संगमयुग - Confluence Age
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25/01/1970“यादगार कायम करने की विधि”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”11/07/1970“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”21/01/1971“अब नहीं तो कब नहीं”24/05/1971“पोज़ीशन में ठहरने से अपोज़ीशन समाप्त”16/06/1972“हर्षित रहना ही ब्राह्मण जीवन का विशेष संस्कार”11/07/1972“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”24/12/1972“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”08/05/1973“सर्वोच्च स्वमान”30/01/1975“सेकण्ड में व्यक्त से अव्यक्त होने की स्पीड”23/01/1976“संकल्प, वाणी और स्वरूप के हाईएस्ट और होलीएस्ट होने से बाप की प्रत्यक्षता”03/02/1976“धर्म और कर्म का कम्बाइन्ड रूप”18/01/1977“18 जनवरी का विशेष महत्व”21/05/1977“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”07/06/1977“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”12/06/1977“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”21/12/1978“हर कल्प की अति समीप आत्माओं का रुप, रेखा और वेला”04/01/1979“सम्पूर्णता के आईने में निज स्वरूप को देखो”10/01/1979“अब वेस्ट और वेट को समाप्त करो”12/01/1979“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”14/01/1979“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”16/01/1979“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”18/01/1979“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”14/11/1979“ब्राह्मण जीवन की निशानी है - सदा खुशी की झलक”26/11/1979“प्रीत की रीति”21/01/1980“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”30/01/1980“स्नेह, सहयोग और शक्ति स्वरूप के पेपर्स की चेकिंग और रिजल्ट”04/02/1980“भाग्य विधाता बाप और भाग्यशाली बच्चे”09/03/1981“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”21/03/1981“सच्ची होली कैसे मनायें?”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”05/04/1981“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”11/04/1981“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”02/10/1981“सदा मिलन के झूले में झूलने का आधार”09/10/1981“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”29/10/1981“बाप और बच्चों का रुहानी मिलन”03/11/1981“योद्धा नहीं दिलतख्तनशीन बनो”06/11/1981“विशेष युग का विशेष फल”23/11/1981“त्याग का भी त्याग”06/01/1982“सगंमयुगी ब्राह्मण जीवन में पवित्रता का महत्व”10/01/1982“स्वराज्य अधिकारी आत्माओं का आसन - कर्मातीत स्टेज”16/04/1982“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”26/04/1982“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”28/12/1982“सदा एक रस, सम्पूर्ण चमकता हुआ सितारा बनो”21/01/1983“संगम पर बाप और ब्राह्मण सदा साथ साथ”14/04/1983“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”17/04/1983“कर्मातीत स्थिति के लिए समेटने और समाने की शक्तियों की आवश्यकता”30/04/1983“परम पूज्य बनने का आधार”17/05/1983“संगम युग - मौजों के नज़ारों का युग”30/07/1983“जहाँ सच्चा स्नेह है वहाँ दु:ख की लहर नहीं”05/12/1983“संगमयुग - बाप बच्चों के मिलन का युग”14/12/1983“प्रभु परिवार - सर्वश्रेष्ठ परिवार”25/12/1983“संगमयुग के दिन बड़े ते बड़े मौज मनाने के दिन”27/12/1983“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”29/12/1983“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”31/12/1983“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”02/04/1984“बिन्दु का महत्व”04/04/1984“संगमयुग की श्रेष्ठ वेला, श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की वेला”26/04/1984“रुहानी विचित्र मेले में सर्व खज़ानों की प्राप्ति”17/12/1984“व्यर्थ को समाप्त करने का साधन - समर्थ संकल्पों का खजाना ज्ञान मुरली”28/01/1985“विश्व सेवा का सहज साधन मन्सा सेवा”16/02/1985“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”18/02/1985“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”24/02/1985“संगमयुग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग”06/01/1986“संगमयुग - जमा करने का युग”07/03/1986“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”09/04/1986“सच्चे सेवाधारी की निशानी”20/03/1987“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”05/10/1987“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”09/10/1987“अलौकिक राज्य दरबार का समाचार”17/10/1987“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”02/11/1987“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”14/12/1987“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”23/12/1987“मनन शक्ति और मगन स्थिति”27/12/1987“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”31/12/1987“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”24/02/1988“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”21/12/1989“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”25/12/1989“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”17/03/1991“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”18/12/1991“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”31/12/1991“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”07/03/1993“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”23/12/1993“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”18/01/1994“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”17/11/1994“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”13/12/1995“व्यर्थ बोल, डिस्टर्ब करने वाले बोल से स्वयं को मुक्त कर बोल की एकॉनॉमी करो”18/01/1998“सकाश देने की सेवा करने के लिए लगावमुक्त बन बेहद के वैरागी बनो”24/02/1998“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”01/03/1999“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”30/11/1999“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”31/12/2000“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”04/11/2001“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''08/10/2002“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''31/12/2002“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”17/03/2003“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''20/02/2005“दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''25/02/2006“आज उत्सव के दिन मन के उमंग-उत्साह द्वारा माया से मुक्त रहने का व्रत लो, मर्सीफुल बन मास्टर मुक्तिदाता बनो, साथ चलना है तो समान बनो''02/02/2007“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”05/03/2008“संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो, शिवमंत्र से मैं-पन का परिवर्तन करो”
