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संगमयुग - Confluence Age - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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संगमयुग - Confluence Age
संगमयुग - Confluence Age
114 unique murli dates in this topic
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हिंदी
ગુજરાતી
తెలుగు
111 murlis in हिंदी
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
11/07/1970
“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
24/05/1971
“पोज़ीशन में ठहरने से अपोज़ीशन समाप्त”
16/06/1972
“हर्षित रहना ही ब्राह्मण जीवन का विशेष संस्कार”
11/07/1972
“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”
24/12/1972
“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”
08/05/1973
“सर्वोच्च स्वमान”
30/01/1975
“सेकण्ड में व्यक्त से अव्यक्त होने की स्पीड”
23/01/1976
“संकल्प, वाणी और स्वरूप के हाईएस्ट और होलीएस्ट होने से बाप की प्रत्यक्षता”
03/02/1976
“धर्म और कर्म का कम्बाइन्ड रूप”
18/01/1977
“18 जनवरी का विशेष महत्व”
21/05/1977
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
07/06/1977
“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”
12/06/1977
“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
21/12/1978
“हर कल्प की अति समीप आत्माओं का रुप, रेखा और वेला”
04/01/1979
“सम्पूर्णता के आईने में निज स्वरूप को देखो”
10/01/1979
“अब वेस्ट और वेट को समाप्त करो”
12/01/1979
“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”
14/01/1979
“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”
16/01/1979
“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”
18/01/1979
“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”
14/11/1979
“ब्राह्मण जीवन की निशानी है - सदा खुशी की झलक”
26/11/1979
“प्रीत की रीति”
21/01/1980
“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”
30/01/1980
“स्नेह, सहयोग और शक्ति स्वरूप के पेपर्स की चेकिंग और रिजल्ट”
04/02/1980
“भाग्य विधाता बाप और भाग्यशाली बच्चे”
09/03/1981
“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”
21/03/1981
“सच्ची होली कैसे मनायें?”
27/03/1981
“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
11/04/1981
“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”
02/10/1981
“सदा मिलन के झूले में झूलने का आधार”
09/10/1981
“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”
29/10/1981
“बाप और बच्चों का रुहानी मिलन”
03/11/1981
“योद्धा नहीं दिलतख्तनशीन बनो”
06/11/1981
“विशेष युग का विशेष फल”
23/11/1981
“त्याग का भी त्याग”
06/01/1982
“सगंमयुगी ब्राह्मण जीवन में पवित्रता का महत्व”
10/01/1982
“स्वराज्य अधिकारी आत्माओं का आसन - कर्मातीत स्टेज”
16/04/1982
“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”
26/04/1982
“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”
28/12/1982
“सदा एक रस, सम्पूर्ण चमकता हुआ सितारा बनो”
21/01/1983
“संगम पर बाप और ब्राह्मण सदा साथ साथ”
14/04/1983
“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”
17/04/1983
“कर्मातीत स्थिति के लिए समेटने और समाने की शक्तियों की आवश्यकता”
30/04/1983
“परम पूज्य बनने का आधार”
17/05/1983
“संगम युग - मौजों के नज़ारों का युग”
30/07/1983
“जहाँ सच्चा स्नेह है वहाँ दु:ख की लहर नहीं”
05/12/1983
“संगमयुग - बाप बच्चों के मिलन का युग”
14/12/1983
“प्रभु परिवार - सर्वश्रेष्ठ परिवार”
25/12/1983
“संगमयुग के दिन बड़े ते बड़े मौज मनाने के दिन”
27/12/1983
“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”
29/12/1983
“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”
31/12/1983
“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”
02/04/1984
“बिन्दु का महत्व”
04/04/1984
“संगमयुग की श्रेष्ठ वेला, श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की वेला”
26/04/1984
“रुहानी विचित्र मेले में सर्व खज़ानों की प्राप्ति”
17/12/1984
“व्यर्थ को समाप्त करने का साधन - समर्थ संकल्पों का खजाना ज्ञान मुरली”
28/01/1985
“विश्व सेवा का सहज साधन मन्सा सेवा”
16/02/1985
“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”
18/02/1985
“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”
24/02/1985
“संगमयुग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग”
06/01/1986
“संगमयुग - जमा करने का युग”
07/03/1986
“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”
09/04/1986
“सच्चे सेवाधारी की निशानी”
20/03/1987
“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”
05/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”
09/10/1987
“अलौकिक राज्य दरबार का समाचार”
17/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”
02/11/1987
“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”
14/12/1987
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”
23/12/1987
“मनन शक्ति और मगन स्थिति”
27/12/1987
“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”
31/12/1987
“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
24/02/1988
“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
25/12/1989
“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”
17/03/1991
“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
23/12/1993
“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
18/01/1994
“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”
17/11/1994
“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”
13/12/1995
“व्यर्थ बोल, डिस्टर्ब करने वाले बोल से स्वयं को मुक्त कर बोल की एकॉनॉमी करो”
18/01/1998
“सकाश देने की सेवा करने के लिए लगावमुक्त बन बेहद के वैरागी बनो”
24/02/1998
“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”
01/03/1999
“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”
15/11/1999
“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”
30/11/1999
“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”
31/12/2000
“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”
04/11/2001
“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
31/12/2002
“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”
17/03/2003
“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''
20/02/2005
“दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो''
04/09/2005
“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”
31/12/2005
“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''
03/02/2006
“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''
25/02/2006
“आज उत्सव के दिन मन के उमंग-उत्साह द्वारा माया से मुक्त रहने का व्रत लो, मर्सीफुल बन मास्टर मुक्तिदाता बनो, साथ चलना है तो समान बनो''
02/02/2007
“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”
05/03/2008
“संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो, शिवमंत्र से मैं-पन का परिवर्तन करो”
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