाण्डर की मुलाकात”16/01/1980“ऑलमाइटी अथॉरिटी राजयोगी सभा व लोक पसन्द सभा”25/01/1980“बिन्दु रूप परमात्मा का बिन्दु रूप आत्मा से मिलन”01/02/1980“सूक्ष्मवतन की कारोबार”07/03/1981“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”17/03/1981“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”23/03/1981“फर्स्ट या एयरकण्डीशन में जाने का सहज साधन”11/04/1981“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”13/04/1981“रूहे-गुलाब की विशेषता”02/10/1981“सदा मिलन के झूले में झूलने का आधार”08/10/1981“ब्रह्मा बाप की एक शुभ आशा”14/10/1981“सर्व खजानों की चाबी एक शब्द - ‘बाबा’”20/01/1982“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”22/03/1982“राज्य-सत्ता और धर्म-सत्ता के अधिकारी बच्चों से बापदादा की मुलाकात”16/04/1982“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”13/06/1982“एक का मन्‍त्र याद रहे तो सबमें एक दिखाई देगा (टीचर्स के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात)”18/02/1984“ब्राह्मण जीवन - अमूल्य जीवन”24/02/1984“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”01/03/1984“एक का हिसाब”15/03/1985“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”19/03/1986“अमृतवेला - श्रेष्ठ प्राप्तियों की वेला”20/02/1987“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”02/11/1987“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”23/11/1989“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”21/12/1989“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”07/03/1990“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”31/03/1990“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”31/12/1990“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”17/03/1991“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”02/03/1992“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”01/04/1992“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”23/12/1994“अपने तीन स्वरूप सदा स्मृति में रहें - 1- संगमयुगी ब्राह्मण, 2- ब्राह्मण सो फ़रिश्ता और 3- फ़रिश्ता सो देवता”25/03/1995“ब्राह्मण जीवन का सबसे श्रेष्ठ खजाना - संकल्प का खजाना”18/01/1996“सदा समर्थ रहने की सहज विधि - शुभचिंतन करो और शुभचिंतक बनो”03/04/1996“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”18/01/1997“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”06/03/1997“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”13/03/1998“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”11/11/2000“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”25/11/2000“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”16/12/2000“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”04/02/2001“समय प्रमाण स्वराज्य अधिकारी बन सर्व रूहानी साधन तीव्रगति से कार्य में लगाओ”25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''15/12/2001“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”31/12/2001“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''11/03/2002“विशेषतायें परमात्म देन हैं - इन्हें विश्व सेवा में अर्पण करो''30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''18/01/2003“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”28/02/2003“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''17/10/2003“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''30/11/2003“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''15/12/2003“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''02/02/2004“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''15/10/2004“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''30/11/2004“अभी अपने चलन और चेहरे द्वारा ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाओ, साक्षात्कार मूर्त बनो''15/12/2004“बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले''20/02/2005“दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो''07/03/2005“सम्पूर्ण पवित्रता का व्रत रखना और मैं पन को समर्पित करना ही शिवजयन्ती मनाना है''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”15/11/2005“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''30/11/2005“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''25/02/2006“आज उत्सव के दिन मन के उमंग-उत्साह द्वारा माया से मुक्त रहने का व्रत लो, मर्सीफुल बन मास्टर मुक्तिदाता बनो, साथ चलना है तो समान बनो''14/03/2006“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''16/11/2006“अपने स्वमान की शान में रहो और समय के महत्व को जान एवररेडी बनो”18/01/2007“अब स्वयं को मुक्त कर मास्टर मुक्तिदाता बन सबको मुक्ति दिलाने के निमित्त बनो”02/02/2007“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”17/03/2007“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”

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