मन /संकल्प /चित्त सुभ संकल्प ढृढ़ संकल्प - Determined,Thoughts,Consciousness,positive Thoughts
149 unique murli dates in this topic
148 murlis in हिंदी
25/01/1969“समर्पण की ऊंची स्टेज - श्वांसों-श्वांस स्मृति”26/05/1969“सम्पूर्ण स्नेही की परख”16/07/1969“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”23/07/1969“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”18/09/1969“त्रिनेत्री, त्रिकालदर्शी और त्रिलोकीनाथ बनने की युक्तियां”28/09/1969“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”03/10/1969“सम्पूर्ण समर्पण की निशानियां”28/11/1969“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”06/12/1969“सरल स्वभाव से बुद्धि को विशाल और दूरांदेशी बनाओ”25/12/1969“अनासक्त बनने के लिए तन और मन को अमानत समझो”22/01/1970“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”23/01/1970“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”28/05/1970“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”07/06/1970“दिव्य मूर्त बनने की विधि”19/06/1970“त्रिमूर्ति लाइट्स का साक्षात्कार”02/07/1970“साइलेन्स बल का प्रयोग”30/07/1970“महारथी अर्थात् महानता”06/08/1970“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”22/10/1970“फुल की निशानी - फ्लोलेस”23/10/1970“महारथी बनने का पुरुषार्थ”01/11/1970“बाप समान बनने की युक्तियां”05/11/1970“डिले इज़ डेन्जर”09/12/1970“पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर”01/02/1971“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”01/03/1971“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”15/04/1971“त्रिमूर्ति बाप के बच्चों का त्रिमूर्ति कर्तव्य”18/04/1971“मन के भावों को जानने की विधि तथा फायदे”26/10/1971“कर्म का आधार वृत्ति”02/02/1972“प्रीत बुद्धि की निशानियाँ”04/03/1972“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”15/03/1972“त्याग और भाग्य”03/05/1972“‘लॉ मेकर' बनो, ‘लॉ ब्रेकर' नहीं”10/05/1972“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”15/05/1972“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”24/05/1972“परिवर्तन का आधार - दृढ़ संकल्प”14/06/1972“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”14/07/1972“अन्तिम सेवा के लिए रमतायोगी बनो”02/08/1972“हर कर्म विधिपूर्वक करने से सिद्धि की प्राप्ति”04/08/1972“सर्विसएबुल, सेंसीबुल और इसेंसफुल की निशानियां”06/08/1972“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”20/11/1972“स्थिति का आइना - सर्विस”04/12/1972“महावीर आत्माओं की रूहानी ड्रिल”23/06/1973“अलौकिक खजाने के मालिक”02/08/1973“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”23/09/1973“विश्व की आत्माओं को लाइट व माइट देने वाला ही विश्व-अधिकारी”09/01/1975“सम्पूर्ण बनने में सबसे बड़ा विघ्न अलबेलापन”01/02/1975“ईश्वर के साथ का और लगन की अग्नि का अनुभव”09/02/1975“आध्यात्मिक शक्तियों द्वारा विश्व-परिवर्तन कैसे?”19/09/1975“शक्तियों एवं पाण्डवों की विशेषतायें”16/10/1975“संकल्प शक्ति को कन्ट्रोल कर सिद्धि-स्वरूप बनने की युक्तियाँ”19/10/1975“वृक्षपति द्वारा कल्प-वृक्ष की दुर्दशा का आंखों देखा हाल”02/02/1976“भक्तों और पाण्डवों का पोतामेल”05/05/1977“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”27/05/1977“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”02/01/1978“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”16/02/1978“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”10/12/1978“विस्तार को न देख सार अर्थात् बिन्दु को देखो”02/01/1979“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”14/01/1979“ब्राह्मण जीवन का विशेष आधार - पवित्रता”10/12/1979“पुण्य आत्माओं के लक्षण”28/12/1979“सिद्धि स्वरूप होने की विधि - एकाग्रता”04/01/1980“वर्तमान राज्य-अधिकारी ही भविष्य राज्य-अधिकारी”07/01/1980“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”25/03/1981“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”05/04/1981“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”07/03/1982“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”28/04/1982“सर्वन्श त्यागी की निशानियाँ”26/01/1983“दाता के बच्चे बन सर्व को सहयोग दो”27/04/1983“दृष्टि-वृत्ति परिवर्तन करने की युक्तियाँ”29/12/1983“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”31/12/1983“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”12/01/1984“सदा समर्थ सोचो तथा वर्णन करो”07/03/1984“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”21/11/1984“स्व-दर्शन धारी ही दिव्य दर्शनीय मूर्त”26/11/1984“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”28/11/1984“संकल्प को सफल बनाने का सहज साधन”17/12/1984“व्यर्थ को समाप्त