ब्राह्मण जीवन - Brahmin Life

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24/10/1971“नज़र से निहाल करने की विधि”16/06/1972“हर्षित रहना ही ब्राह्मण जीवन का विशेष संस्कार”21/06/1972“विश्व-महाराजन बनने वालों की विश्व-कल्याणकारी स्टेज”09/04/1973“उन्नति के पथ पर अग्रसर होने की युक्तियां”24/04/1973“अलौकिक जन्म-पत्री”13/06/1973“रूहानी योद्धा”18/06/1973“विशेष आत्माओं की विशेषता”23/06/1973“अलौकिक खजाने के मालिक”28/06/1973“योगयुक्त होने से स्वत: युक्तियुक्त संकल्प, बोल और कर्म होंगे”24/04/1974“त्रिमूर्ति लाइट के साक्षात्कार-मूर्त बनने की डेट फिक्स करो”28/04/1974“स्थूल के साथ-साथ सूक्ष्म साधनों से ईश्वरीय सेवा में सफलता”02/05/1974“अब बाप समान सर्व गुण सम्पन्न बनो”16/05/1974“महारथीपन के लक्षण”26/06/1974“सर्व सिद्धियों की प्राप्ति के रूहानी नशे में सदा स्थित रहो”04/10/1975“अब दृढ़ संकल्प की तीली से कमज़ोरियों के रावण को जलाओ”07/10/1975“सर्व अधिकार और बेहद के वैराग्य वाला ही राजऋषि”11/10/1975“अन्त:वाहक अर्थात् अव्यक्त फरिश्ते रूप द्वारा सैर”27/10/1975“क्वेश्चन, करेक्शन और कोटेशन से पुरुषार्थ में ढीलापन”23/01/1976“संकल्प, वाणी और स्वरूप के हाईएस्ट और होलीएस्ट होने से बाप की प्रत्यक्षता”02/02/1976“भक्तों और पाण्डवों का पोतामेल”23/01/1977“महीनता ही महानता है”28/01/1977“ब्राह्मणों का धर्म और कर्म”02/02/1977“सदा अलंकारी स्वरूप में स्थित रहने वाला ही स्वयं द्वारा, बाप का साक्षात्कार करा सकता है”16/04/1977“ब्राह्मण जन्म की दिव्यता और अलौकिकता”26/04/1977“स्वतन्‍त्रता ब्राह्मणों का जन्म-सिद्ध अधिकार है”30/04/1977“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”05/06/1977“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”12/06/1977“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”18/06/1977“योग की पॉवरफुल स्टेज कैसे बने?”28/06/1977“वेस्ट (Waste) मत करो और वेट (Weight) कम करो”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”02/01/1978“ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान सितारों की रिमझिम”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”03/12/1978“पाप और पुण्य की गुह्य गति”21/12/1978“हर कल्प की अति समीप आत्माओं का रुप, रेखा और वेला”23/01/1979“सदा सुहागिन ही सदा सम्पन्न है”30/01/1979“सर्व बन्धनों से मुक्ति की युक्ति”12/11/1979“अमृतवेले के वरदानी समय में पुकार सुनो और उपकार करो”19/11/1979“बेहद के वानप्रस्थी अर्थात् निरन्तर एकान्त में सदा स्मृति स्वरूप”26/11/1979“प्रीत की रीति”15/12/1979“विदेशी बच्चों के साथ अव्यक्त बापदादा की मुलाकात”09/01/1980“अलौकिक ड्रेस और अलौकिक श्रृंगार”21/01/1980“बाप को प्रत्यक्ष करने की विधि”23/01/1980“पवित्रता का महत्व”01/02/1980“सूक्ष्मवतन की कारोबार”18/01/1981“‘स्मृति-स्वरूप' का आधार याद और सेवा”20/01/1981“मन, बुद्धि, संस्कार के अधिकारी ही वरदानी मूर्त”18/03/1981“मुश्किल को सहज करने की युक्ति ‘सदा बाप को देखो’”05/04/1981“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”17/10/1981“सभी परिस्थितियों का समाधान उड़ता पंछी बनो”06/11/1981“विशेष युग का विशेष फल”26/11/1981“सहयोगी ही सहजयोगी”29/12/1981“दूरदेशी बच्चों से दूर देशी बापदादा का मिलन”06/01/1982“सगंमयुगी ब्राह्मण जीवन में पवित्रता का महत्व”27/03/1982“बीजरुप स्थिति तथा अलौकिक अनुभूतियाँ”13/04/1982“त्यागी, महात्यागी की व्याख्या”18/04/1982“ऊंचे से ऊंचे ब्राह्मण कुल की लाज रखो”02/05/1982“विशेष जीवन कहानी बनाने का आधार - सदा चढ़ती कला”11/04/1983“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”21/04/1983“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”30/04/1983“परम पूज्य बनने का आधार”04/05/1983“सदा एक मत, एक ही रास्ते से एकरस स्थिति”07/05/1983“ब्राह्मणों का संसार - बेगमपुर”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”17/05/1983“संगम युग - मौजों के नज़ारों का युग”23/05/1983“छोड़ो तो छूटो!”05/12/1983“संगमयुग - बाप बच्चों के मिलन का युग”20/02/1984“एक सर्वश्रेष्ठ, महान और सुहावनी घड़ी”24/02/1984“ब्राह्मण जन्म - अवतरित जन्म”03/03/1984“स्व अधिकारियों के स्व के राज्य का