Complaints-शिकायतें
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18/01/1969“पिताश्री जी के अव्यक्त होने के बाद - अव्यक्त वतन से प्राप्त दिव्य सन्देश”17/04/1969“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”28/09/1969“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”28/11/1969“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”02/07/1970“साइलेन्स बल का प्रयोग”23/10/1970“महारथी बनने का पुरुषार्थ”05/11/1970“डिले इज़ डेन्जर”22/01/1971“दिलतख्त नशीन आत्मा की निशानी”04/03/1972“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”02/04/1972“महिमा योग्य कैसे बनें?”31/05/1972“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”23/06/1973“अलौकिक खजाने के मालिक”12/10/1975“कम्पलेन्ट समाप्त कर कम्पलीट बनने की प्रेरणा”18/01/1977“18 जनवरी का विशेष महत्व”02/02/1977“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”05/06/1977“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”07/06/1977“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”20/06/1977“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”29/03/1981“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”05/04/1981“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”24/10/1981“सच्चे आशिक की निशानी”08/11/1981“अन्तर सम्पन्न करने का साधन ‘तुरन्त दान महापुण्य’”31/12/1981“निर्बल को बल देने वाले महाबलवान बनो”17/03/1982“संगमयुग का विशेष वरदान - ‘अमर भव’”06/04/1982“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”26/04/1982“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”07/04/1983“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”11/04/1983“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”13/04/1983“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”14/04/1983“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”19/12/1983“परमात्म प्यार - नि:स्वार्थ प्यार”29/12/1983“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”13/02/1984“अशान्ति का कारण अप्राप्ति और अप्राप्ति का कारण अपवित्रता है”20/02/1984“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”03/03/1984“स्व अधिकारियों के स्व के राज्य का हालचाल”10/04/1984“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”12/04/1984“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन - पवित्रता”03/05/1984“परमात्मा की सबसे पहली श्रेष्ठ रचना - ब्राह्मण”07/05/1984“बैलेन्स रखने से ही ब्लैसिंग की प्राप्ति”28/11/1984“संकल्प को सफल बनाने का सहज साधन”12/12/1984“विशेष आत्माओं का फर्ज”19/12/1984“सर्वश्रेष्ठ, सहज तथा स्पष्ट मार्ग”16/01/1985“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”23/01/1985“दिव्य जन्म की गिफ्ट - दिव्य नेत्र”21/02/1985“शीतलता की शक्ति”06/03/1985“होली का रूहानी रहस्य”21/03/1985“स्वदर्शन चक्र से विजय चक्र की प्राप्ति”30/03/1985“तीन-तीन बातों का पाठ”25/03/1986“होली का रहस्य”23/01/1987“सफलता के सितारे की विशेषतायें”02/11/1987“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”06/11/1987“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”22/11/1987“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”31/12/1987“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”06/01/1988“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”10/01/1988“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”14/01/1988“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”18/01/1988“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”03/02/1988“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”20/02/1988“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”03/03/1988“होली कैसे मनायें तथा सदाकाल का परिवर्तन कैसे हो?”19/03/1988“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”15/11/1989“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”27/11/1989“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”05/12/1989“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”09/12/1989“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”13/12/1989“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”19/03/1990“उड़ती कला का आधार उमंग-उत्साह के पंख”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”31/03/1990“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”13/12/1990“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”13/02/1991“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”25/02/1991“सोच और कर्म में समानता लाना ही परमात्म प्यार निभाना है”03/04/1991“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”10/04/1991“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”26/10/1991“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”02/03/1992“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”08/04/1992“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”21/11/1992“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”31/12/1992“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”17/11/1994“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”16/11/1995“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”25/11/1995“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”16/02/1996“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”22/03/1996“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”03/04/1996“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”06/03/1997“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”13/11/1997“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”31/01/1998“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”24/02/1998“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”01/03/1999“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”15/03/1999“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”04/11/2001“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''15/12/2001“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”31/12/2001“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''17/10/2003“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''15/10/2004“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''03/02/2005“सेवा करते उपराम और बेहद वृत्ति द्वारा एवररेडी बन ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न बनो''15/11/2005“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''30/11/2005“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''18/01/2006“संकल्प, समय और बोल के बचत की स्कीम द्वारा सफलता की सेरीमनी मनाओ, निराश आत्माओं में आशा के दीप जगाओ''31/10/2006“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''16/11/2006“अपने स्वमान की शान में रहो और समय के महत्व को जान एवररेडी बनो”15/12/2006“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''20/10/2008“सन्तुष्टमणि बन विश्व में सन्तुष्टता की लाइट फैलाओ, सन्तुष्ट रहो और सबको सन्तुष्ट करो”
