रूहानी गीत / गायन - spiritual songs
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02/02/1969“अव्यक्त मिलन के अनुभव की विधि”06/02/1969“महिमा सुनना छोड़ो - महान् बनो”15/02/1969“सौभाग्यशाली वह है जिसका बाप, टीचर और सतगुरू से पूरा कनेक्शन है”18/06/1969“मरजीवा वह है जो पुराने शूद्रपन के संस्कारों को टच भी न करे”27/08/1969“मदद लेने का साधन है - हिम्मत”23/03/1970“सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना”26/03/1970“महारथी-पन के गुण और कर्तव्य”02/04/1970“सम्पूर्ण स्टेज की निशानियां”28/05/1970“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”29/06/1970“समर्पण का विशाल रूप”27/04/1972“लकी और लवली बनने का पुरुषार्थ”15/05/1972“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”27/05/1972“रावण से विमुख और बाप के सम्मुख रहो”31/05/1972“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”14/07/1972“अन्तिम सेवा के लिए रमतायोगी बनो”10/01/1977“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”12/01/1977“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”28/04/1977“सदा सुहागिन की निशानियाँ”03/05/1977“कर्मों की अति गुह्य गति”14/05/1977“स्वमान और फ़रमान”21/05/1977“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”12/06/1977“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”02/01/1978“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”16/02/1978“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”01/04/1978“निरन्तर योगी ही निरन्तर साथी है”10/12/1978“विस्तार को न देख सार अर्थात् बिन्दु को देखो”04/01/1979“सम्पूर्णता के आईने में निज स्वरूप को देखो”06/01/1979“सूर्यवंशी और चन्द्रवंशी आत्माओं के प्रैक्टिकल जीवन की धारणाओं के चिन्ह”12/01/1979“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”19/11/1979“बेहद के वानप्रस्थी अर्थात् निरन्तर एकान्त में सदा स्मृति स्वरूप”12/12/1979“रूहानी अलंकार और उनसे सजी हुई मूर्तियाँ”17/12/1979“होली हंस और अमृतवेला रूपी मानसरोवर”24/12/1979“जहान को रोशन करने वालों की महफिल”18/01/1980“स्मृति दिवस पर बापदादा की बच्चों प्रति शिक्षायें”21/01/1980“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”18/03/1981“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”11/04/1981“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”13/04/1981“रूहे-गुलाब की विशेषता”02/10/1981“सदा मिलन के झूले में झूलने का आधार”24/10/1981“सच्चे आशिक की निशानी”03/11/1981“योद्धा नहीं दिलतख्तनशीन बनो”31/12/1981“निर्बल को बल देने वाले महाबलवान बनो”02/01/1982“विश्व-परिवर्तन की जिम्मेवारी - संगमयुगी ब्राह्मणों पर”10/01/1982“स्वराज्य अधिकारी आत्माओं का आसन - कर्मातीत स्टेज”20/01/1982“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”22/01/1982“बधाई और विदाई दो”27/03/1982“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”06/04/1982“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”30/04/1982“विस्तार को बिन्दी में समाओ”02/05/1982“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”31/12/1982“बापदादा की सर्व अलौकिक फ्रैण्ड्स को बधाई”15/02/1983“विश्व शान्ति का आधार - रियलाइजेशन”24/02/1983“दिलाराम बाप का दिलरूबा बच्चों से मिलन”13/04/1983“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”21/04/1983“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”30/04/1983“परम पूज्य बनने का आधार”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”19/05/1983“साक्षी दृष्टा कैसे बनें?”03/12/1983“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”05/12/1983“संगमयुग - बाप बच्चों के मिलन का युग”12/01/1984“सदा समर्थ सोचो तथा वर्णन करो”14/01/1984“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”18/01/1984“18 जनवरी - स्मृति दिवस का महत्व”13/02/1984“अशान्ति का कारण अप्राप्ति और अप्राप्ति का कारण अपवित्रता है”18/02/1984“ब्राह्मण जीवन - अमूल्य जीवन”22/02/1984“संगम पर चार कम्बाइन्ड रूपों का अनुभव”26/02/1984“बापदादा की अद्भुत चित्रशाला”19/04/1984“भावुक आत्मा तथा ज्ञानी आत्मा के लक्षण”22/04/1984“विचित्र बाप द्वारा विचित्र पढ़ाई तथा विचित्र प्राप्ति”26/04/1984“रुहानी विचित्र मेले में सर्व खज़ानों की प्राप्ति”09/05/1984“सदा एकरस उड़ने और उड़ाने के गीत गाओ”11/05/1984“ब्राह्मणों के हर कदम, संकल्प, कर्म से विधान का निर्माण”26/11/1984“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”07/01/1985“नये वर्ष का विशेष संकल्प - ‘मास्टर विधाता बनो’”16/02/1985“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”18/02/1985“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”24/02/1985“संगमयुग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग”30/03/1985“तीन-तीन बातों का पाठ”01/01/1986“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”15/01/1986“सस्ता सौदा और बचत का बजट”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”16/02/1986“गोल्डन जुबली वर्ष में गोल्डन दुनिया और गोल्डन लाइट के स्वीट होम का अनुभव कराना”25/02/1986“सफलता का आधार - दृढ़ता”07/03/1986“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”29/03/1986“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”09/04/1986“सच्चे सेवाधारी की निशानी”31/12/1986“पास्ट, प्रेजन्ट और फ्यूचर को श्रेष्ठ बनाने की विधि”21/01/1987“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”23/01/1987“सफलता के सितारे की विशेषतायें”20/02/1987“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”18/03/1987“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”20/03/1987“स्नेह और सत्यता की अथॉरिटी का बैलेन्स”05/10/1987“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”14/10/1987“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”17/10/1987“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”18/11/1987“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”22/11/1987“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”27/11/1987“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”06/12/1987“सिद्धि का आधार - ‘श्रेष्ठ वृत्ति’”14/12/1987“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”23/12/1987“मनन शक्ति और मगन स्थिति”18/01/1988“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”30/01/1988“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”24/02/1988“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”11/08/1988“सफलता