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रूहानी गीत / गायन - spiritual songs - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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रूहानी गीत / गायन - spiritual songs
रूहानी गीत / गायन - spiritual songs
199 unique murli dates in this topic
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हिंदी
ગુજરાતી
తెలుగు
197 murlis in हिंदी
02/02/1969
“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”
06/02/1969
“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”
15/02/1969
“सौभाग्यशाली वह है जिसका बाप, टीचर और सतगुरू से पूरा कनेक्शन है”
18/06/1969
“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”
27/08/1969
“मदद लेने का साधन है - हिम्मत”
23/03/1970
“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”
26/03/1970
“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”
02/04/1970
“सम्पूर्ण स्टेज की निशानियां”
28/05/1970
“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”
29/06/1970
“समर्पण का विशाल रूप”
27/04/1972
“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”
15/05/1972
“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”
27/05/1972
“रावण से विमुख और बाप के सम्मुख रहो”
31/05/1972
“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”
14/07/1972
“अन्तिम सेवा के लिए रमतायोगी बनो”
10/01/1977
“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”
12/01/1977
“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”
28/04/1977
“सदा सुहागिन की निशानियाँ”
03/05/1977
“कर्मों की अति गुह्य गति”
14/05/1977
“स्वमान और फ़रमान”
21/05/1977
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”
12/06/1977
“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”
02/01/1978
“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
16/02/1978
“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”
01/04/1978
“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”
10/12/1978
“विस्तार को न देख सार अर्थात् बिन्दु को देखो”
04/01/1979
“सम्पूर्णता के आईने में निज स्वरूप को देखो”
06/01/1979
“सूर्यवंशी और चन्द्रवंशी आत्माओं के प्रैक्टिकल जीवन की धारणाओं के चिन्ह”
12/01/1979
“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”
19/11/1979
“बेहद के वानप्रस्थी अर्थात् निरन्तर एकान्त में सदा स्मृति स्वरूप”
12/12/1979
“रूहानी अलंकार और उनसे सजी हुई मूर्तियाँ”
17/12/1979
“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”
24/12/1979
“जहान को रोशन करने वालों की महफिल”
18/01/1980
“स्मृति दिवस पर बापदादा की बच्चों प्रति शिक्षायें”
21/01/1980
“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”
18/03/1981
“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”
11/04/1981
“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”
13/04/1981
“रूहे-गुलाब की विशेषता”
02/10/1981
“सदा मिलन के झूले में झूलने का आधार”
24/10/1981
“सच्चे आशिक की निशानी”
03/11/1981
“योद्धा नहीं दिलतख्तनशीन बनो”
31/12/1981
“निर्बल को बल देने वाले महाबलवान बनो”
02/01/1982
“विश्व-परिवर्तन की जिम्मेवारी - संगमयुगी ब्राह्मणों पर”
10/01/1982
“स्वराज्य अधिकारी आत्माओं का आसन - कर्मातीत स्टेज”
20/01/1982
“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”
22/01/1982
“बधाई और विदाई दो”
27/03/1982
“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”
06/04/1982
“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”
30/04/1982
“विस्तार को बिन्दी में समाओ”
02/05/1982
“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”
31/12/1982
“बापदादा की सर्व अलौकिक फ्रैण्ड्स को बधाई”
15/02/1983
“विश्व शान्ति का आधार - रियलाइजेशन”
24/02/1983
“दिलाराम बाप का दिलरूबा बच्चों से मिलन”
13/04/1983
“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”
21/04/1983
“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”
30/04/1983
“परम पूज्य बनने का आधार”
09/05/1983
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”
19/05/1983
“साक्षी दृष्टा कैसे बनें?”
