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स्लोगन - slogans - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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स्लोगन - slogans
स्लोगन - slogans
173 unique murli dates in this topic
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ગુજરાતી
తెలుగు
173 murlis in हिंदी
17/05/1969
“जादू मंत्र का दर्पण”
18/05/1969
“रूहानी ज्ञान-योग के ज्योतिषी”
16/07/1969
“किसी भी कार्य में सफल होने का साधन - साहस को नहीं छोड़ना और आपसी स्नेह कायम रखना”
23/07/1969
“सफलता का आधार - परखने की शक्ति”
27/08/1969
“मदद लेने का साधन है - हिम्मत”
28/09/1969
“पूरे कोर्स का सार - कथनी करनी एक करो”
16/10/1969
“परखने की शक्ति को तीव्र बनाओ”
20/10/1969
“बिन्दु और सिन्धु की स्मृति से सम्पूर्णता”
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
23/03/1970
“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”
02/04/1970
“सम्पूर्ण स्टेज की निशानियां”
05/04/1970
“सर्व प्वॉइन्ट का सार प्वाइंट (बिन्दी) बनो”
14/05/1970
“समर्पण का गुह्य अर्थ”
28/05/1970
“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”
29/05/1970
“समीप रत्नों की निशानियां”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
11/06/1970
“विश्वपति बनने की सामग्री”
18/06/1970
“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”
25/06/1970
“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”
29/06/1970
“समर्पण का विशाल रूप”
02/07/1970
“साइलेन्स बल का प्रयोग”
30/07/1970
“महारथी अर्थात् महानता”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
23/10/1970
“महारथी बनने का पुरुषार्थ”
05/11/1970
“डिले इज़ डेन्जर”
30/11/1970
“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”
09/12/1970
“पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
25/03/1971
“न्यारे और विश्व के प्यारे बनने की विधि”
18/04/1971
“मन के भावों को जानने की विधि तथा फायदे”
04/03/1972
“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”
15/03/1972
“त्याग और भाग्य”
06/08/1972
“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”
07/01/1977
“विश्व-कल्याणकारी कैसे बनें?”
10/01/1977
“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”
16/01/1977
“सन्तुष्ट आत्मा ही अनेक आत्माओं का इष्ट बन सकती है”
18/01/1977
“18 जनवरी का विशेष महत्व”
23/01/1977
“महीनता ही महानता है”
23/04/1977
“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
14/05/1977
“स्वमान और फ़रमान”
16/05/1977
“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”
27/05/1977
“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
05/06/1977
“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”
18/06/1977
“योग की पॉवरफुल स्टेज कैसे बने?”
28/06/1977
“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”
18/01/1978
“बापदादा की सेवा का रिटर्न”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
07/01/1980
“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”
09/01/1980
“अलौकिक ड्रेस और अलौकिक श्रृंगार”
18/01/1980
“स्मृति दिवस पर बापदादा की बच्चों प्रति शिक्षायें”
23/01/1980
“पवित्रता का महत्व”
28/01/1980
“सम्पूर्ण ब्रह्मा और ब्राह्मणों के सम्पूर्ण स्वरूप के अन्तर का कारण और निवारण”
07/02/1980
“विचित्र राज्य दरबार”
07/03/1981
“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”
09/03/1981
“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”
23/03/1981
“फर्स्ट या एयरकण्डीशन में जाने का सहज साधन”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
07/04/1981
“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”
15/04/1981
“नम्बरवन तकदीरवान की विशेषताएं”
03/11/1981
“योद्धा नहीं दिलतख्तनशीन बनो”
18/11/1981
“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”
28/11/1981
“आप पूर्वजों से सर्व आत्माओं की आशाएं”
31/12/1981
“निर्बल को बल देने वाले महाबलवान बनो”
20/01/1982
“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”
02/05/1982
“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”
13/06/1982
“एक का मन्त्र याद रहे तो सबमें एक दिखाई देगा (टीचर्स के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात)”
25/12/1982
“विधि, विधान और वरदान”
18/02/1983
“सदा उमंग-उत्साह में रहने की युक्तियाँ”
24/02/1983
“दिलाराम बाप का दिलरूबा बच्चों से मिलन”
29/12/1983
“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”
22/02/1984
“संगम पर चार कम्बाइन्ड रूपों का अनुभव”
24/04/1984
“वर्तमान ब्राह्मण जन्म - हीरे तुल्य”
26/11/1984
“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”
28/11/1984
“संकल्प को सफल बनाने का सहज साधन”
06/03/1985
“होली का रूहानी रहस्य”
24/03/1985
“अब नहीं तो कब नहीं”
01/01/1986
“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”
13/01/1986
“ब्राह्मण जीवन - सदा बेहद की खुशियों का जीवन”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
01/03/1986
“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”
10/03/1986
“बेफिकर बादशाह बनने की युक्ति”
13/03/1986
“सहज परिवर्तन का आधार - अनुभव की अथॉरिटी”
27/03/1986
“सदा के स्नेही बनो”
07/04/1986
“तपस्वी-मूर्त, त्याग मूर्त, विधाता ही विश्व-राज्य अधिकारी”
09/04/1986
“सच्चे सेवाधारी की निशानी”
21/01/1987
“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”
23/01/1987
“सफलता के सितारे की विशेषतायें”
14/10/1987
“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”
10/11/1987
“शुभचिन्तक-मणि बन विश्व को चिन्ताओं से मुक्त करो”
18/11/1987
“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”
06/12/1987
“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”
31/12/1987
“नया वर्ष - बाप समान बनने का वर्ष”
18/01/1988
“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”
16/02/1988
“सदा उत्साह में रहकर उत्सव मनाओ”
20/02/1988
“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”
19/11/1989
“तन, मन, धन और जन का भाग्य”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
17/12/1989
“सदा समर्थ कैसे बनें?”
