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सदा याद रखो - Always Remember - Avyakt Murli Topic | Brahma Kumaris Murli Portal
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सदा याद रखो - Always Remember
सदा याद रखो - Always Remember
197 unique murli dates in this topic
English
हिंदी
ગુજરાતી
తెలుగు
196 murlis in हिंदी
25/10/1969
“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”
28/11/1969
“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”
22/01/1970
“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”
23/01/1970
“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”
24/01/1970
“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”
25/01/1970
“यादगार कायम करने की विधि”
28/05/1970
“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”
29/05/1970
“समीप रत्नों की निशानियां”
07/06/1970
“दिव्य मूर्त बनने की विधि”
11/06/1970
“विश्वपति बनने की सामग्री”
06/08/1970
“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”
23/10/1970
“महारथी बनने का पुरुषार्थ”
29/10/1970
“दीपमाला का सच्चा रहस्य”
01/11/1970
“बाप समान बनने की युक्तियां”
05/11/1970
“डिले इज़ डेन्जर”
09/12/1970
“पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर”
21/01/1971
“अब नहीं तो कब नहीं”
26/01/1971
“ज़िम्मेवारी उठाने से फायदे”
01/02/1971
“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”
25/03/1971
“न्यारे और विश्व के प्यारे बनने की विधि”
09/04/1971
“अव्यक्त स्थिति में सर्व गुणों का अनुभव”
29/04/1971
“बेहद के पेपर में पास होने का साधन”
06/05/1971
“बापदादा का विशेष श्रृंगार - ‘नूरे-रत्न'”
21/01/1972
“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”
02/02/1972
“प्रीत बुद्धि की निशानियाँ”
03/02/1972
“स्वयं को जानने से संयम और समय की पहचान”
27/02/1972
“होलीहंस बनने का यादगार - होली”
28/02/1972
“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”
04/03/1972
“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”
12/03/1972
“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”
15/03/1972
“त्याग और भाग्य”
15/05/1972
“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”
20/05/1972
“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”
31/05/1972
“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”
12/06/1972
“रिफाइन स्थिति की पहचान”
06/08/1972
“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”
09/11/1972
“ज्ञान सितारों का सम्बन्ध ज्ञान सूर्य और ज्ञान चन्द्रमा के साथ”
05/01/1977
“त्यागी और तपस्वी बच्चे सदा पास हैं”
10/01/1977
“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”
12/01/1977
“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”
06/02/1977
“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”
30/04/1977
“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”
11/05/1977
“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”
14/05/1977
“स्वमान और फ़रमान”
19/05/1977
“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”
21/05/1977
“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”
24/05/1977
“बाप के डायरेक्ट बच्चे ही डबल पूजा के अधिकारी बनते हैं”
02/06/1977
“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”
05/06/1977
“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”
12/06/1977
“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”
30/06/1977
“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”
13/01/1978
“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”
24/01/1978
“निरन्तर सेवाधारी”
14/02/1978
“समीप आत्मा की निशानियाँ”
16/02/1978
“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”
07/01/1980
“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”
07/03/1981
“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”
19/03/1981
“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”
25/03/1981
“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”
29/03/1981
“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”
05/04/1981
“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”
07/04/1981
“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”
13/04/1981
“रूहे-गुलाब की विशेषता”
17/10/1981
“सभी परिस्थितियों का समाधान उड़ता पंछी बनो”
29/10/1981
“बाप और बच्चों का रुहानी मिलन”
01/11/1981
“सेवा के सफलता की कुन्जी”
18/11/1981
“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”
21/11/1981
“छोड़ो तो छूटो”
23/11/1981
“त्याग का भी त्याग”
26/11/1981
“सहयोगी ही सहजयोगी”
28/11/1981
“आप पूर्वजों से सर्व आत्माओं की आशाएं”
29/12/1981
“दूरदेशी बच्चों से दूर देशी बापदादा का मिलन”
31/12/1981
“निर्बल को बल देने वाले महाबलवान बनो”
02/01/1982
“विश्व-परिवर्तन की जिम्मेवारी - संगमयुगी ब्राह्मणों पर”
07/03/1982
“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”
12/03/1982
“चैतन्य पुष्पों में रंग, रुप, खुशबू का आधार”
17/03/1982
“संगमयुग का विशेष वरदान - ‘अमर भव’”
06/04/1982
“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”
28/04/1982
“सर्वन्श त्यागी की निशानियाँ”
28/12/1982
“सदा एक रस, सम्पूर्ण चमकता हुआ सितारा बनो”
31/12/1982
“बापदादा की सर्व अलौकिक फ्रैण्ड्स को बधाई”
09/01/1983
“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”
11/01/1983
“समर्थ की निशानी - संकल्प, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार बाप समान”
21/01/1983
“संगम पर बाप और ब्राह्मण सदा साथ साथ”
18/02/1983
“सदा उमंग-उत्साह में रहने की युक्तियाँ”
21/02/1983
“शान्ति की शक्ति”
21/03/1983
“भारत माता शक्ति अवतार द्वारा विश्व का उद्धार”
07/04/1983
“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”
11/04/1983
“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”
13/04/1983
“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”
14/04/1983
“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”
21/04/1983
“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”
24/04/1983
“रूहानी पर्सनैलिटी”
30/04/1983
“परम पूज्य बनने का आधार”
09/05/1983
“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”
15/05/1983
“उड़ती कला में जाने की विधि और पुण्य आत्माओं की निशानियां”
17/05/1983
“संगम युग - मौजों के नज़ारों का युग”
23/05/1983
“छोड़ो तो छूटो!”
