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स्वयं पुरुषार्थ - Self Efforts - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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स्वयं पुरुषार्थ - Self Efforts
स्वयं पुरुषार्थ - Self Efforts
152 unique murli dates in this topic
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150 murlis in हिंदी
22/01/1969
“बापदादा के हाथ में बुद्धि रूपी हाथ हो तो परीक्षाओं रूपी सागर में हिलेंगे नहीं”
23/01/1969
“अस्थियां हैं स्थिति की स्मृति दिलाने वाली”
02/02/1969
“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”
06/02/1969
“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”
15/02/1969
“सौभाग्यशाली वह है जिसका बाप, टीचर और सतगुरू से पूरा कनेक्शन है”
04/03/1969
“जो बीता उसे हो ली करना ही होली मनाना है”
13/03/1969
“प्रेम और शक्ति के गुणों की समानता”
20/03/1969
“सात बातें छोड़ो और सात बातें धारण करो”
17/04/1969
“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”
08/05/1969
“मंसा, वाचा, कर्मणा को ठीक करने की युक्ति”
17/05/1969
“जादू मंत्र का दर्पण”
26/05/1969
“सम्पूर्ण स्नेही की परख”
18/06/1969
“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”
06/07/1969
“सच्ची जेवर बनने के लिए अपनी सब खामियों को निकाल स्वच्छ बनो”
16/07/1969
“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”
17/07/1969
“अव्यक्ति स्थिति बनाने की युक्तियां”
23/07/1969
“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”
27/08/1969
“मदद लेने का साधन है - हिम्मत”
15/09/1969
“याद के आधार पर यादगार”
18/09/1969
“त्रिनेत्री, त्रिकालदर्शी और त्रिलोकीनाथ बनने की युक्तियां”
28/09/1969
“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”
03/10/1969
“सम्पूर्ण समर्पण की निशानियां”
16/10/1969
“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”
20/10/1969
“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
09/11/1969
“भविष्य को जानने की युक्तियां”
17/11/1969
“फर्श से अर्श पर जाने की युक्तियाँ”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
06/12/1969
“सरल स्वभाव से बुद्धि को विशाल और दूरांदेशी बनाओ”
20/12/1969
“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”
22/01/1970
“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
05/03/1970
“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”
23/03/1970
“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
02/04/1970
“सम्पूर्ण स्टेज की निशानियां”
05/04/1970
“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”
21/05/1970
“भिन्नता को मिटाने की युक्ति”
28/05/1970
“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
18/06/1970
“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”
26/06/1970
“कामधेनु का अर्थ”
29/06/1970
“समर्पण का विशाल रूप”
11/07/1970
“संगमयुग की डिग्री और भविष्य की प्रालब्ध”
24/07/1970
“बिन्दु रूप की स्थिति सहज कैसे बने?”
27/07/1970
“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
23/10/1970
“महारथी बनने का पुरुषार्थ”
29/10/1970
“दीपमाला का सच्चा रहस्य”
05/11/1970
“डिले इज़ डेन्जर”
30/11/1970
“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”
03/12/1970
“सामना करने के लिए कामनाओं का त्याग”
05/12/1970
“प्रतिज्ञा करने वालों को माया की चैलेंज”
09/12/1970
“पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर”
31/12/1970
“अमृतवेले से परिवर्तन शक्ति का प्रयोग”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
09/04/1971
“अव्यक्त स्थिति में सर्व गुणों का अनुभव”
25/08/1971
“मुख्य 7 कमजोरियां और उसको मिटाने के लिए 7 दिन का कोर्स”
21/01/1972
“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”
28/02/1972
“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”
04/03/1972
“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”
12/03/1972
“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”
27/04/1972
“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”
03/05/1972
“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”
10/05/1972
“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”
15/05/1972
“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”
24/05/1972
“परिवर्तन का आधार - दृढ़ संकल्प”
08/06/1972
“सम्पूर्ण स्टेज की परख”
10/06/1972
“सूक्ष्म अभिमान और अनजानपन”
14/06/1972
“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”
11/07/1972
“निर्णय शक्ति को बढ़ाने की कसौटी - ‘साकार बाप के चरित्र'”
18/07/1972
“कमजोरियों की समाप्ति समारोह करने वाले ही तीव्र पुरुषार्थी हैं”
02/08/1972
“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”
19/09/1972
“मजबूरियों को समाप्त करने का साधन - मजबूती”
09/11/1972
“ज्ञान सितारों का सम्बन्ध ज्ञान सूर्य और ज्ञान चन्द्रमा के साथ”
24/12/1972
“संगमयुगी श्रेष्ठ आत्माओं की जिम्मेवारी”
16/05/1973
“अन्तिम पुरुषार्थ”
02/02/1975
“स्व-चिन्तक, शुभ-चिन्तक और विश्व-परिवर्तक”
12/01/1977
“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”
16/01/1977
“सन्तुष्ट आत्मा ही अनेक आत्माओं का इष्ट बन सकती है”
18/01/1977
“18 जनवरी का विशेष महत्व”
06/02/1977
“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”
14/04/1977
“श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
16/05/1977
“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”
29/05/1977
“पुरुषार्थ की रफ्तार में रुकावट का कारण और उसका निवारण”
05/06/1977
“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”
12/06/1977
“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”
16/06/1977
“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”
18/06/1977
“योग की पॉवरफुल स्टेज कैसे बने?”