का चुम्बक - ‘मिलना और मोल्ड होना’”07/11/1989“तीनों सम्बन्धों की सहज और श्रेष्ठ पालना”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”05/12/1989“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”09/12/1989“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”21/12/1989“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”25/12/1989“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”31/12/1989“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”02/01/1990“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”14/01/1990“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”18/01/1990“स्वयं और सेवा में तीव्रगति के परिवर्तन का गुह्य राज़”01/03/1990“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”07/03/1990“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”31/12/1990“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”26/10/1991“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”11/12/1991“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”31/12/1991“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”02/03/1992“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”08/04/1992“ब्रह्मा बाप से प्यार की निशानी है - अव्यक्त फरिश्ता बनना”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”09/01/1993“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”26/03/1993“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”18/11/1993“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”25/11/1993“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”02/12/1993“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”25/01/1994“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”09/03/1994“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”14/04/1994“स्नेह का रिटर्न है - स्वयं को टर्न (परिवर्तन) करना”25/11/1995“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”16/02/1996“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”31/12/1996“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”13/11/1997“संगमयुग के प्राप्तियों की प्रालब्ध का अनुभव करो, मास्टर दाता, महा सहयोगी बनो”28/11/1997“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”18/01/1998“सकाश देने की सेवा करने के लिए लगावमुक्त बन बेहद के वैरागी बनो”31/01/1998“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”24/02/1998“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”12/12/1998“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”13/02/1999“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”23/10/1999“समय की पुकार - दाता बनो”30/11/1999“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”15/12/1999“संकल्प शक्ति के महत्व को जान इसे बढ़ाओ और प्रयोग में लाओ”31/12/1999“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”03/03/2000“जन्म दिन की विशेष गिफ्ट - शुभ भाव और प्रेम भाव को इमर्ज कर क्रोध महाशत्रु पर विजयी बनो”19/03/2000“निर्माण और निर्मान के बैलेन्स से दुआओं का खाता जमा करो”04/02/2001“समय प्रमाण स्वराज्य अधिकारी बन सर्व रूहानी साधन तीव्रगति से कार्य में लगाओ”04/11/2001“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''15/12/2001“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”11/03/2002“विशेषतायें परमात्म देन हैं - इन्हें विश्व सेवा में अर्पण करो''28/03/2002“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”08/10/2002“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”13/02/2003“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''28/02/2003“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''17/03/2003“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''30/11/2003“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''31/12/2003“इस वर्ष निमित्त और निर्माण बन जमा के खाते को बढ़ाओ और अखण्ड महादानी बनो''18/01/2004“वर्ल्ड अथॉरिटी के डायरेक्ट बच्चे हैं - इस स्मृति को इमर्ज रख सर्व शक्तियों को ऑर्डर से चलाओ''17/02/2004“शिवरात्रि जन्म उत्सव का विशेष स्लोगन - सर्व को सहयोग दो और सहयोगी बनाओ, सदा अखण्ड भण्डारा चलता रहे''05/03/2004“कमजोर संस्कारों का संस्कार कर सच्ची होली मनाओ तब संसार परिवर्तन होगा''15/12/2004“बापदादा की विशेष आशा - हर एक बच्चा दुआयें दे और दुआयें ले''18/01/2005“सेकेण्ड में देहभान से मुक्त हो जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो और मास्टर मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता बनो”03/02/2005“सेवा करते उपराम और बेहद वृत्ति द्वारा एवररेडी बन ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न बनो''20/02/2005“दिल से मेरा बाबा कहो और सर्व अविनाशी खजानों के मालिक बन बेफिक्र बादशाह बनो''15/11/2005“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''18/01/2006“संकल्प, समय और बोल के बचत की स्कीम द्वारा सफलता की सेरीमनी मनाओ, निराश आत्माओं में आशा के दीप जगाओ''25/02/2006“आज उत्सव के दिन मन के उमंग-उत्साह द्वारा माया से मुक्त रहने का व्रत लो, मर्सीफुल बन मास्टर मुक्तिदाता बनो, साथ चलना है तो समान बनो''14/03/2006“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''28/03/2006“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”31/10/2006“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''31/12/2006“नये वर्ष की नवीनता - ''दृढ़ता और परिवर्तन शक्ति से कारण व समस्या शब्द को विदाई दे निवारण व समाधान स्वरूप बनो“18/01/2007“अब स्वयं को मुक्त कर मास्टर मुक्तिदाता बन सबको मुक्ति दिलाने के निमित्त बनो”15/02/2007“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”03/03/2007“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”31/03/2007“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”15/10/2007“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”31/10/2007“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”15/12/2007“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”02/02/2008“सम्पूर्ण पवित्रता द्वारा रूहानी रॉयल्टी और पर्सनालिटी का अनुभव करते, अपने मास्टर ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो”05/03/2008“संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो, शिवमंत्र से मैं-पन का परिवर्तन करो”
