योग - Yoga

156 unique murli dates in this topic

153 murlis in हिंदी

24/07/1969“बिन्दु रूप की प्रैक्टिस”18/09/1969“त्रिनेत्री, त्रिकालदर्शी और त्रिलोकीनाथ बनने की युक्तियां”28/11/1969“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”06/12/1969“सरल स्वभाव से बुद्धि को विशाल और दूरांदेशी बनाओ”20/12/1969“प्लेन याद से प्लैन्स की सफलता”18/01/1970“सम्पूर्ण विल करने से विल-पावर की प्राप्ति”26/01/1970“याद के यात्रा की सम्पूर्ण स्टेज”24/07/1970“बिन्दु रूप की स्थिति सहज कैसे बने?”27/07/1970“अव्यक्त बनने के लिए मुख्य शक्तियों की धारणा”30/07/1970“महारथी अर्थात् महानता”18/01/1971“अव्यक्त स्थिति द्वारा सेवा”21/01/1971“अब नहीं तो कब नहीं”01/02/1971“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”05/03/1971“भट्ठी की अलौकिक छाप”13/03/1971“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानियाँ”18/03/1971“विजयी बनने के लिए संग्रह और संग्राम की शक्ति आवश्यक”19/04/1971“त्याग, तपस्या और सेवा की परिभाषा”20/05/1971“विधाता, वरदाता-पन की स्टेज़”08/06/1971“जीवन के लिए तीन चीजों की आवश्यकता - खुराक, खुशी और खज़ाना”04/07/1971“याद की सहज विधि”01/08/1971“स्वयं की स्टेज़ को सेट करने की विधि”24/10/1971“नज़र से निहाल करने की विधि”01/12/1971“सर्व-शक्तियों के सम्पत्तिवान बनो”14/06/1972“स्व-स्थिति में स्थित होने का पुरुषार्थ वा निशानियां”18/07/1972“कमजोरियों की समाप्ति समारोह करने वाले ही तीव्र पुरुषार्थी हैं”28/07/1972“अपवित्रता और वियोग को संघार करने वाली शक्तियाँ ही असुर संघारनी हैं”19/09/1972“मजबूरियों को समाप्त करने का साधन - मजबूती”04/12/1972“महावीर आत्माओं की रूहानी ड्रिल”23/01/1973“सम्पूर्ण मूर्त बनने के चार स्तम्भ”28/06/1973“योगयुक्त होने से स्वत: युक्तियुक्त संकल्प, बोल और कर्म होंगे”02/08/1973“यथार्थ विधि से सिद्धि की प्राप्ति”25/01/1974“निराकार स्वरूप की स्मृति में रहने तथा आनन्द रस लेने की सहज विधि”28/01/1974“महिमा को स्वीकार करने से रूहानी ताकत में कमी”16/05/1974“महारथीपन के लक्षण”23/05/1974“हद की आकर्षणों या विभूतियों से परे रहने वाला ही सच्चा वैष्णव”03/08/1975“शिव शक्ति व पाण्डव सेना को तैयार होने के लिए सावधानी”08/10/1975“मास्टर ज्ञान-स्वरूप बनने की प्रेरणा”11/10/1975“अन्त:वाहक अर्थात् अव्यक्त फरिश्ते रूप द्वारा सैर”16/10/1975“संकल्प शक्ति को कन्ट्रोल कर सिद्धि-स्वरूप बनने की युक्तियाँ”20/10/1975“परहेज द्वारा संगमयुग के सर्व सुखों की अनुभूति”24/10/1975“हरेक ब्रह्मा-मुखवंशी ब्राह्मण चेतन शालिग्राम का मन्दिर है”08/12/1975“बच्चे की विभिन्न स्टेजेस”22/01/1976“वर्तमान लास्ट समय का फास्ट पुरुषार्थ”24/01/1976“पुरुषार्थ की युक्ति - अब नहीं तो कब नहीं”05/02/1977“महानता के आधार”06/02/1977“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”26/04/1977“स्वतन्‍त्रता ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार है”03/05/1977“कर्मों की अति गुह्य गति”12/06/1977“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”18/06/1977“योग की पॉवरफुल स्टेज कैसे बने?”