25/06/1977
“पवित्रता की सम्पूर्ण स्टेज”
28/06/1977
“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
18/01/1978
“बापदादा की सेवा का रिटर्न”
23/01/1980
“पवित्रता का महत्व”
04/02/1980
“भाग्य विधाता बाप और भाग्यशाली बच्चे”
17/10/1981
“सभी परिस्थितियों का समाधान उड़ता पंछी बनो”
13/11/1981
“परखने और निर्णय शक्ति का आधार - साइलेन्स की शक्ति”
18/11/1981
“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”
06/01/1982
“सगंमयुगी ब्राह्मण जीवन में पवित्रता का महत्व”
14/03/1982
“बापदादा द्वारा देश-विदेश का समाचार”
22/03/1982
“राज्य-सत्ता और धर्म-सत्ता के अधिकारी बच्चों से बापदादा की मुलाकात”
03/04/1983
“प्रथम और अन्तिम पुरूषार्थ”
27/04/1983
“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”
12/12/1983
“एकाग्रता से सर्व शक्तियों की प्राप्ति”
19/12/1983
“परमात्म प्यार - नि:स्वार्थ प्यार”
21/12/1983
“तुरत दान महापुण्य का रहस्य”
07/05/1984
“बैलेन्स रखने से ही ब्लैसिंग की प्राप्ति”
21/11/1984
“स्व-दर्शन धारी ही दिव्य दर्शनीय मूर्त”
16/02/1985
“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”
15/03/1985
“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”
24/03/1985
“अब नहीं तो कब नहीं”
06/01/1986
“संगमयुग - जमा करने का युग”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
20/02/1986
“उड़ती कला से सर्व का भला”
23/01/1987
“सफलता के सितारे की विशेषतायें”
24/02/1988
“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”
31/03/1988
‘वाचा’ और ‘कर्मणा’ - दोनों शक्तियों को जमा करने की ईश्वरीय स्कीम
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
27/11/1989
“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
04/12/1991
“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
08/04/1992
“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
09/01/1993
“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
14/04/1994
“स्नेह का रिटर्न है - स्वयं को टर्न (परिवर्तन) करना”
07/11/1995
“बापदादा की विशेष पसन्दगी और ज्ञान का फाउण्डेशन - पवित्रता”
16/11/1995
“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”
25/11/1995
“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”
13/12/1995
“व्यर्थ बोल, डिस्टर्ब करने वाले बोल से स्वयं को मुक्त कर बोल की एकॉनॉमी करो”
18/01/1997
“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
23/02/1997
“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”
03/04/1997
“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”
13/11/1997
“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”
28/11/1997
“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”
13/03/1998
“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”
01/03/1999
“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”
15/03/1999
“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”
15/11/1999
“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”
15/02/2000
“मन को स्वच्छ, बुद्धि को क्लीयर रख डबल लाइट फरिश्ते स्थिति का अनुभव करो”
16/12/2000
“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”