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नशा - Addiction - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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नशा - Addiction
नशा - Addiction
133 unique murli dates in this topic
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133 murlis in हिंदी
09/11/1969
“भविष्य को जानने की युक्तियां”
13/11/1969
“बापदादा की उम्मीदें - क्वान्टिटी के बजाए क्वालिटी वाले बनो और बनाओ”
22/01/1970
“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
05/02/1972
“नशा और निशाना”
28/02/1972
“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”
04/03/1972
“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”
02/04/1972
“महिमा योग्य कैसे बनें?”
15/05/1972
“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”
16/06/1972
“हर्षित रहना ही ब्राह्मण जीवन का विशेष संस्कार”
14/07/1972
“अन्तिम सेवा के लिए रमतायोगी बनो”
11/05/1977
“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”
21/05/1977
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”
02/06/1977
“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”
05/06/1977
“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”
07/06/1977
“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”
20/06/1977
“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”
22/06/1977
“सितारों की दुनिया का रहस्य”
24/01/1978
“निरन्तर सेवाधारी”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
07/03/1981
“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”
07/04/1981
“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”
11/04/1981
“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”
13/04/1981
“रूहे-गुलाब की विशेषता”
17/10/1981
“सभी परिस्थितियों का समाधान उड़ता पंछी बनो”
19/10/1981
“हर ब्राह्मण चैतन्य तारा मण्डल का श्रृंगार”
01/11/1981
“सेवा के सफलता की कुन्जी”
03/11/1981
“योद्धा नहीं दिलतख्तनशीन बनो”
08/11/1981
“अन्तर सम्पन्न करने का साधन ‘तुरन्त दान महापुण्य’”
11/11/1981
“बिन्दु का महत्व”
23/11/1981
“त्याग का भी त्याग”
26/11/1981
“सहयोगी ही सहजयोगी”
17/03/1982
“संगमयुग का विशेष वरदान - ‘अमर भव’”
31/12/1982
“बापदादा की सर्व अलौकिक फ्रैण्ड्स को बधाई”
09/01/1983
“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”
13/01/1983
“स्वदर्शन चक्रधारी ही चक्रवर्ती राज्य भाग्य के अधिकारी”
15/01/1983
“सहजयोगी और प्रयोगी की व्याख्या”
15/02/1983
“विश्व शान्ति का आधार - रियलाइजेशन”
21/04/1983
“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”
11/05/1983
“हे युवकों विश्व परिवर्तन के कार्य में निमित्त बनो”
19/05/1983
“साक्षी दृष्टा कैसे बनें?”
03/12/1983
“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”
05/12/1983
“संगमयुग - बाप बच्चों के मिलन का युग”
07/12/1983
“श्रेष्ठ पद की प्राप्ति का आधार - ‘मुरली’”
25/12/1983
“संगमयुग के दिन बड़े ते बड़े मौज मनाने के दिन”
29/12/1983
“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”
14/01/1984
“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”
16/01/1984
“‘स्वराज्य’ - आपका बर्थ राईट है”
20/02/1984
“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”
05/03/1984
“शान्ति की शक्ति का महत्व”
15/03/1984
“होली उत्सव - पवित्र बनने, बनाने का यादगार”
08/04/1984
“संगमयुग पर प्राप्त अधिकारों से विश्व राज्य अधिकारी”
10/04/1984
“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”
11/05/1984
“ब्राह्मणों के हर कदम, संकल्प, कर्म से विधान का निर्माण”
28/11/1984
“संकल्प को सफल बनाने का सहज साधन”
31/12/1984
“नये ज्ञान और नई जीवन द्वारा नवीनता की झलक दिखाओ”
08/01/1986
“धरती के ‘होली’ सितारे”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
25/02/1986
“सफलता का आधार - दृढ़ता”
29/03/1986
“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”
11/04/1986
“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की युक्ति”
31/12/1986
“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”
22/11/1987
“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”
27/11/1987
“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”
27/12/1987
“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”
22/01/1988
“हिम्मत का पहला कदम - समर्पणता”
30/01/1988
“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”
28/02/1988
“डबल विदेशी ब्राह्मण बच्चों की विशेषतायें”
07/03/1988
“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”
19/03/1988
“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”
07/11/1989
“तीनों सम्बन्धों की सहज और श्रेष्ठ पालना”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
17/12/1989
“सदा समर्थ कैसे बनें?”
25/12/1989
“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”
29/12/1989
“पढ़ाई का सार - ‘आना और जाना’”
31/12/1989
“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”
02/01/1990
“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”
22/02/1990
“सेवा करना - उत्साह से उत्सव मनाना”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
13/12/1990
“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”
31/12/1990
“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”
18/01/1991
“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”
03/04/1991
“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”
10/04/1991
“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”
11/12/1991
“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
18/01/1992
“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”
13/02/1992
“अनेक जन्म का प्यार सम्पन्न जीवन बनाने का आधार - इस जन्म का परमात्म-प्यार”
16/03/1992
“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”
08/04/1992
“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
26/03/1993
“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
01/02/1994
“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”
22/12/1995
“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”
13/11/1997
“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”
30/03/1998
“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”
30/11/1999
“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”
15/12/1999
“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”
18/01/2000
“ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा का वायब्रेशन विश्व में फैलाओ”
04/02/2001
“समय प्रमाण स्वराज्य अधिकारी बन सर्व रूहानी साधन तीव्रगति से कार्य में लगाओ”
25/11/2001
“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
25/10/2002
“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
15/12/2002
“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”
31/12/2002
“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
30/11/2003
“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''
31/12/2003
“इस वर्ष निमित्त और निर्माण बन जमा के खाते को बढ़ाओ और अखण्ड महादानी बनो''
18/01/2004
“वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ''
02/02/2004
“पूर्वज और पूज्य के स्वमान में रह विश्व की हर आत्मा की पालना करो, दुआयें दो, दुआयें लो''
15/10/2004
“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''
30/11/2004
“अभी अपने चलन और चेहरे द्वारा ब्रह्मा बाप समान अव्यक्त रूप दिखाओ, साक्षात्कार मूर्त बनो''
20/02/2005
“दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो''
04/09/2005
“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”
31/12/2005
“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''
18/01/2007
“अब स्वयं को मुक्त कर मास्टर मुक्तिदाता बन सबको मुक्ति दिलाने के निमित्त बनो”
31/12/2007
“नये वर्ष में अखण्ड महादानी, अखण्ड निर्विघ्न, अखण्ड योगी और सदा सफलतामूर्त बनना”
18/03/2008
“कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन कर मास्टर मुक्तिदाता बनो, सबको बाप के संग का रंग लगाकर समान बनने की होली मनाओ”
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