करने का साधन - समर्थ संकल्पों का खजाना ज्ञान मुरली”15/03/1985“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”16/02/1986“गोल्डन जुबली वर्ष में गोल्डन दुनिया और गोल्डन लाइट के स्वीट होम का अनुभव कराना”10/03/1986“बेफिकर बादशाह बनने की युक्ति”29/03/1986“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”18/03/1987“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”29/10/1987“तन, मन, धन और सम्बन्ध की शक्ति”10/01/1988“मनन करने की विधि तथा मनन शक्ति को बढ़ाने की युक्तियां”22/01/1988“हिम्मत का पहला कदम - समर्पणता”24/02/1988“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”28/02/1988“डबल विदेशी ब्राह्मण बच्चों की विशेषतायें”31/03/1988‘वाचा’ और ‘कर्मणा’ - दोनों शक्तियों को जमा करने की ईश्वरीय स्कीम19/11/1989“तन, मन, धन और जन का भाग्य”23/11/1989“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”25/12/1989“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”31/12/1989“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”06/01/1990“होलीहँस की परिभाषा”13/03/1990“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”19/03/1990“उड़ती कला का आधार उमंग-उत्साह के पंख”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”31/12/1990“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”17/03/1991“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”11/12/1991“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”31/12/1992“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”25/01/1994“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”14/04/1994“स्नेह का रिटर्न है - स्वयं को टर्न (परिवर्तन) करना”17/11/1994“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”25/03/1995“ब्राह्मण जीवन का सबसे श्रेष्ठ खजाना - संकल्प का खजाना”07/11/1995“बापदादा की विशेष पसन्दगी और ज्ञान का फाउण्डेशन - पवित्रता”16/11/1995“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”22/12/1995“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”09/01/1996“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”16/02/1996“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”31/12/1996“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”06/03/1997“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”18/01/1998“सकाश देने की सेवा करने के लिए लगावमुक्त बन बेहद के वैरागी बनो”13/02/1999“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”15/03/1999“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”30/11/1999“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”15/12/1999“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”31/12/1999“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”30/03/2000“मन को दुरुस्त रखने के लिए बीच-बीच में 5 सेकेण्ड भी निकाल कर मन की एक्सरसाइज करो”25/11/2000“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”04/11/2001“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''15/12/2001“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”31/12/2001“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''18/01/2003“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”15/12/2004“बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले''18/01/2005“सेकेण्ड में देहभान से मुक्त हो जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो और मास्टर मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता बनो”03/02/2005“सेवा करते उपराम और बेहद वृत्ति द्वारा एवररेडी बन ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न बनो''20/02/2005“दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो''03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''25/02/2006“आज उत्सव के दिन मन के उमंग-उत्साह द्वारा माया से मुक्त रहने का व्रत लो, मर्सीफुल बन मास्टर मुक्तिदाता बनो, साथ चलना है तो समान बनो''31/10/2006“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''31/12/2006“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“02/02/2007“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”15/02/2007“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”03/03/2007“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”30/11/2007“सत्यता और पवित्रता की शक्ति को स्वरूप में लाते बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो”31/12/2007“नये वर्ष में अखण्ड महादानी, अखण्ड निर्विघ्न, अखण्ड योगी और सदा सफलतामूर्त बनना”18/02/2008“विश्व परिवर्तन के लिए शान्ति की शक्ति का प्रयोग करो”05/03/2008“संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो, शिवमंत्र से मैं-पन का परिवर्तन करो”