18/01/1990
“स्वयं और सेवा में तीव्रगति के परिवर्तन का गुह्य राज़”
31/12/1990
“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”
10/04/1991
“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”
26/10/1991
“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”
11/12/1991
“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
25/11/1993
“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
18/01/1994
“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”
25/01/1994
“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”
01/02/1994
“त्रिकालदर्शी स्थिति के श्रेष्ठ आसन द्वारा सदा विजयी बनो और दूसरों को शक्ति का सहयोग दो”
18/02/1994
“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”
09/03/1994
“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”
05/12/1994
“वर्तमान समय की आवश्यकता - बेहद के वैराग्य वृत्ति का वायुमण्डल बनाना”
13/12/1995
“व्यर्थ बोल, डिस्टर्ब करने वाले बोल से स्वयं को मुक्त कर बोल की एकॉनॉमी करो”
09/01/1996
“बालक सो मालिकपन के नशे में रहने के लिए मन का राजा बनो”
27/02/1996
“सत्यता का फाउण्डेशन है पवित्रता और निशानी है - चलन वा चेहरे में दिव्यता”
22/03/1996
“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”
31/12/1996
“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”
03/04/1997
“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”
28/11/1997
“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”
31/12/1997
“इस नये वर्ष को मुक्ति वर्ष मनाओ, सफल करो सफलता लो”
21/11/1998
“सेवा के साथ देह में रहते विदेही अवस्था का अनुभव बढ़ाओ”
31/12/1998
“इस नये वर्ष में हिम्मत के आधार पर स्वयं को मेहनत मुक्त सदा विजयी अनुभव करो”
01/03/1999
“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”
15/03/1999
“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”
30/03/1999
“तीव्र पुरुषार्थ की लगन को ज्वाला रूप बनाकर बेहद के वैराग्य की लहर फैलाओ”
15/11/1999
“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”
31/12/1999
“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”
11/11/2000
“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”
25/11/2000
“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”
16/12/2000
“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”
31/12/2000
“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”
04/11/2001
“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''
31/12/2001
“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''
25/10/2002
“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
31/12/2002
“इस नये वर्ष में सर्व खजाने सफल कर सफलतामूर्त बनने की विशेषता दिखाओ”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
17/03/2003
“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''
17/10/2003
“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''
15/12/2003
“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''
31/12/2003
“इस वर्ष निमित्त और निर्माण बन जमा के खाते को बढ़ाओ और अखण्ड महादानी बनो''
18/01/2004
“वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ''
17/02/2004
“शिवरात्रि जन्म उत्सव का विशेष स्लोगन - सर्व को सहयोग दो और सहयोगी बनाओ, सदा अखण्ड भण्डारा चलता रहे''
20/03/2004
“इस वर्ष को विशेष जीवनमुक्त वर्ष के रूप में मनाओ, एकता और एकाग्रता से बाप की प्रत्यक्षता करो''
02/11/2004
“स्व-उपकारी बन अपकारी पर भी उपकार करो, सर्व शक्ति, सर्व गुण सम्पन्न सम्मान दाता बनो”
15/12/2004
“बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले''
25/03/2005
“मास्टर ज्ञान सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ, विधाता बनो, तपस्वी बनो''
04/09/2005
“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”
21/10/2005
“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”
30/11/2005
“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”
25/02/2006
“आज उत्सव के दिन मन के उमंग-उत्साह द्वारा माया से मुक्त रहने का व्रत लो, मर्सीफुल बन मास्टर मुक्तिदाता बनो, साथ चलना है तो समान बनो''
14/03/2006
“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''
31/10/2006
“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''
15/12/2006
“स्मृति स्वरूप, अनुभवी मूर्त बन सेकण्ड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो''
15/02/2007
“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”
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