हालचाल”02/04/1984“बिन्दु का महत्व”04/04/1984“संगमयुग की श्रेष्ठ वेला, श्रेष्ठ तकदीर की तस्वीर बनाने की वेला”10/04/1984“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”17/04/1984“पद्मापद्म भाग्यशाली की निशानी”19/04/1984“भावुक आत्मा तथा ज्ञानी आत्मा के लक्षण”03/05/1984“परमात्मा की सबसे पहली श्रेष्ठ रचना - ब्राह्मण”09/01/1985“श्रेष्ठ भाग्यवान आत्माओं की रूहानी पर्सनैलिटी”21/01/1985“ईश्वरीय जन्म दिन की गोल्डन गिफ्ट - ‘दिव्य बुद्धि’”16/02/1985“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”24/02/1985“संगमयुग - सर्व श्रेष्ठ प्राप्तियों का युग”02/03/1985“वर्तमान ईश्वरीय जन्म - अमूल्य जन्म”06/03/1985“होली का रूहानी रहस्य”01/01/1986“नया वर्ष रूहानी प्रभावशाली बनने का वर्ष”13/01/1986“ब्राह्मण जीवन - सदा बेहद की खुशियों का जीवन”18/01/1986“मन्सा शक्ति तथा निर्भयता की शक्ति”22/02/1986“रूहानी सेवा - निस्वार्थ सेवा”07/03/1986“पढ़ाई की चारों सब्जेक्ट का यथार्थ यादगार - ‘महा-शिवरात्रि’”21/01/1987“स्व-राज्य अधिकारी ही विश्व-राज्य अधिकारी”20/02/1987“याद, पवित्रता और सच्चे सेवाधारी की तीन रेखाएं”01/10/1987“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”05/10/1987“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”14/10/1987“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”17/10/1987“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - ‘पवित्रता’”14/11/1987“पूज्य देव आत्मा बनने का साधन - पवित्रता की शक्ति”27/11/1987“बेहद के वैरागी ही सच्चे राजऋषि”14/12/1987“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन की तीन विशेषताएं”06/01/1988“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”22/01/1988“हिम्मत का पहला कदम - समर्पणता”26/01/1988“संगमयुग पर नम्बरवन पूज्य बनने की अलौकिक विधि”30/01/1988“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”16/02/1988“सदा उत्साह में रहकर उत्सव मनाओ”20/02/1988“तन, मन की थकावट मिटाने का साधन - ‘शक्तिशाली याद’”24/02/1988“वरदाता से प्राप्त हुए वरदानों को वृद्धि में लाने की विधि”12/03/1988“तीन प्रकार का स्नेह तथा दिल के स्नेही बच्चों की विशेषतायें”19/03/1988“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”11/11/1989“दिव्यता - संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रृंगार है”15/11/1989“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”27/11/1989“शुभ भावना और शुभ कामना की सूक्ष्म सेवा”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”09/12/1989“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”13/12/1989“दिव्य ब्राह्मण जन्म के भाग्य की रेखाएं”21/12/1989“त्रिदेव रचयिता द्वारा वरदानों की प्राप्ति”25/12/1989“रूहानी फखुर में रह बेफिक्र बादशाह बनो”02/01/1990“सारे ज्ञान का सार - स्मृति”14/01/1990“पुरुषार्थ की तीव्रगति में कमी के दो मुख्य कारण”01/03/1990“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”07/03/1990“रूलिंग तथा कन्ट्रोलिंग पॉवर से स्वराज्य की प्राप्ति”25/03/1990“सर्व अनुभूतियों की प्राप्ति का आधार - पवित्रता”31/03/1990“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”31/12/1990“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”18/01/1991“विश्व कल्याणकारी बनने के लिए सर्व स्मृतियों से सम्पन्न बन सर्व को सहयोग दो”17/03/1991“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”10/04/1991“दिलतख्तनशीन और विश्व तख्तनशीन बनने के लिए सुख दो और सुख लो”26/10/1991“तपस्या का प्रत्यक्ष-फल - खुशी”04/12/1991“सफल तपस्वी अर्थात् प्योरिटी की पर्सनैलिटी और रॉयल्टी वाले”11/12/1991“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”18/12/1991“हर कर्म में ऑनेस्टी (इमानदारी) का प्रयोग करना ही तपस्या है”31/12/1991“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”18/01/1992“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”16/03/1992“होली मनाना अर्थात दृढ़ संकल्प की अग्नि में कमजोरियों को जलाना और मिलन की मौज मनाना”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”12/11/1992“भविष्य विश्व-राज्य का