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ब्राह्मण जीवन - Brahmin Life - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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ब्राह्मण जीवन - Brahmin Life
ब्राह्मण जीवन - Brahmin Life
187 unique murli dates in this topic
English
हिंदी
ગુજરાતી
తెలుగు
186 murlis in हिंदी
24/10/1971
“नज़र से निहाल करने की विधि”
16/06/1972
“हर्षित रहना ही ब्राह्मण जीवन का विशेष संस्कार”
21/06/1972
“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”
09/04/1973
“उन्नति के पथ पर अग्रसर होने की युक्तियां”
24/04/1973
“अलौकिक जन्म-पत्री”
13/06/1973
“रूहानी योद्धा”
18/06/1973
“विशेष आत्माओं की विशेषता”
23/06/1973
“अलौकिक खजाने के मालिक”
28/06/1973
“योगयुक्त होने से स्वत: युक्तियुक्त संकल्प, बोल और कर्म होंगे”
24/04/1974
“त्रिमूर्ति लाइट के साक्षात्कार-मूर्त बनने की डेट फिक्स करो”
28/04/1974
“स्थूल के साथ-साथ सूक्ष्म साधनों से ईश्वरीय सेवा में सफलता”
02/05/1974
“अब बाप समान सर्व गुण सम्पन्न बनो”
16/05/1974
“महारथीपन के लक्षण”
26/06/1974
“सर्व सिद्धियों की प्राप्ति के रूहानी नशे में सदा स्थित रहो”
04/10/1975
“अब दृढ़ संकल्प की तीली से कमज़ोरियों के रावण को जलाओ”
07/10/1975
“सर्व अधिकार और बेहद के वैराग्य वाला ही राजऋषि”
11/10/1975
“अन्त:वाहक अर्थात् अव्यक्त फरिश्ते रूप द्वारा सैर”
27/10/1975
“क्वेश्चन, करेक्शन और कोटेशन से पुरुषार्थ में ढीलापन”
23/01/1976
“संकल्प, वाणी और स्वरूप के हाईएस्ट और होलीएस्ट होने से बाप की प्रत्यक्षता”
02/02/1976
“भक्तों और पाण्डवों का पोतामेल”
23/01/1977
“महीनता ही महानता है”
28/01/1977
“ब्राह्मणों का धर्म और कर्म”
02/02/1977
“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”
16/04/1977
“ब्राह्मण जन्म की दिव्यता और अलौकिकता”
26/04/1977
“स्वतन्त्रता ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार है”
30/04/1977
“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”
05/06/1977
“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”
12/06/1977
“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”
18/06/1977
“योग की पॉवरफुल स्टेज कैसे बने?”
28/06/1977
“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
02/01/1978
“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
03/12/1978
“पाप और पुण्य की गुह्य गति”
21/12/1978
“हर कल्प की अति समीप आत्माओं का रुप, रेखा और वेला”
23/01/1979
“सदा सुहागिन ही सदा सम्पन्न है”
30/01/1979
“सर्व बन्धनों से मुक्ति की युक्ति”
12/11/1979
“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”
19/11/1979
“बेहद के वानप्रस्थी अर्थात् निरन्तर एकान्त में सदा स्मृति स्वरूप”
26/11/1979
“प्रीत की रीति”
15/12/1979
“विदेशी बच्चों के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”
09/01/1980
“अलौकिक ड्रेस और अलौकिक श्रृंगार”
21/01/1980
“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”
23/01/1980
“पवित्रता का महत्व”
01/02/1980
“सूक्ष्मवतन की कारोबार”
18/01/1981
“‘स्मृति-स्वरूप' का आधार याद और सेवा”
20/01/1981
“मन, बुद्धि, संस्कार के अधिकारी ही वरदानी मूर्त”
18/03/1981
“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
17/10/1981
“सभी परिस्थितियों का समाधान उड़ता पंछी बनो”
06/11/1981
“विशेष युग का विशेष फल”
26/11/1981
“सहयोगी ही सहजयोगी”
29/12/1981
“दूरदेशी बच्चों से दूर देशी बापदादा का मिलन”
06/01/1982
“सगंमयुगी ब्राह्मण जीवन में पवित्रता का महत्व”
27/03/1982
“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”
13/04/1982
“त्यागी, महात्यागी की व्याख्या”
18/04/1982
“ऊंचे से ऊंचे ब्राह्मण कुल की लाज रखो”
02/05/1982
“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”
11/04/1983
“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”
21/04/1983
“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”
30/04/1983
“परम पूज्य बनने का आधार”
04/05/1983
“सदा एक मत, एक ही रास्ते से एकरस स्थिति”
07/05/1983
“ब्राह्मणों का संसार - बेगमपुर”
09/05/1983
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”
17/05/1983
“संगम युग - मौजों के नज़ारों का युग”
23/05/1983
“छोड़ो तो छूटो!”
