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Complaints-शिकायतें - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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119 unique murli dates in this topic
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119 murlis in हिंदी
18/01/1969
“पिताश्री जी के अव्यक्त होने के बाद - अव्यक्त वतन से प्राप्त दिव्य सन्देश”
17/04/1969
“पुरुषार्थ के स्नेही ही सबके स्नेही बनते हैं”
28/09/1969
“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
02/07/1970
“साइलेन्स बल का प्रयोग”
23/10/1970
“महारथी बनने का पुरुषार्थ”
05/11/1970
“डिले इज़ डेन्जर”
22/01/1971
“दिलतख्त नशीन आत्मा की निशानी”
04/03/1972
“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”
02/04/1972
“महिमा योग्य कैसे बनें?”
31/05/1972
“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”
23/06/1973
“अलौकिक खजाने के मालिक”
12/10/1975
“कम्पलेन्ट समाप्त कर कम्पलीट बनने की प्रेरणा”
18/01/1977
“18 जनवरी का विशेष महत्व”
02/02/1977
“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”
05/06/1977
“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”
07/06/1977
“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”
20/06/1977
“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”
29/03/1981
“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
24/10/1981
“सच्चे आशिक की निशानी”
08/11/1981
“अन्तर सम्पन्न करने का साधन ‘तुरन्त दान महापुण्य’”
31/12/1981
“निर्बल को बल देने वाले महाबलवान बनो”
17/03/1982
“संगमयुग का विशेष वरदान - ‘अमर भव’”
06/04/1982
“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”
26/04/1982
“बापदादा के दिलतख्तनशीन बनने का सर्व को समान अधिकार”
07/04/1983
“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”
11/04/1983
“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”
13/04/1983
“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”
14/04/1983
“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”
09/05/1983
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”
19/12/1983
“परमात्म प्यार - नि:स्वार्थ प्यार”
29/12/1983
“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”
13/02/1984
“अशान्ति का कारण अप्राप्ति और अप्राप्ति का कारण अपवित्रता है”
20/02/1984
“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”
03/03/1984
“स्व अधिकारियों के स्व के राज्य का हालचाल”
10/04/1984
“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”
12/04/1984
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन - पवित्रता”
03/05/1984
“परमात्मा की सबसे पहली श्रेष्ठ रचना - ब्राह्मण”
07/05/1984
“बैलेन्स रखने से ही ब्लैसिंग की प्राप्ति”
28/11/1984
“संकल्प को सफल बनाने का सहज साधन”
12/12/1984
“विशेष आत्माओं का फर्ज”
19/12/1984
“सर्वश्रेष्ठ, सहज तथा स्पष्ट मार्ग”
16/01/1985
“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”
23/01/1985
“दिव्य जन्म की गिफ्ट - दिव्य नेत्र”
21/02/1985
“शीतलता की शक्ति”
06/03/1985
“होली का रूहानी रहस्य”
21/03/1985
“स्वदर्शन चक्र से विजय चक्र की प्राप्ति”
30/03/1985
“तीन-तीन बातों का पाठ”
25/03/1986
“होली का रहस्य”
23/01/1987
“सफलता के सितारे की विशेषतायें”
02/11/1987
“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”
06/11/1987
“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”
22/11/1987
“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”
31/12/1987
“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
06/01/1988
“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”
10/01/1988
“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”
14/01/1988
“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”
18/01/1988
“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”
03/02/1988
“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”
20/02/1988
“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”
03/03/1988
“होली कैसे मनायें तथा सदाकाल का परिवर्तन कैसे हो?”
19/03/1988
“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
27/11/1989
“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
19/03/1990
“उड़ती कला का आधार उमंग-उत्साह के पंख”
25/03/1990
“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”
13/12/1990
“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”
13/02/1991
“विश्व परिवर्तन में तीव्रता लाने का साधन एकाग्रता की शक्ति एवं एकरस स्थिति”
25/02/1991
“सोच और कर्म में समानता लाना ही परमात्म प्यार निभाना है”
03/04/1991
“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”
10/04/1991
“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”
26/10/1991
“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”
02/03/1992
“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”
08/04/1992
“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
17/11/1994
“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”
16/11/1995
“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”
25/11/1995
“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”
16/02/1996
“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”
22/03/1996
“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”
03/04/1996
“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”
06/03/1997
“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”
03/04/1997
“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”
13/11/1997
“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”
31/01/1998
“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”
24/02/1998
“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”
30/03/1998
“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”
01/03/1999
“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”
15/03/1999
“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”
04/11/2001
“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''
25/11/2001
“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''
15/12/2001
“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”
31/12/2001
“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''
17/10/2003
“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''
15/10/2004
“एक को प्रत्यक्ष करने के लिए एकरस स्थिति बनाओ, स्वमान में रहो, सबको सम्मान दो''
03/02/2005
“सेवा करते उपराम और बेहद वृत्ति द्वारा एवररेडी बन ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न बनो''
15/11/2005
“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''
30/11/2005
“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”
31/12/2005
“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''
18/01/2006
“संकल्प, समय और बोल के बचत की स्कीम द्वारा सफलता की सेरीमनी मनाओ, निराश आत्माओं में आशा के दीप जगाओ''
31/10/2006
“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''
16/11/2006
“अपने स्वमान की शान में रहो और समय के महत्व को जान एवररेडी बनो”
15/12/2006
“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''
20/10/2008
“सन्तुष्टमणि बन विश्व में सन्तुष्टता की लाइट फैलाओ, सन्तुष्ट रहो और सबको सन्तुष्ट करो”
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