03/12/1983
“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”
07/12/1983
“श्रेष्ठ पद की प्राप्ति का आधार - ‘मुरली’”
12/12/1983
“एकाग्रता से सर्व शक्तियों की प्राप्ति”
14/12/1983
“प्रभु परिवार - सर्वश्रेष्ठ परिवार”
19/12/1983
“परमात्म प्यार - नि:स्वार्थ प्यार”
27/12/1983
“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”
29/12/1983
“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”
31/12/1983
“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”
14/01/1984
“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”
07/03/1984
“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”
09/03/1984
“परिवर्तन को अविनाशी बनाओ”
10/04/1984
“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”
01/05/1984
“विस्तार में सार की सुन्दरता”
11/05/1984
“ब्राह्मणों के हर कदम, संकल्प, कर्म से विधान का निर्माण”
03/12/1984
“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”
24/12/1984
“ईश्वरीय स्नेह का महत्व”
16/01/1985
“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”
16/02/1985
“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”
06/03/1985
“होली का रूहानी रहस्य”
15/03/1985
“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”
08/01/1986
“धरती के ‘होली’ सितारे”
01/03/1986
“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”
22/03/1986
“सुख, शान्ति और खुशी का आधार - पवित्रता”
29/03/1986
“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”
09/04/1986
“सच्चे सेवाधारी की निशानी”
18/03/1987
“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”
01/10/1987
“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”
05/10/1987
“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”
14/10/1987
“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”
23/12/1987
“मनन शक्ति और मगन स्थिति”
27/12/1987
“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”
06/01/1988
“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”
22/01/1988
“हिम्मत का पहला कदम - समर्पणता”
30/01/1988
“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”
03/02/1988
“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”
16/02/1988
“सदा उत्साह में रहकर उत्सव मनाओ”
03/03/1988
“होली कैसे मनायें तथा सदाकाल का परिवर्तन कैसे हो?”
07/03/1988
“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”
15/03/1988
“नई दुनिया की तस्वीर का आधार वर्तमान श्रेष्ठ ब्राह्मण जीवन”
19/03/1988
“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”
23/03/1988
“दिलाराम बाप के दिलतख्त-जीत दिलरूबा बच्चों की निशानियाँ”
15/11/1989
“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”
19/11/1989
“तन, मन, धन और जन का भाग्य”
23/11/1989
“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”
01/12/1989
“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”
05/12/1989
“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”
09/12/1989
“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”
06/01/1990
“होलीहँस की परिभाषा”
10/01/1990
“होलीहँस की विशेषतायें”
01/03/1990
“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”
13/03/1990
“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”
31/03/1990
“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”
13/12/1990
“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”
31/12/1990
“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”
17/03/1991
“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”
03/04/1991
“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”
11/12/1991
“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”
31/12/1991
“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”
18/01/1992
“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”
02/03/1992
“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”
15/04/1992
“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”
24/09/1992
“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”
03/10/1992
“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”
13/10/1992
“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”
03/11/1992
“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”
21/11/1992
“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”
30/11/1992
“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”
20/12/1992
“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”
09/01/1993
“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”
18/02/1993
“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”
07/03/1993
“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”
26/03/1993
“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”
18/11/1993
“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”
02/12/1993
“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”
09/12/1993
“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”
16/12/1993
“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”
23/12/1993
“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”
09/03/1994
“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”
09/01/1995
“निश्चयबुद्धि की निशानियाँ - निश्चित विजयी और सदा निश्चिन्त स्थिति का अनुभव”
16/11/1995
“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”
31/12/1995
“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”
23/02/1997
“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”
03/04/1997
“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”
12/12/1998
“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”
30/11/1999
“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”
31/12/1999
“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”
08/10/2002
“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''
25/10/2002
“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''
30/11/2002
“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''
15/12/2002
“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”
18/01/2003
“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”
13/02/2003
“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''
15/12/2003
“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''
25/03/2005
“मास्टर ज्ञान सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ, विधाता बनो, तपस्वी बनो''
04/09/2005
“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”
03/02/2006
“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''
31/10/2006
“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''
31/12/2007
“नये वर्ष में अखण्ड महादानी, अखण्ड निर्विघ्न, अखण्ड योगी और सदा सफलतामूर्त बनना”