जमा का खाता - Account of balance
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25/10/1969“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”19/06/1970“त्रिमूर्ति लाइट्स का साक्षात्कार”01/03/1971“सिद्धि स्वरूप बनने की सहज विधि”28/07/1971“आकार में निराकार को देखने का अभ्यास”10/05/1972“स्वमान में रहने से फरमान की पालना”24/04/1973“अलौकिक जन्म-पत्री”28/06/1973“योगयुक्त होने से स्वत: युक्तियुक्त संकल्प, बोल और कर्म होंगे”08/07/1973“समय की पुकार”23/09/1973“विश्व की आत्माओं को लाइट व माइट देने वाला ही विश्व-अधिकारी”24/06/1974“राजयोगी ही विश्व-राज्य के अधिकारी”26/06/1974“सर्व सिद्धियों की प्राप्ति के रूहानी नशे में सदा स्थित रहो”04/02/1975“ज्ञान को स्वयं में समाने से ही अनमोल मोती और अमोघ शक्ति की प्राप्ति”10/02/1975“सर्व शक्तियों सहित सेवा में समर्पण”03/08/1975“शिव शक्ति व पाण्डव सेना को तैयार होने के लिए सावधानी”20/09/1975“शक्ति होते हुए भी जीवन में सफलता और सन्तुष्टता क्यों नहीं?”23/04/1977“बाप द्वारा प्राप्त सर्व खज़ानों को बढ़ाने का आधार है - महादानी बनना”16/06/1977“एक ही पढ़ाई द्वारा नम्बरवार पूज्य पद पाने का गुह्य रहस्य”20/06/1977“सदा सहजयोगी बनने का साधन है - महादानी बनना”28/06/1977“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”03/12/1978“पाप और पुण्य की गुह्य गति”01/01/1979“नए वर्ष के लिए बाप द्वारा कराया गया दृढ़ संकल्प”02/01/1979“सम्पूर्णता की समीपता ही विश्व-परिवर्तन की घड़ी की समीपता है”04/01/1979“सम्पूर्णता के आईने में निज स्वरूप को देखो”10/01/1979“अब वेस्ट और वेट को समाप्त करो”12/01/1979“वरदाता बाप द्वारा मिले हुए खुशी के खजानों का भण्डार”18/01/1979“18 जनवरी ‘स्मृति दिवस' को सदाकाल का समर्थी दिवस मनाने के लिए शिक्षाएं”15/12/1979“विदेशी बच्चों के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”02/01/1980“आने वाली दुनिया कैसी होगी?”01/02/1980“सूक्ष्मवतन की कारोबार”07/03/1981“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”09/03/1981“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”27/03/1981“बाप पसन्द, लोक पसन्द, मन पसन्द कैसे बनें?”18/11/1981“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”23/11/1981“त्याग का भी त्याग”20/01/1982“प्रीत की रीत निभाने का सहज तरीका - गाना और नाचना”12/03/1982“चैतन्य पुष्पों में रंग, रुप, खुशबू का आधार”01/04/1982“भाग्य का आधार त्याग”03/04/1982“सर्वप्रथम त्याग है - देह-भान का त्याग”11/04/1982“व्यर्थ का त्याग कर समर्थ बनो”18/04/1982“ऊंचे से ऊंचे ब्राह्मण कुल की लाज रखो”15/05/1983“उड़ती कला में जाने की विधि और पुण्य आत्माओं की निशानियां”03/12/1984“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”12/12/1984“विशेष आत्माओं का फर्ज”14/01/1985“शुभ चिन्तक बनने का आधार स्वचिन्तन और शुभ चिन्तन”18/02/1985“संगमयुग - तन, मन, धन और समय सफल करने का युग”27/02/1985“शिव शक्ति पाण्डव सेना की विशेषतायें”24/03/1985“अब नहीं तो कब नहीं”06/01/1986“संगमयुग - जमा करने का युग”15/01/1986“सस्ता सौदा और बचत का बजट”22/01/1986“बापदादा की आशा - सम्पूर्ण और सम्पन्न बनो”01/03/1986“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”19/03/1986“अमृतवेला - श्रेष्ठ प्राप्तियों की वेला”31/03/1986“सर्व शक्ति-सम्पन्न बनने तथा वरदान पाने का वर्ष”07/04/1986“तपस्वी-मूर्त, त्याग मूर्त, विधाता ही विश्व-राज्य अधिकारी”29/10/1987“तन, मन, धन और सम्बन्ध की शक्ति”02/11/1987“स्व-परिवर्तन का आधार - ‘सच्चे दिल की महसूसता’”06/11/1987“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”14/11/1987“पूज्य देव आत्मा बनने का साधन - पवित्रता की शक्ति”18/11/1987“साइलेन्स पॉवर जमा करने का साधन - अन्तर्मुखी और एकान्तवासी स्थिति”22/11/1987“मदद के सागर से पद्मगुणा मदद लेने की विधि”18/01/1988“‘स्नेह’ और ‘शक्ति’ की समानता”03/02/1988“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”19/03/1988“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”31/03/1988‘वाचा’ और ‘कर्मणा’ - दोनों शक्तियों को जमा करने की ईश्वरीय स्कीम11/11/1989“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”23/11/1989“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”17/12/1989“सदा समर्थ कैसे बनें?”21/12/1989“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”31/12/1989“वाचा सेवा के साथ मन्सा सेवा को नेचुरल बनाओ, शुभ भावना सम्पन्न बनो”02/01/1990“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”14/01/1990“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”13/03/1990“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”13/12/1990“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”03/04/1991“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”10/04/1991“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”26/10/1991“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”18/12/1991“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”03/10/1992“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”21/11/1992“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”31/12/1992“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”09/01/1993“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”31/12/1993“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”07/11/1995“बापदादा