05/12/1983
“संगमयुग - बाप बच्चों के मिलन का युग”
20/02/1984
“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”
24/02/1984
“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”
03/03/1984
“स्व अधिकारियों के स्व के राज्य का हालचाल”
02/04/1984
“बिन्दु का महत्व”
04/04/1984
“संगमयुग की श्रेष्ठ वेला, श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की वेला”
10/04/1984
“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”
17/04/1984
“पद्मापद्म भाग्यशाली की निशानी”
19/04/1984
“भावुक आत्मा तथा ज्ञानी आत्मा के लक्षण”
03/05/1984
“परमात्मा की सबसे पहली श्रेष्ठ रचना - ब्राह्मण”
09/01/1985
“श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं की रूहानी पर्सनैलिटी”
21/01/1985
“ईश्वरीय जन्म दिन की गोल्डन गिफ्ट - ‘दिव्य बुद्धि’”
16/02/1985
“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”
24/02/1985
“संगमयुग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग”
02/03/1985
“वर्तमान ईश्वरीय जन्म - अमूल्य जन्म”
06/03/1985
“होली का रूहानी रहस्य”
01/01/1986
“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”
13/01/1986
“ब्राह्मण जीवन - सदा बेहद की खुशियों का जीवन”
18/01/1986
“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”
22/02/1986
“रूहानी सेवा - निस्वार्थ सेवा”
07/03/1986
“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”
21/01/1987
“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”
20/02/1987
“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”
01/10/1987
“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”
05/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”
14/10/1987
“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”
17/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”
14/11/1987
“पूज्य देव आत्मा बनने का साधन - पवित्रता की शक्ति”
27/11/1987
“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”
14/12/1987
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”
06/01/1988
“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”
22/01/1988
“हिम्मत का पहला कदम - समर्पणता”
26/01/1988
“संगमयुग पर नम्बरवन पूज्य बनने की अलौकिक विधि”
30/01/1988
“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”
16/02/1988
“सदा उत्साह में रहकर उत्सव मनाओ”
20/02/1988
“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”
24/02/1988
“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”
12/03/1988
“तीन प्रकार का स्नेह तथा दिल के स्नेही बच्चों की विशेषतायें”
19/03/1988
“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”
11/11/1989
“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
27/11/1989
“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
13/12/1989
“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”
21/12/1989
“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”
25/12/1989
“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”
02/01/1990
“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”
14/01/1990
“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
07/03/1990
“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”
25/03/1990
“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”
31/12/1990
“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”
18/01/1991
“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”
17/03/1991
“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”
10/04/1991
“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”
26/10/1991
“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”
04/12/1991
“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”
11/12/1991
“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”
18/12/1991
“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
18/01/1992
“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”
16/03/1992
“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
12/11/1992
“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
31/12/1992
“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”
09/01/1993
“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”
18/01/1993
“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
25/11/1993
“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”
02/12/1993
“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
23/12/1993
“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”
31/12/1993
“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”
18/01/1994
“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”
25/01/1994
“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”
09/03/1994
“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”
22/12/1995
“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”
31/12/1995
“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”
22/03/1996
“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”
03/04/1996
“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”
18/01/1997
“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”
28/11/1997
“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”
14/12/1997
“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”
31/01/1998
“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”
24/02/1998
“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”
12/12/1998
“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”
13/02/1999
“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”
23/10/1999
“समय की पुकार - दाता बनो”
30/11/1999
“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”
03/03/2000
“जन्म दिन की विशेष गिफ्ट - शुभ भाव और प्रेम भाव को इमर्ज कर क्रोध महाशत्रु पर विजयी बनो”
18/01/2001
“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”
25/11/2001
“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''
31/12/2001
“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''
11/03/2002
“विशेषतायें परमात्म देन हैं - इन्हें विश्व सेवा में अर्पण करो''
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
25/10/2002
“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''
14/11/2002
“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”
28/02/2003
“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''
17/03/2003
“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''
17/10/2003
“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''
15/11/2003
“मन को एकाग्र कर, एकाग्रता की शक्ति द्वारा फरिश्ता स्थिति का अनुभव करो''
30/11/2003
“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''
04/09/2005
“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”
21/10/2005
“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”
15/11/2005
“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''
30/11/2005
“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”
15/12/2005
“नये वर्ष में स्नेह और सहयोग की रूपरेखा स्टेज पर लाओ, हर एक को गुण और शक्तियों की गिफ्ट दो”
03/02/2006
“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''
14/03/2006
“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''
15/02/2007
“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”
03/03/2007
“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”