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”24/01/1978“निरन्तर सेवाधारी”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”01/12/1978“सर्व खजानों की चाबी - एकनामी बनना”04/01/1979“सम्पूर्णता के आईने में निज स्वरूप को देखो”01/02/1979“मनन-शक्ति ही माया जीत बनने का साधन”05/12/1979“विजय का झण्डा लहराने के लिए रियलाइजेशन कोर्स शुरू करो”12/12/1979“रूहानी अलंकार और उनसे सजी हुई मूर्तियाँ”15/12/1979“विदेशी बच्चों के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”19/12/1979“सहज याद का साधन - स्वयं को खुदाई खिदमतगार समझो”07/01/1980“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”23/01/1980“पवित्रता का महत्व”07/03/1981“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”09/03/1981“मेहनत समाप्त कर निरन्तर योगी बनो”17/03/1981“इस सहज मार्ग में मुश्किल का कारण और निवारण”11/04/1981“सत्यता की शक्ति से विश्व परिवर्तन”13/04/1981“रूहे-गुलाब की विशेषता”15/04/1981“नम्बरवन तकदीरवान की विशेषताएं”01/11/1981“सेवा के सफलता की कुन्जी”16/11/1981“विजयमाला में नम्बर का आधार”09/03/1982“होली मनाने और जलाने की अलौकिक रीति”14/03/1982“बापदादा द्वारा देश-विदेश का समाचार”29/03/1982“सच्चे वैष्णव अर्थात् सदा गुण ग्राहक”16/04/1982“संगमयुगी स्वराज्य दरबार ही सर्वश्रेष्ठ दरबार”21/02/1983“शान्ति की शक्ति”11/04/1983“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”14/04/1983“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”07/05/1983“ब्राह्मणों का संसार - बेगमपुर”14/01/1984“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”21/11/1984“स्व-दर्शन धारी ही दिव्य दर्शनीय मूर्त”26/11/1984“सच्चे सहयोगी ही सच्चे योगी”03/12/1984“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”12/12/1984“विशेष आत्माओं का फर्ज”16/01/1985“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”18/01/1985“प्रतिज्ञा द्वारा प्रत्यक्षता (स्मृति दिवस पर विशेष)”30/01/1985“मायाजीत और प्रकृतिजीत ही स्वराज्य-अधिकारी”30/03/1985“तीन-तीन बातों का पाठ”01/01/1986“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”22/01/1986“बापदादा की आशा - सम्पूर्ण और सम्पन्न बनो”16/02/1986“गोल्डन जुबली वर्ष में गोल्डन दुनिया और गोल्डन लाइट के स्वीट होम का अनुभव कराना”01/03/1986“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”19/03/1986“अमृतवेला - श्रेष्ठ प्राप्तियों की वेला”09/04/1986“सच्चे सेवाधारी की निशानी”21/01/1987“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”14/10/1987“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”17/10/1987“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”21/10/1987“दीपराज और दीपरानियों की कहानी”06/11/1987“निरन्तर सेवाधारी बनने का साधन चार प्रकार की सेवायें”10/11/1987“शुभचिन्तक-मणि बन विश्व को चिन्ताओं से मुक्त करो”14/12/1987“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”14/01/1988“उदासी आने का कारण - छोटी-मोटी अवज्ञायें”20/02/1988“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”03/03/1988“होली कैसे मनायें तथा सदाकाल का परिवर्तन कैसे हो?”19/03/1988“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”23/03/1988“दिलाराम बाप के दिलतख्त-जीत दिलरूबा बच्चों की निशानियाँ”31/03/1988‘वाचा’ और ‘कर्मणा’ - दोनों शक्तियों को जमा करने की ईश्वरीय स्कीम11/11/1989“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”15/11/1989“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”09/12/1989“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”13/12/1989“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”21/12/1989“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”25/12/1989“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”14/01/1990“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”20/01/1990“ब्रह्मा