आधार - संगमयुग का स्वराज्य”21/11/1992“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”31/12/1992“सफलता प्राप्त करने का साधन - सब कुछ सफल करो”09/01/1993“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”18/01/1993“प्रत्यक्षता का आधार - दृढ़ प्रतिज्ञा”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”07/03/1993“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”25/11/1993“सहज सिद्धि प्राप्त करने के लिए ज्ञान स्वरूप प्रयोगी आत्मा बनो”02/12/1993“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”23/12/1993“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”31/12/1993“नये वर्ष में सदा उमंग-उत्साह में उड़ना और सर्व के प्रति महादानी, वरदानी बन व्यर्थ को समाप्त करना”18/01/1994“ब्राह्मण जन्म का आदि वरदान - स्नेह की शक्ति”25/01/1994“ब्राह्मणों की नेचर विशेषता की नेचर है - इसे नेचुरल स्मृति स्वरूप बनाओ”09/03/1994“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”22/12/1995“सर्व प्राप्ति सम्पन्न जीवन की विशेषता है - अप्रसन्नता मुक्त और प्रसन्नता युक्त”31/12/1995“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”22/03/1996“ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी - सब प्रश्‍नों से पार सदा प्रसन्नचित्त रहना”03/04/1996“सेवाओं के साथ-साथ बेहद की वैराग्य वृत्ति द्वारा पुराने वा व्यर्थ संस्कारों से मुक्त बनो”18/01/1997“अपनी सूरत से बाप की सीरत को प्रत्यक्ष करो तब प्रत्यक्षता का नगाड़ा बजेगा”28/11/1997“बेहद की सेवा का साधन - रूहानी पर्सनैलिटी द्वारा नज़र से निहाल करना”14/12/1997“व्यर्थ और निगेटिव को अवाइड कर अवार्ड लेने के पात्र बनो”31/01/1998“पास विद ऑनर बनने के लिए हर खजाने का एकाउण्ट चेक करके जमा करो”24/02/1998“बाप से, सेवा से और परिवार से मुहब्बत रखो तो मेहनत से छूट जायेंगे”12/12/1998“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”13/02/1999“शिव अवतरण और एकानामी के अवतार”23/10/1999“समय की पुकार - दाता बनो”30/11/1999“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”03/03/2000“जन्म दिन की विशेष गिफ्ट - शुभ भाव और प्रेम भाव को इमर्ज कर क्रोध महाशत्रु पर विजयी बनो”18/01/2001“यथार्थ स्मृति का प्रमाण - समर्थ स्वरूप बन शक्तियों द्वारा सर्व की पालना करो”25/11/2001“दुआयें दो दुआयें लो, कारण का निवारण कर समस्याओं का समाधान करो''31/12/2001“इस नये वर्ष में सफलता भव के वरदान द्वारा बाप और स्वयं की प्रत्यक्षता को समीप लाओ''11/03/2002“विशेषतायें परमात्म देन हैं - इन्हें विश्व सेवा में अर्पण करो''08/10/2002“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''25/10/2002“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''14/11/2002“ब्राह्मण जीवन का फाउण्डेशन और सफलता का आधार - निश्चयबुद्धि”28/02/2003“सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ''17/03/2003“इस वर्ष - स्वमान में रहना, सम्मान देना, सबका सहयोगी बनना और समर्थ बनाना''17/10/2003“पूरा वर्ष - सन्तुष्टमणि बन सदा सन्तुष्ट रहना और सबको सन्तुष्ट करना''15/11/2003“मन को एकाग्र कर, एकाग्रता की शक्ति द्वारा फरिश्ता स्थिति का अनुभव करो''30/11/2003“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”21/10/2005“सम्पूर्ण और सम्पन्न बनने की डेट फिक्स कर समय प्रमाण अब एवररेडी बनो”15/11/2005“सच्चे दिल से बाप व परिवार के स्नेही बन मेहनत मुक्त बनने का वायदा करो और फायदा लो''30/11/2005“समय की समीपता प्रमाण स्वयं को हद के बन्धनों से मुक्त कर सम्पन्न और समान बनो”15/12/2005“नये वर्ष में स्नेह और सहयोग की रूपरेखा स्टेज पर लाओ, हर एक को गुण और शक्तियों की गिफ्ट दो”03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''14/03/2006“परमात्म मिलन की अनुभूति के लिए उल्टे मैं पन को जलाने की होली मनाओ, दृष्टि की पिचकारी द्वारा सर्व आत्माओं को सुख, शान्ति, प्रेम, आनन्द का रंग लगाओ''15/02/2007“अलबेलेपन, आलस्य और बहानेबाजी की नींद से जागना ही शिवरात्रि का सच्चा जागरण है”03/03/2007“परमात्म संग में, ज्ञान का गुलाल, गुण और शक्तियों का रंग लगाना ही सच्ची होली मनाना है”

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