03/12/1983
“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”
05/12/1983
“संगमयुग - बाप बच्चों के मिलन का युग”
12/01/1984
“सदा समर्थ सोचो तथा वर्णन करो”
14/01/1984
“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”
18/01/1984
“18 जनवरी - स्मृति दिवस का महत्व”
13/02/1984
“अशान्ति का कारण अप्राप्ति और अप्राप्ति का कारण अपवित्रता है”
18/02/1984
“ब्राह्मण जीवन - अमूल्य जीवन”
22/02/1984
“संगम पर चार कम्बाइन्ड रूपों का अनुभव”
26/02/1984
“बापदादा की अद्भुत चित्रशाला”
19/04/1984
“भावुक आत्मा तथा ज्ञानी आत्मा के लक्षण”
22/04/1984
“विचित्र बाप द्वारा विचित्र पढ़ाई तथा विचित्र प्राप्ति”
26/04/1984
“रुहानी विचित्र मेले में सर्व खज़ानों की प्राप्ति”
09/05/1984
“सदा एकरस उड़ने और उड़ाने के गीत गाओ”
11/05/1984
“ब्राह्मणों के हर कदम, संकल्प, कर्म से विधान का निर्माण”
26/11/1984
“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”
07/01/1985
“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”
16/02/1985
“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”
18/02/1985
“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”
24/02/1985
“संगमयुग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग”
30/03/1985
“तीन-तीन बातों का पाठ”
01/01/1986
“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”
15/01/1986
“सस्ता सौदा और बचत का बजट”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
16/02/1986
“गोल्डन जुबली वर्ष में गोल्डन दुनिया और गोल्डन लाइट के स्वीट होम का अनुभव कराना”
25/02/1986
“सफलता का आधार - दृढ़ता”
07/03/1986
“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”
29/03/1986
“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”
31/03/1986
“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”
09/04/1986
“सच्चे सेवाधारी की निशानी”
31/12/1986
“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”
21/01/1987
“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”
23/01/1987
“सफलता के सितारे की विशेषतायें”
20/02/1987
“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”
18/03/1987
“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”
20/03/1987
“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”
05/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”
14/10/1987
“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”
17/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”
18/11/1987
“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”
22/11/1987
“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”
27/11/1987
“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”
06/12/1987
“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”
14/12/1987
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”
23/12/1987
“मनन शक्ति और मगन स्थिति”
18/01/1988
“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”
30/01/1988
“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”
24/02/1988
“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”
11/08/1988
“सफलता का चुम्बक - ‘मिलना और मोल्ड होना’”
07/11/1989
“तीनों सम्बन्धों की सहज और श्रेष्ठ पालना”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
25/12/1989
“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”
31/12/1989
“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”
02/01/1990
“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”
14/01/1990
“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”
18/01/1990
“स्वयं और सेवा में तीव्रगति के परिवर्तन का गुह्य राज़”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
07/03/1990
“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”
25/03/1990
“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”
31/12/1990
“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”
26/10/1991
“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”
11/12/1991
“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
02/03/1992
“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”
16/03/1992
“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”
08/04/1992
“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
09/01/1993
“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
26/03/1993
“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
18/11/1993
“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”
25/11/1993
“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”
02/12/1993
“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
25/01/1994
“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”
09/03/1994
“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”
14/04/1994
“स्नेह का रिटर्न है - स्वयं को टर्न (परिवर्तन) करना”
25/11/1995
“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”
16/02/1996
“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”
31/12/1996
“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”
03/04/1997
“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”
13/11/1997
“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”
28/11/1997
“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”
18/01/1998
“सकाश देने की सेवा करने के लिए लगावमुक्त बन बेहद के वैरागी बनो”
31/01/1998
“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”
24/02/1998
“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”
12/12/1998
“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”
13/02/1999
“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”
23/10/1999
“समय की पुकार - दाता बनो”
30/11/1999
“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”
15/12/1999
“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”
31/12/1999
“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”
03/03/2000
“जन्म दिन की विशेष गिफ्ट - शुभ भाव और प्रेम भाव को इमर्ज कर क्रोध महाशत्रु पर विजयी बनो”
19/03/2000
“निर्माण और निर्मान के बैलेन्स से दुआओं का खाता जमा करो”
04/02/2001
“समय प्रमाण स्वराज्य अधिकारी बन सर्व रूहानी साधन तीव्रगति से कार्य में लगाओ”
04/11/2001
“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''
25/11/2001
“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''
15/12/2001
“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”
11/03/2002
“विशेषतायें परमात्म देन हैं - इन्हें विश्व सेवा में अर्पण करो''
28/03/2002
“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
15/12/2002
“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
28/02/2003
“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''
17/03/2003
“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''
30/11/2003
“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''
31/12/2003
“इस वर्ष निमित्त और निर्माण बन जमा के खाते को बढ़ाओ और अखण्ड महादानी बनो''
18/01/2004
“वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ''
17/02/2004
“शिवरात्रि जन्म उत्सव का विशेष स्लोगन - सर्व को सहयोग दो और सहयोगी बनाओ, सदा अखण्ड भण्डारा चलता रहे''
05/03/2004
“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''
15/12/2004
“बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले''
18/01/2005
“सेकेण्ड में देहभान से मुक्त हो जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो और मास्टर मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता बनो”
03/02/2005
“सेवा करते उपराम और बेहद वृत्ति द्वारा एवररेडी बन ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न बनो''
20/02/2005
“दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो''
15/11/2005
“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''
31/12/2005
“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''
18/01/2006
“संकल्प, समय और बोल के बचत की स्कीम द्वारा सफलता की सेरीमनी मनाओ, निराश आत्माओं में आशा के दीप जगाओ''
25/02/2006
“आज उत्सव के दिन मन के उमंग-उत्साह द्वारा माया से मुक्त रहने का व्रत लो, मर्सीफुल बन मास्टर मुक्तिदाता बनो, साथ चलना है तो समान बनो''
14/03/2006
“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''
28/03/2006
“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”
31/10/2006
“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''
31/12/2006
“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“
18/01/2007
“अब स्वयं को मुक्त कर मास्टर मुक्तिदाता बन सबको मुक्ति दिलाने के निमित्त बनो”
15/02/2007
“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”
03/03/2007
“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”
31/03/2007
“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”
15/10/2007
“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”
31/10/2007
“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”
15/12/2007
“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”
02/02/2008
“सम्पूर्ण पवित्रता द्वारा रूहानी रॉयल्टी और पर्सनालिटी का अनुभव करते, अपने मास्टर ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो”
05/03/2008
“संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो, शिवमंत्र से मैं-पन का परिवर्तन करो”
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