बाप के विशेष पाँच कदम”19/03/1990“उड़ती कला का आधार उमंग-उत्साह के पंख”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”13/12/1990“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”17/03/1991“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”18/12/1991“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”31/12/1991“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”01/04/1992“उड़ती कला का अनुभव करने के लिए दो बातों का बैलेन्स - ज्ञानयुक्त भावना और स्नेह युक्त योग”03/10/1992“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”21/11/1992“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”25/11/1993“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”10/01/1994“एक ‘पॉइन्ट’ शब्द को तीन रूपों से स्मृति वा स्वरूप में लाना - यही सेफ्टी का साधन है”18/01/1994“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”13/12/1995“व्यर्थ बोल, डिस्टर्ब करने वाले बोल से स्वयं को मुक्त कर बोल की एकॉनॉमी करो”30/03/1998“सर्व प्राप्तियों की स्मृति इमर्ज कर अचल स्थिति का अनुभव करो और जीवन मुक्त बनो”13/02/1999“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”01/03/1999“होली मनाना अर्थात् सम्पूर्ण पवित्र बनकर संस्कार मिलन मनाना”15/03/1999“कर्मातीत अवस्था तक पहुँचने के लिए कन्ट्रोलिंग पॉवर को बढ़ाओ, स्वराज्य अधिकारी बनो”15/11/1999“बाप समान बनने का सहज पुरुषार्थ - ‘आज्ञाकारी बनो’”30/11/1999“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”11/11/2000“सम्पूर्णता की समीपता द्वारा प्रत्यक्षता के श्रेष्ठ समय को समीप लाओ”31/12/2000“बचत का खाता जमा कर अखण्ड महादानी बनो”04/11/2001“सत्यवादी बनो और समय प्रमाण रहमदिल बन बेहद की वृत्ति, दृष्टि और कृति बनाने के दृढ़ संकल्प का दीप जलाओ''03/02/2002“लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ, सर्व खजानों में सम्पन्न बनो''18/01/2006“संकल्प, समय और बोल के बचत की स्कीम द्वारा सफलता की सेरीमनी मनाओ, निराश आत्माओं में आशा के दीप जगाओ''02/02/2007“परमात्म प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी - होलीएस्ट, हाइएस्ट और रिचेस्ट”17/03/2007“श्रेष्ठ वृत्ति से शक्तिशाली वायब्रेशन और वायुमण्डल बनाने का तीव्र पुरुषार्थ करो, दुआ दो और दुआ लो”31/03/2007“सपूत बन अपनी सूरत से बाप की सूरत दिखाना, निर्माण (सेवा) के साथ निर्मल वाणी, निर्मान स्थिति का बैलेन्स रखना”15/10/2007“संगमयुग की जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए सब बोझ वा बंधन बाप को देकर डबल लाइट बनो”31/10/2007“अपने श्रेष्ठ स्वमान के फ़खुर में रह असम्भव को सम्भव करते बेफिक्र बादशाह बनो”18/01/2008“सच्चे स्नेही बन, सब बोझ बाप को देकर मौज का अनुभव करो, मेहनत मुक्त बनो”02/02/2008“सम्पूर्ण पवित्रता द्वारा रूहानी रॉयल्टी और पर्सनालिटी का अनुभव करते, अपने मास्टर ज्ञान सूर्य स्वरूप को इमर्ज करो”18/02/2008“विश्व परिवर्तन के लिए शान्ति की शक्ति का प्रयोग करो”

© 2026 Brahma Kumaris. All rights reserved.

Murli Portal — Spiritual wisdom for daily living.

Command Palette

Search for a command to run...