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Maya-माया - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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Maya-माया
Maya-माया
165 unique murli dates in this topic
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164 murlis in हिंदी
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
26/01/1970
“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”
05/03/1970
“जल चढ़ाना अर्थात् प्रतिज्ञा करना”
29/05/1970
“समीप रत्नों की निशानियां”
18/06/1970
“वृद्धि के लिए टाइम-टेबुल की विधि”
25/06/1970
“व्यक्त और अव्यक्त वतन की भाषा में अन्तर”
02/07/1970
“साइलेन्स बल का प्रयोग”
22/10/1970
“फुल की निशानी - फ्लोलेस”
30/11/1970
“वर्कर्स की वन्डरफुल सर्कस”
01/02/1971
“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”
25/03/1971
“न्यारे और विश्व के प्यारे बनने की विधि”
20/05/1971
“विधाता, वरदाता-पन की स्टेज़”
24/05/1971
“पोज़ीशन में ठहरने से अपोज़ीशन समाप्त”
30/05/1971
“बाप की आज्ञा और प्रतिज्ञा”
28/07/1971
“आकार में निराकार को देखने का अभ्यास”
20/08/1971
“सबसे श्रेष्ठ तख्त और ताज”
03/10/1971
“निर्मानता के गुण से विश्व निर्माता”
21/01/1972
“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”
27/02/1972
“होलीहंस बनने का यादगार - होली”
04/03/1972
“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”
09/05/1972
“अपने फीचर से फ्यूचर दिखाओ”
31/05/1972
“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”
08/06/1972
“सम्पूर्ण स्टेज की परख”
14/06/1972
“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”
24/06/1972
“एवररेडी बन अन्तिम समय का आह्वान करो”
26/06/1972
“इफेक्ट से बचना अर्थात् परफेक्ट बनना”
14/07/1972
“अन्तिम सेवा के लिए रमतायोगी बनो”
18/07/1972
“कमजोरियों की समाप्ति समारोह करने वाले ही तीव्र पुरुषार्थी हैं”
28/07/1972
“अपवित्रता और वियोग को संघार करने वाली शक्तियाँ ही असुर संघारनी हैं”
19/09/1972
“मजबूरियों को समाप्त करने का साधन - मजबूती”
16/05/1973
“अन्तिम पुरुषार्थ”
06/02/1974
“परखने की शक्ति से महारथी की परख”
08/07/1974
“मास्टर नॉलेजफुल व सर्व-शक्तिवान् विभिन्न प्रकार की क्यू से मुक्त”
11/02/1975
“माया से युद्ध करने वाले पाण्डवों के लिए धारणायें”
18/09/1975
“माया के चक्करों से परे, स्वदर्शन चक्रधारी ही भविष्य में छत्रधारी”
16/10/1975
“संकल्प शक्ति को कन्ट्रोल कर सिद्धि-स्वरूप बनने की युक्तियाँ”
23/10/1975
“इन्तज़ार को छोड़कर इन्तज़ाम करो!”
27/10/1975
“क्वेश्चन, करेक्शन और कोटेशन से पुरुषार्थ में ढीलापन”
01/02/1976
“रूहानी शमा और तीन प्रकार के रूहानी परवाने”
26/04/1977
“स्वतन्त्रता ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार है”
05/05/1977
“वरदानी, महादानी और दानी आत्माओं के लक्षण”
14/05/1977
“स्वमान और फ़रमान”
16/05/1977
“माया के वार का सामना करने के लिए दो शक्तियों की आवश्यकता”
19/05/1977
“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”
27/05/1977
“पॉवरफुल स्टेज अर्थात् बाप समान बीजरूप स्थिति”
31/05/1977
“विश्व कल्याण करने का सहज साधन है श्रेष्ठ संकल्पों की एकाग्रता”
07/06/1977
“संगमयुग (धर्माऊ युग) को विशेष वरदान - ‘चढ़ती कला सर्व का भला’”
18/06/1977
“योग की पॉवरफुल स्टेज कैसे बने?”
02/01/1978
“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
03/12/1978
“पाप और पुण्य की गुह्य गति”
02/01/1979
“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”
16/01/1979
“तिलक, ताज और तख्तधारी बनने की युक्तियाँ”
18/01/1979
“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”
12/11/1979
“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”
26/11/1979
“प्रीत की रीति”
30/11/1979
“स्वमान में स्थित आत्मा के लक्षण”
17/12/1979
“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”
04/01/1980
“वर्तमान राज्य-अधिकारी ही भविष्य राज्य-अधिकारी”
25/01/1980
“बिन्दु रूप परमात्मा का बिन्दु रूप आत्मा से मिलन”
07/03/1981
“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”
09/03/1981
“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”
06/01/1982
“सगंमयुगी ब्राह्मण जीवन में पवित्रता का महत्व”
08/01/1982
“लण्डन ग्रुप के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”
07/03/1982
“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”
19/03/1982
“कर्म - आत्मा का दर्शन कराने का दर्पण”
27/03/1982
“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”
03/04/1982
“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”
06/04/1982
“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”
09/01/1983
“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”
11/01/1983
“समर्थ की निशानी - संकल्प, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार बाप समान”
27/03/1983
“बाप समान बेहद की वृत्ति को धारण कर बाप समान बनो”
02/05/1983
“माया को दोषी बनाने के बजाए मास्टर रचता, शक्तिशाली बनो”
23/05/1983
“छोड़ो तो छूटो!”
