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स्मृति - Memory - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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स्मृति - Memory
स्मृति - Memory
125 unique murli dates in this topic
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125 murlis in हिंदी
17/04/1969
“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”
20/10/1969
“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”
22/01/1970
“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
05/03/1970
“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”
14/05/1970
“समर्पण का गुह्य अर्थ”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
18/06/1970
“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
01/02/1971
“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”
11/02/1971
“अंत:वाहक शरीर द्वारा सेवा”
05/03/1971
“भट्ठी की अलौकिक छाप”
18/04/1971
“मन के भावों को जानने की विधि तथा फायदे”
30/05/1971
“बाप की आज्ञा और प्रतिज्ञा”
08/06/1971
“जीवन के लिए तीन चीजों की आवश्यकता - खुराक, खुशी और खज़ाना”
04/07/1971
“याद की सहज विधि”
27/07/1971
“बुद्धि रूपी नेत्र क्लीयर और पावरफुल बनाओ”
20/08/1971
“सबसे श्रेष्ठ तख्त और ताज”
25/08/1971
“मुख्य 7 कमजोरियां और उसको मिटाने के लिए 7 दिन का कोर्स”
26/10/1971
“कर्म का आधार वृत्ति”
03/02/1972
“स्वयं को जानने से संयम और समय की पहचान”
05/02/1972
“नशा और निशाना”
27/02/1972
“होलीहंस बनने का यादगार - होली”
28/02/1972
“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”
04/03/1972
“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”
12/03/1972
“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”
15/03/1972
“त्याग और भाग्य”
02/04/1972
“महिमा योग्य कैसे बनें?”
10/05/1972
“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”
31/05/1972
“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”
16/06/1972
“हर्षित रहना ही ब्राह्मण जीवन का विशेष संस्कार”
21/06/1972
“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”
12/07/1972
“मरजीवापन की स्मृति से गृहस्थी वा प्रवृत्ति की विस्मृति”
18/07/1972
“कमजोरियों की समाप्ति समारोह करने वाले ही तीव्र पुरुषार्थी हैं”
24/12/1972
“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”
06/02/1974
“परखने की शक्ति से महारथी की परख”
15/09/1974
“पुरुषार्थ का अन्तिम लक्ष्य है अव्यक्त फरिश्ता-पन”
09/02/1975
“आध्यात्मिक शक्तियों द्वारा विश्व-परिवर्तन कैसे?”
13/09/1975
“विश्व-परिवर्तन ही ब्राह्मण जीवन का विशेष कर्तव्य है”
22/09/1975
“स्वमान में स्थित होना ही सर्व खजानें और खुशी की चाबी है”
08/10/1975
“मास्टर ज्ञान-स्वरूप बनने की प्रेरणा”
02/02/1977
“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
30/04/1977
“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
21/05/1977
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”
27/05/1977
“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”
28/05/1977
“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
02/06/1977
“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”
05/06/1977
“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”
10/06/1977
“मन्त्र और यन्त्र के निरन्तर प्रयोग से अन्तर समाप्त”
20/06/1977
“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”
28/06/1977
“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
03/12/1978
“पाप और पुण्य की गुह्य गति”
02/01/1979
“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”
12/01/1979
“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”
30/01/1979
“सर्व बन्धनों से मुक्ति की युक्ति”
04/01/1980
“वर्तमान राज्य-अधिकारी ही भविष्य राज्य-अधिकारी”
07/04/1981
“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”
24/10/1981
“सच्चे आशिक की निशानी”
01/11/1981
“सेवा के सफलता की कुन्जी”
18/11/1981
“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”
04/01/1982
“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”
07/03/1982
“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”
21/04/1983
“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”
09/05/1983
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”
31/12/1983
“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”
16/01/1984
“‘स्वराज्य’ - आपका बर्थ राईट है”
05/03/1984
“शान्ति की शक्ति का महत्व”
14/01/1985
“शुभ चिन्तक बनने का आधार स्वचिन्तन और शुभ चिन्तन”
16/01/1985
“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”
18/01/1985
“प्रतिज्ञा द्वारा प्रत्यक्षता (स्मृति दिवस पर विशेष)”
01/03/1986
“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”
20/02/1987
“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”
06/12/1987
“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”
03/03/1988
“होली कैसे मनायें तथा सदाकाल का परिवर्तन कैसे हो?”
07/03/1988
“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”
11/11/1989
“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
02/01/1990
“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”
14/01/1990
“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
13/03/1990
“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”
18/01/1991
“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
18/01/1994
“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”
01/02/1994
“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”
18/02/1994
“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”
26/11/1994
“परमात्म पालना और परिवर्तन शक्ति का प्रत्यक्ष स्वरूप - सहजयोगी जीवन”
25/11/1995
“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”
10/03/1996
“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”
18/01/1997
“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
01/03/1999
“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”
15/12/1999
“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”
15/02/2000
“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”
18/01/2001
“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
15/12/2002
“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”
18/01/2003
“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
17/10/2003
“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''
30/11/2003
“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''
25/03/2005
“मास्टर ज्ञान सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ, विधाता बनो, तपस्वी बनो''
04/09/2005
“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”
03/02/2006
“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''
15/12/2006
“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''
31/12/2006
“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“
18/01/2007
“अब स्वयं को मुक्त कर मास्टर मुक्तिदाता बन सबको मुक्ति दिलाने के निमित्त बनो”
02/02/2007
“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”
17/03/2007
“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”