की विशेष पसन्दगी और ज्ञान का फाउण्डेशन - पवित्रता”25/11/1995“परमत, परचिंतन और परदर्शन से मुक्त बनो और पर-उपकार करो”31/12/1995“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”16/02/1996“डायमण्ड जुबली वर्ष में विशेष अटेन्शन देकर समय और संकल्प के खजाने को जमा करो”27/02/1996“सत्यता का फाउण्डेशन है पवित्रता और निशानी है - चलन वा चेहरे में दिव्यता”31/12/1996“नये वर्ष में अनुभवी मूर्त बन सबको अनुभवी बनाओ”31/12/1997“इस नये वर्ष को मुक्ति वर्ष मनाओ, सफल करो सफलता लो”31/01/1998“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”24/02/1998“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”13/03/1998“होली शब्द के अर्थ स्वरूप में स्थित होना अर्थात् बाप समान बनना”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”18/01/1999“वर्तमान समय के प्रमाण वैराग्य वृत्ति को इमर्ज कर साधना का वायुमण्डल बनाओ”01/03/1999“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”30/03/1999“तीव्र पुरुषार्थ की लगन को ज्वाला रूप बनाकर बेहद के वैराग्य की लहर फैलाओ”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”30/11/1999“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”18/01/2000“ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा का वायब्रेशन विश्व में फैलाओ”19/03/2000“निर्माण और निर्मान के बैलेन्स से दुआओं का खाता जमा करो”16/12/2000“साक्षात ब्रह्मा बाप समान कर्मयोगी फरिश्ता बनो तब साक्षात्कार शुरू हो”31/12/2000“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”04/02/2001“समय प्रमाण स्वराज्य अधिकारी बन सर्व रूहानी साधन तीव्रगति से कार्य में लगाओ”25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''15/12/2001“एकव्रता बन पवित्रता की धारणा द्वारा रूहानियत में रह मन्सा सेवा करो”31/12/2001“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''03/02/2002“लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ, सर्व खजानों में सम्पन्न बनो''24/02/2002“बाप को प्रत्यक्ष करने के लिए अपनी वा दूसरों की वृत्ति को पॉजिटिव बनाओ''28/03/2002“इस वर्ष को निर्माण, निर्मल वर्ष और व्यर्थ से मुक्त होने का मुक्ति वर्ष मनाओ”13/02/2003“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''31/12/2003“इस वर्ष निमित्त और निर्माण बन जमा के खाते को बढ़ाओ और अखण्ड महादानी बनो''18/01/2005“सेकेण्ड में देहभान से मुक्त हो जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो और मास्टर मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता बनो”03/02/2005“सेवा करते उपराम और बेहद वृत्ति द्वारा एवररेडी बन ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न बनो''25/03/2005“मास्टर ज्ञान सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ, विधाता बनो, तपस्वी बनो''30/11/2005“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”31/12/2005“नये वर्ष में अपने पुराने संस्कारों को योग अग्नि में भस्म कर ब्रह्मा बाप समान त्याग, तपस्या और सेवा में नम्बरवन बनो''18/01/2006“संकल्प, समय और बोल के बचत की स्कीम द्वारा सफलता की सेरीमनी मनाओ, निराश आत्माओं में आशा के दीप जगाओ''25/02/2006“आज उत्सव के दिन मन के उमंग-उत्साह द्वारा माया से मुक्त रहने का व्रत लो, मर्सीफुल बन मास्टर मुक्तिदाता बनो, साथ चलना है तो समान बनो''14/03/2006“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''28/03/2006“विश्व की आत्माओं को दु:खों से छुड़ाने के लिए मन्सा सेवा को बढ़ाओ, सम्पन्न और सम्पूर्ण बनो”31/10/2006“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''18/01/2007“अब स्वयं को मुक्त कर मास्टर मुक्तिदाता बन सबको मुक्ति दिलाने के निमित्त बनो”02/02/2007“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”15/02/2007“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”17/03/2007“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”31/03/2007“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”31/10/2007“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”30/11/2007“सत्यता और पवित्रता की शक्ति को स्वरूप में लाते बालक और मालिकपन का बैलेन्स रखो”15/12/2007“समय के महत्व को जान, कर्मों की गुह्य गति का अटेन्शन रखो, नष्टोमोहा, एवररेडी बनो”18/01/2008“सच्चे स्नेही बन, सब बोझ बाप को देकर मौज का अनुभव करो, मेहनत मुक्त बनो”02/02/2008“सम्पूर्ण पवित्रता द्वारा रूहानी रॉयल्टी और पर्सनालिटी का अनुभव करते, अपने मास्टर ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो”05/03/2008“संगम की बैंक में साइलेन्स की शक्ति और श्रेष्ठ कर्म जमा करो, शिवमंत्र से मैं-पन का परिवर्तन करो”18/03/2008“कारण शब्द को निवारण में परिवर्तन कर मास्टर मुक्तिदाता बनो, सबको बाप के संग का रंग लगाकर समान बनने की होली मनाओ”02/04/2008”इस वर्ष चारों ही सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