03/12/1983
“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”
07/12/1983
“श्रेष्ठ पद की प्राप्ति का आधार - ‘मुरली’”
31/12/1983
“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”
12/01/1984
“सदा समर्थ सोचो तथा वर्णन करो”
16/01/1984
“‘स्वराज्य’ - आपका बर्थ राईट है”
20/02/1984
“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”
03/03/1984
“स्व अधिकारियों के स्व के राज्य का हालचाल”
19/11/1984
“बेहद की वैराग्य वृत्ति से सिद्धियों की प्राप्ति”
21/11/1984
“स्व-दर्शन धारी ही दिव्य दर्शनीय मूर्त”
07/01/1985
“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”
21/01/1985
“ईश्वरीय जन्म दिन की गोल्डन गिफ्ट - ‘दिव्य बुद्धि’”
30/01/1985
“मायाजीत और प्रकृतिजीत ही स्वराज्य-अधिकारी”
02/03/1985
“वर्तमान ईश्वरीय जन्म - अमूल्य जन्म”
18/03/1985
“सन्तुष्टता”
30/03/1985
“तीन-तीन बातों का पाठ”
10/03/1986
“बेफिकर बादशाह बनने की युक्ति”
16/03/1986
“रुहानी ड्रिल”
22/11/1987
“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”
27/12/1987
“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”
18/01/1988
“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”
26/01/1988
“संगमयुग पर नम्बरवन पूज्य बनने की अलौकिक विधि”
03/02/1988
“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”
16/02/1988
“सदा उत्साह में रहकर उत्सव मनाओ”
20/02/1988
“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”
24/02/1988
“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”
07/03/1988
“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
17/12/1989
“सदा समर्थ कैसे बनें?”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
14/01/1990
“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
19/03/1990
“उड़ती कला का आधार उमंग-उत्साह के पंख”
31/12/1990
“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”
17/03/1991
“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
03/10/1992
“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
25/11/1993
“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”
23/12/1993
“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”
31/12/1993
“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”
10/01/1994
“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”
18/01/1994
“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”
25/01/1994
“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”
18/02/1994
“स्वमान की स्मृति का स्विच ऑन करने से देह भान के अंधकार की समाप्ति”
17/11/1994
“हर गुण व शक्ति के अनुभवों में खो जाना अर्थात् खुशनसीब बनना”
05/12/1994
“वर्तमान समय की आवश्यकता - बेहद के वैराग्य वृत्ति का वायुमण्डल बनाना”
14/12/1994
“समय, संकल्प, बोल द्वारा कमाई जमा करने का आधार - तीन बिन्दी लगाना”
23/12/1994
“अपने तीन स्वरूप सदा स्मृति में रहें - 1- संगमयुगी ब्राह्मण, 2- ब्राह्मण सो फ़रिश्ता और 3- फ़रिश्ता सो देवता”
07/03/1995
“ब्राह्मण अर्थात् धर्म सत्ता और स्वराज्य सत्ता की अधिकारी आत्मा”
16/03/1995
“सर्व प्राप्ति सम्पन्न आत्मा की निशानी - सन्तुष्टता और प्रसन्नता”
31/03/1995
“परमात्म मिलन मेले की सौगात - ताज, तख्त और तिलक”
06/04/1995
“प्योरिटी की रूहानी पर्सनालिटी की स्मृति स्वरूप द्वारा मायाजीत बनो”
07/11/1995
“बापदादा की विशेष पसन्दगी और ज्ञान का फाउण्डेशन - पवित्रता”
16/11/1995
“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”
04/12/1995
“यथार्थ निश्चय के फाउण्डेशन द्वारा सम्पूर्ण पवित्रता को धारण करो”
13/12/1995
“व्यर्थ बोल, डिस्टर्ब करने वाले बोल से स्वयं को मुक्त कर बोल की एकॉनॉमी करो”
22/12/1995
“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”
18/01/1996
“सदा समर्थ रहने की सहज विधि - शुभचिंतन करो और शुभचिंतक बनो”
16/02/1996
“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”
10/03/1996
“‘करनहार’ और ‘करावनहार’ की स्मृति से कर्मातीत स्थिति का अनुभव”
18/01/1997
“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
23/02/1997
“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”
06/03/1997
“शिव जयन्ती की गिफ्ट - मेहनत को छोड़ मुहब्बत के झूले में झूलो”
14/12/1997
“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”
31/12/1997
“इस नये वर्ष को मुक्ति वर्ष मनाओ, सफल करो सफलता लो”
12/12/1998
“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”
31/12/1998
“इस नये वर्ष में हिम्मत के आधार पर स्वयं को मेहनत मुक्त सदा विजयी अनुभव करो”
15/11/1999
“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”
30/11/1999
“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”
03/03/2000
“जन्म दिन की विशेष गिफ्ट - शुभ भाव और प्रेम भाव को इमर्ज कर क्रोध महाशत्रु पर विजयी बनो”
25/11/2000
“बाप समान बनने के लिए दो बातों की दृढ़ता रखो - स्वमान में रहना है और सबको सम्मान देना है”
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
21/10/2005
“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”
28/03/2006
“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”
31/10/2006
“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''
31/12/2006
“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“
31/10/2007
“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”
05/03/2008
“संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो, शिवमंत्र से मैं-पन का परिवर्तन करो”
18/03/2008
“कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन कर मास्टर मुक्तिदाता बनो, सबको बाप के संग का रंग लगाकर समान बनने की होली मनाओ”