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Waste Thoughts-व्यर्थ संकल्प - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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Waste Thoughts-व्यर्थ संकल्प
Waste Thoughts-व्यर्थ संकल्प
121 unique murli dates in this topic
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121 murlis in हिंदी
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
22/01/1970
“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
05/03/1970
“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
28/05/1970
“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
25/06/1970
“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”
05/11/1970
“डिले इज़ डेन्जर”
30/11/1970
“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”
25/06/1971
“सेवा और तपस्या की समानता”
01/12/1971
“सर्व-शक्तियों के सम्पत्तिवान बनो”
27/04/1972
“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”
03/05/1972
“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”
08/06/1972
“सम्पूर्ण स्टेज की परख”
14/06/1972
“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”
04/07/1974
“स्व-स्थिति की श्रेष्ठता से व्यर्थ संकल्पों की हलचल समाप्त”
09/01/1975
“सम्पूर्ण बनने में सबसे बड़ा विघ्न अलबेलापन”
10/09/1975
“नॉलेजफुल और पावरफुल आत्मा ही सक्सेसफुल”
01/10/1975
“एकान्त, एकाग्रता और दृढ़-संकल्प से सिद्धि की प्राप्ति”
12/10/1975
“कम्पलेन्ट समाप्त कर कम्पलीट बनने की प्रेरणा”
23/10/1975
“इन्तज़ार को छोड़कर इन्तज़ाम करो!”
09/12/1975
“महावीर अर्थात् विशेष आत्माओं की विशेषताएं”
12/01/1977
“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”
23/01/1977
“महीनता ही महानता है”
26/04/1977
“स्वतन्त्रता ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार है”
30/04/1977
“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
14/05/1977
“स्वमान और फ़रमान”
27/05/1977
“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”
29/05/1977
“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
05/06/1977
“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”
07/06/1977
“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”
18/06/1977
“योग की पॉवरफुल स्टेज कैसे बने?”
16/02/1978
“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”
14/12/1978
“विघ्नों से मुक्त होने की सहज युक्ति”
01/01/1979
“नए वर्ष के लिए बाप द्वारा कराया गया दृढ़ संकल्प”
23/11/1979
“नम्रता रूपी कवच द्वारा स्नेह और सहयोग की प्राप्ति”
30/11/1979
“स्वमान में स्थित आत्मा के लक्षण”
05/12/1979
“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”
17/12/1979
“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”
19/12/1979
“सहज याद का साधन - स्वयं को खुदाई खिदमतगार समझो”
24/12/1979
“जहान को रोशन करने वालों की महफिल”
23/01/1980
“पवित्रता का महत्व”
25/03/1981
“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”
27/03/1981
“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”
09/10/1981
“अन्तर्मुखी ही सदा बन्धनमुक्त और योगयुक्त”
18/11/1981
“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”
08/01/1982
“लण्डन ग्रुप के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”
07/03/1982
“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”
09/01/1983
“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”
27/03/1983
“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”
04/05/1983
“सदा एक मत, एक ही रास्ते से एकरस स्थिति”
30/07/1983
“जहाँ सच्चा स्नेह है वहाँ दु:ख की लहर नहीं”
12/01/1984
“सदा समर्थ सोचो तथा वर्णन करो”
24/02/1984
“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”
17/12/1984
“व्यर्थ को समाप्त करने का साधन - समर्थ संकल्पों का खजाना ज्ञान मुरली”
02/03/1985
“वर्तमान ईश्वरीय जन्म - अमूल्य जन्म”
15/03/1985
“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”
24/03/1985
“अब नहीं तो कब नहीं”
01/03/1986
“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”
25/03/1986
“होली का रहस्य”
27/03/1986
“सदा के स्नेही बनो”
29/03/1986
“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”
09/04/1986
“सच्चे सेवाधारी की निशानी”
18/01/1987
“कर्मातीत स्थिति की निशानियां”
23/12/1987
“मनन शक्ति और मगन स्थिति”
31/12/1987
“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
19/11/1989
“तन, मन, धन और जन का भाग्य”
17/12/1989
“सदा समर्थ कैसे बनें?”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
26/10/1991
“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
09/01/1993
“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
26/03/1993
“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
23/12/1993
“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”
18/01/1994
“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”
25/01/1994
“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”
09/03/1994
“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”
14/04/1994
“स्नेह का रिटर्न है - स्वयं को टर्न (परिवर्तन) करना”
17/11/1994
“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”
26/11/1994
“परमात्म पालना और परिवर्तन शक्ति का प्रत्यक्ष स्वरूप - सहजयोगी जीवन”
05/12/1994
“वर्तमान समय की आवश्यकता - बेहद के वैराग्य वृत्ति का वायुमण्डल बनाना”
09/01/1995
“निश्चयबुद्धि की निशानियाँ - निश्चित विजयी और सदा निश्चिन्त स्थिति का अनुभव”
16/03/1995
“सर्व प्राप्ति सम्पन्न आत्मा की निशानी - सन्तुष्टता और प्रसन्नता”
25/03/1995
“ब्राह्मण जीवन का सबसे श्रेष्ठ खजाना - संकल्प का खजाना”
07/11/1995
“बापदादा की विशेष पसन्दगी और ज्ञान का फाउण्डेशन - पवित्रता”
16/11/1995
“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”
04/12/1995
“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”
09/01/1996
“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”
27/02/1996
“सत्यता का फाउण्डेशन है पवित्रता और निशानी है - चलन वा चेहरे में दिव्यता”
22/03/1996
“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”
06/03/1997
“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”
14/12/1997
“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”
24/02/1998
“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”
12/12/1998
“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”
15/03/1999
“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”
15/02/2000
“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”
16/12/2000
“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”
24/02/2002
“बाप को प्रत्यक्ष करने के लिए अपनी वा दूसरों की वृत्ति को पॉजिटिव बनाओ''
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
18/01/2004
“वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ''
15/10/2004
“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''
21/10/2005
“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”
15/12/2005
“नये वर्ष में स्नेह और सहयोग की रूपरेखा स्टेज पर लाओ, हर एक को गुण और शक्तियों की गिफ्ट दो”
31/12/2005
“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''
18/01/2006
“संकल्प, समय और बोल के बचत की स्कीम द्वारा सफलता की सेरीमनी मनाओ, निराश आत्माओं में आशा के दीप जगाओ''
03/02/2006
“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''
25/02/2006
“आज उत्सव के दिन मन के उमंग-उत्साह द्वारा माया से मुक्त रहने का व्रत लो, मर्सीफुल बन मास्टर मुक्तिदाता बनो, साथ चलना है तो समान बनो''
31/12/2006
“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“
03/03/2007
“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”
31/12/2007
“नये वर्ष में अखण्ड महादानी, अखण्ड निर्विघ्न, अखण्ड योगी और सदा सफलतामूर्त बनना”
20/10/2008
“सन्तुष्टमणि बन विश्व में सन्तुष्टता की लाइट फैलाओ, सन्तुष्ट रहो और सबको सन्तुष्ट करो”