स्मृति - Memory
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17/04/1969“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”20/10/1969“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”22/01/1970“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”23/01/1970“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”25/01/1970“यादगार कायम करने की विधि”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”05/03/1970“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”14/05/1970“समर्पण का गुह्य अर्थ”07/06/1970“दिव्य मूर्त बनने की विधि”18/06/1970“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”21/01/1971“अब नहीं तो कब नहीं”01/02/1971“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”11/02/1971“अंत:वाहक शरीर द्वारा सेवा”05/03/1971“भट्ठी की अलौकिक छाप”18/04/1971“मन के भावों को जानने की विधि तथा फायदे”30/05/1971“बाप की आज्ञा और प्रतिज्ञा”08/06/1971“जीवन के लिए तीन चीजों की आवश्यकता - खुराक, खुशी और खज़ाना”04/07/1971“याद की सहज विधि”27/07/1971“बुद्धि रूपी नेत्र क्लीयर और पावरफुल बनाओ”20/08/1971“सबसे श्रेष्ठ तख्त और ताज”25/08/1971“मुख्य 7 कमजोरियां और उसको मिटाने के लिए 7 दिन का कोर्स”26/10/1971“कर्म का आधार वृत्ति”03/02/1972“स्वयं को जानने से संयम और समय की पहचान”05/02/1972“नशा और निशाना”27/02/1972“होलीहंस बनने का यादगार - होली”28/02/1972“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”04/03/1972“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”12/03/1972“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”15/03/1972“त्याग और भाग्य”02/04/1972“महिमा योग्य कैसे बनें?”10/05/1972“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”31/05/1972“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”16/06/1972“हर्षित रहना ही ब्राह्मण जीवन का विशेष संस्कार”21/06/1972“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”12/07/1972“मरजीवापन की स्मृति से गृहस्थी वा प्रवृत्ति की विस्मृति”18/07/1972“कमजोरियों की समाप्ति समारोह करने वाले ही तीव्र पुरुषार्थी हैं”24/12/1972“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”06/02/1974“परखने की शक्ति से महारथी की परख”15/09/1974“पुरुषार्थ का अन्तिम लक्ष्य है अव्यक्त फरिश्ता-पन”09/02/1975“आध्यात्मिक शक्तियों द्वारा विश्व-परिवर्तन कैसे?”13/09/1975“विश्व-परिवर्तन ही ब्राह्मण जीवन का विशेष कर्तव्य है”22/09/1975“स्वमान में स्थित होना ही सर्व खजानें और खुशी की चाबी है”08/10/1975“मास्टर ज्ञान-स्वरूप बनने की प्रेरणा”02/02/1977“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”28/04/1977“सदा सुहागिन की निशानियाँ”30/04/1977“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”05/05/1977“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”21/05/1977“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”27/05/1977“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”28/05/1977“बापदादा के सदा दिल तख्तनशीन, समान बच्चों के लक्षण”31/05/1977“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”02/06/1977“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”05/06/1977“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”10/06/1977“मन्त्र और यन्त्र के निरन्तर प्रयोग से अन्तर समाप्त”20/06/1977“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”28/06/1977“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”03/12/1978“पाप और पुण्य की गुह्य गति”02/01/1979“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”12/01/1979“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”30/01/1979“सर्व बन्धनों से मुक्ति की युक्ति”04/01/1980“वर्तमान राज्य-अधिकारी ही भविष्य राज्य-अधिकारी”07/04/1981“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”24/10/1981“सच्चे आशिक की निशानी”01/11/1981“सेवा के सफलता की कुन्जी”18/11/1981“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”04/01/1982“सतगुरु का प्रथम वरदान - मनमनाभव”07/03/1982“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”21/04/1983“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”31/12/1983“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”16/01/1984“‘स्वराज्य’ - आपका बर्थ राईट है”05/03/1984“शान्ति की शक्ति का महत्व”14/01/1985“शुभ चिन्तक बनने का आधार स्वचिन्तन और शुभ चिन्तन”16/01/1985“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”18/01/1985“प्रतिज्ञा द्वारा प्रत्यक्षता (स्मृति दिवस पर विशेष)”01/03/1986“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”20/02/1987“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”06/12/1987“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”03/03/1988“होली कैसे मनायें तथा सदाकाल का परिवर्तन कैसे हो?”07/03/1988“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”11/11/1989“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”02/01/1990“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”14/01/1990“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”01/03/1990“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”13/03/1990“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”31/03/1990“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”18/01/1991“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”31/12/1991“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”21/11/1992“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”18/01/1994“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”01/02/1994“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”18/02/1994“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”26/11/1994“परमात्म पालना और परिवर्तन शक्ति का प्रत्यक्ष स्वरूप - सहजयोगी जीवन”25/11/1995“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”10/03/1996“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”18/01/1997“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”01/03/1999“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”15/12/1999“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”15/02/2000“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”18/01/2001“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”18/01/2003“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”13/02/2003“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''17/10/2003“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''30/11/2003“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''25/03/2005“मास्टर ज्ञान सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ, विधाता बनो, तपस्वी बनो''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''15/12/2006“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''31/12/2006“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“18/01/2007“अब स्वयं को मुक्त कर मास्टर मुक्तिदाता बन सबको मुक्ति दिलाने के निमित्त बनो”02/02/2007“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”17/03/2007“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”
