नशा - Addiction

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09/11/1969“भविष्य को जानने की युक्तियां”13/11/1969“बापदादा की उम्मीदें - क्वान्टिटी के बजाए क्वालिटी वाले बनो और बनाओ”22/01/1970“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”23/01/1970“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”25/01/1970“यादगार कायम करने की विधि”05/02/1972“नशा और निशाना”28/02/1972“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”04/03/1972“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”02/04/1972“महिमा योग्य कैसे बनें?”15/05/1972“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”16/06/1972“हर्षित रहना ही ब्राह्मण जीवन का विशेष संस्कार”14/07/1972“अन्तिम सेवा के लिए रमतायोगी बनो”11/05/1977“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”21/05/1977“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”02/06/1977“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”05/06/1977“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”07/06/1977“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”20/06/1977“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”22/06/1977“सितारों की दुनिया का रहस्य”24/01/1978“निरन्तर सेवाधारी”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”07/03/1981“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”07/04/1981“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”11/04/1981“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”13/04/1981“रूहे-गुलाब की विशेषता”17/10/1981“सभी परिस्थितियों का समाधान उड़ता पंछी बनो”19/10/1981“हर ब्राह्मण चैतन्य तारा मण्डल का श्रृंगार”01/11/1981“सेवा के सफलता की कुन्जी”03/11/1981“योद्धा नहीं दिलतख्तनशीन बनो”08/11/1981“अन्तर सम्पन्न करने का साधन ‘तुरन्त दान महापुण्य’”11/11/1981“बिन्दु का महत्व”23/11/1981“त्याग का भी त्याग”26/11/1981“सहयोगी ही सहजयोगी”17/03/1982“संगमयुग का विशेष वरदान - ‘अमर भव’”31/12/1982“बापदादा की सर्व अलौकिक फ्रैण्ड्स को बधाई”09/01/1983“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”13/01/1983“स्वदर्शन चक्रधारी ही चक्रवर्ती राज्य भाग्य के अधिकारी”15/01/1983“सहजयोगी और प्रयोगी की व्याख्या”15/02/1983“विश्व शान्ति का आधार - रियलाइजेशन”21/04/1983“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”11/05/1983“हे युवकों विश्व परिवर्तन के कार्य में निमित्त बनो”19/05/1983“साक्षी दृष्टा कैसे बनें?”03/12/1983“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”05/12/1983“संगमयुग - बाप बच्चों के मिलन का युग”07/12/1983“श्रेष्ठ पद की प्राप्ति का आधार - ‘मुरली’”25/12/1983“संगमयुग के दिन बड़े ते बड़े मौज मनाने के दिन”29/12/1983“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”14/01/1984“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”16/01/1984“‘स्वराज्य’ - आपका बर्थ राईट है”20/02/1984“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”05/03/1984“शान्ति की शक्ति का महत्व”15/03/1984“होली उत्सव - पवित्र बनने, बनाने का यादगार”08/04/1984“संगमयुग पर प्राप्त अधिकारों से विश्व राज्य अधिकारी”10/04/1984“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”11/05/1984“ब्राह्मणों के हर कदम, संकल्प, कर्म से विधान का निर्माण”28/11/1984“संकल्प को सफल बनाने का सहज साधन”31/12/1984“नये ज्ञान और नई जीवन द्वारा नवीनता की झलक दिखाओ”08/01/1986“धरती के ‘होली’ सितारे”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”25/02/1986“सफलता का आधार - दृढ़ता”29/03/1986“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”11/04/1986“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की युक्ति”31/12/1986“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”22/11/1987“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”27/11/1987“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”27/12/1987“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”22/01/1988“हिम्मत का पहला कदम - समर्पणता”30/01/1988“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”28/02/1988“डबल विदेशी ब्राह्मण बच्चों की विशेषतायें”07/03/1988“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”19/03/1988“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”07/11/1989“तीनों सम्बन्धों की सहज और श्रेष्ठ पालना”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”09/12/1989“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”17/12/1989“सदा समर्थ कैसे बनें?”25/12/1989“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”29/12/1989“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”31/12/1989“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”02/01/1990“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”22/02/1990“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”01/03/1990“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”13/12/1990“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”31/12/1990“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”18/01/1991“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”03/04/1991“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”10/04/1991“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”11/12/1991“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”31/12/1991“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”18/01/1992“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”13/02/1992“अनेक जन्म का प्यार सम्पन्न जीवन बनाने का आधार - इस जन्म का परमात्म-प्यार”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”08/04/1992“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”07/03/1993“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”26/03/1993“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”01/02/1994“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”22/12/1995“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”13/11/1997“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”30/11/1999“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”15/12/1999“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”18/01/2000“ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा का वायब्रेशन विश्व में फैलाओ”04/02/2001“समय प्रमाण स्वराज्य अधिकारी बन सर्व रूहानी साधन तीव्रगति से कार्य में लगाओ”25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''08/10/2002“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''25/10/2002“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”31/12/2002“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”13/02/2003“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''30/11/2003“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''31/12/2003“इस वर्ष निमित्त और निर्माण बन जमा के खाते को बढ़ाओ और अखण्ड महादानी बनो''18/01/2004“वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ''02/02/2004“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''15/10/2004“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''30/11/2004“अभी अपने चलन और चेहरे द्वारा ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाओ, साक्षात्कार मूर्त बनो''20/02/2005“दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''18/01/2007“अब स्वयं को मुक्त कर मास्टर मुक्तिदाता बन सबको मुक्ति दिलाने के निमित्त बनो”31/12/2007“नये वर्ष में अखण्ड महादानी, अखण्ड निर्विघ्न, अखण्ड योगी और सदा सफलतामूर्त बनना”18/03/2008“कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन कर मास्टर मुक्तिदाता बनो, सबको बाप के संग का रंग लगाकर समान बनने की होली मनाओ”

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