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196 murlis in हिंदी

25/10/1969“माला का मणका बनने के लिए विजयी बनो”28/11/1969“लौकिक को अलौकिक में परिवर्तन करने की युक्तियां”22/01/1970“अन्तिम कोर्स - मन के भावों को जानना”23/01/1970“सेवा में सफलता पाने की युक्तियां”24/01/1970“ब्राह्मणों का मुख्य धंधा - समर्पण करना और कराना”25/01/1970“यादगार कायम करने की विधि”28/05/1970“हाई-जम्प देने के लिए हल्का बनो”29/05/1970“समीप रत्नों की निशानियां”07/06/1970“दिव्य मूर्त बनने की विधि”11/06/1970“विश्वपति बनने की सामग्री”06/08/1970“बन्धनमुक्त आत्मा की निशानी”23/10/1970“महारथी बनने का पुरुषार्थ”29/10/1970“दीपमाला का सच्चा रहस्य”01/11/1970“बाप समान बनने की युक्तियां”05/11/1970“डिले इज़ डेन्जर”09/12/1970“पुरुषार्थ का मुख्य आधार कैचिंग पॉवर”21/01/1971“अब नहीं तो कब नहीं”26/01/1971“ज़िम्मेवारी उठाने से फायदे”01/02/1971“ताज, तिलक और तख्तनशीन बनने की विधि”25/03/1971“न्यारे और विश्व के प्यारे बनने की विधि”09/04/1971“अव्यक्त स्थिति में सर्व गुणों का अनुभव”29/04/1971“बेहद के पेपर में पास होने का साधन”06/05/1971“बापदादा का विशेष श्रृंगार - ‘नूरे-रत्न'”21/01/1972“निरन्तर योगी बनने की सहज विधि”02/02/1972“प्रीत बुद्धि की निशानियाँ”03/02/1972“स्वयं को जानने से संयम और समय की पहचान”27/02/1972“होलीहंस बनने का यादगार - होली”28/02/1972“समय का इन्तार न कर एवररेडी रहने वाला ही सच्चा पुरुषार्थी”04/03/1972“अधिकारी बनने के लिए अधीनता छोड़ो”12/03/1972“सफलता का आधार - संग्रह और संग्राम करने की शक्ति”15/03/1972“त्याग और भाग्य”15/05/1972“श्रेष्ठ स्थिति बनाने का साधन तीन शब्द - निराकारी, अलंकारी और कल्याणकारी”20/05/1972“सार-स्वरूप बनने से संकल्प और समय की बचत”31/05/1972“भविष्य में अष्ट देवता और भक्ति में इष्ट बनने का पुरुषार्थ”12/06/1972“रिफाइन स्थिति की पहचान”06/08/1972“वृत्ति चंचल होने का कारण - व्रत में हल्कापन”09/11/1972“ज्ञान सितारों का सम्बन्ध ज्ञान सूर्य और ज्ञान चन्द्रमा के साथ”05/01/1977“त्यागी और तपस्वी बच्चे सदा पास हैं”10/01/1977“जैसा लक्ष्य वैसा लक्षण”12/01/1977“संगमयुग पर ‘बालक सो मालिक’ बनने वालों के तीनों कालों का साक्षात्कार”06/02/1977“रियलाइज़ेशन द्वारा लिबरेशन”30/04/1977“हाईएस्ट अथॉरिटी की स्थिति का आधार - कम्बाइन्ड रूप की स्मृति”11/05/1977“सम्पन्न स्वरूप की निशानी - शुभ चिन्तन और शुभ चिन्तक”14/05/1977“स्वमान और फ़रमान”19/05/1977“आत्म ज्ञान और परमात्म ज्ञान में अन्तर”21/05/1977“संगमयुगी ब्राह्मण जीवन का विशेष गुण और कर्तव्य”24/05/1977“बाप के डायरेक्ट बच्चे ही डबल पूजा के अधिकारी बनते हैं”02/06/1977“सर्व आत्माओं के आधार मूर्त, उद्धार मूर्त और पूर्वज - ‘ब्राह्मण सो देवता हैं’”05/06/1977“अलौकिक जीवन का कर्तव्य ही है - विकारी को निर्विकारी बनाना”12/06/1977“कमल पुष्प समान स्थिति ही ब्राह्मण जीवन का श्रेष्ठ आसन है”30/06/1977“बापदादा की हर ब्राह्मण आत्मा प्रति श्रेष्ठ कामनाएं”13/01/1978“इन्तजार के पहले इन्तजाम करो”24/01/1978“निरन्तर सेवाधारी”14/02/1978“समीप आत्मा की निशानियाँ”16/02/1978“माया और प्रकृति द्वारा सत्कार प्राप्त आत्मा ही सर्वश्रेष्ठ आत्मा है”07/01/1980“संगमयुगी बादशाही और सतयुगी बादशाही”07/03/1981“शान्ति स्वरूप के चुम्बक बन चारों ओर शान्ति की किरणें फैलाओ”19/03/1981“विश्व के राज्य-अधिकारी कैसे बने?”25/03/1981“महानता का आधार - संकल्प, बोल, कर्म की चेकिंग”29/03/1981“ज्ञान का सार ‘मैं और मेरा बाबा’”05/04/1981“समर्थ कर्मों का आधार - ‘धर्म’”07/04/1981“मनन शक्ति द्वारा सर्वशक्तियों के स्वरूप की अनुभूति”13/04/1981“रूहे-गुलाब की विशेषता”17/10/1981“सभी परिस्थितियों का समाधान उड़ता पंछी बनो”29/10/1981“बाप और बच्चों का रुहानी मिलन”01/11/1981“सेवा के सफलता की कुन्जी”18/11/1981“सम्पूर्णता के समीपता की निशानी”21/11/1981“छोड़ो तो छूटो”23/11/1981“त्याग का भी त्याग”26/11/1981“सहयोगी ही सहजयोगी”28/11/1981“आप पूर्वजों से सर्व आत्माओं की आशाएं”29/12/1981“दूरदेशी बच्चों से दूर देशी बापदादा का मिलन”31/12/1981“निर्बल को बल देने वाले महाबलवान बनो”02/01/1982“विश्व-परिवर्तन की जिम्मेवारी - संगमयुगी ब्राह्मणों पर”07/03/1982“संकल्प की गति धैर्यवत होने से लाभ”12/03/1982“चैतन्य पुष्पों में रंग, रुप, खुशबू का आधार”17/03/1982“संगमयुग का विशेष वरदान - ‘अमर भव’”06/04/1982“दास व अधिकारी आत्माओं के लक्षण”28/04/1982“सर्वन्श त्यागी की निशानियाँ”28/12/1982“सदा एक रस, सम्पूर्ण चमकता हुआ सितारा बनो”31/12/1982“बापदादा की सर्व अलौकिक फ्रैण्ड्स को बधाई”09/01/1983“व्यर्थ को छोड़ समर्थ संकल्प चलाओ”11/01/1983“समर्थ की निशानी - संकल्प, बोल, कर्म, स्वभाव, संस्कार बाप समान”21/01/1983“संगम पर बाप और ब्राह्मण सदा साथ साथ”18/02/1983“सदा उमंग-उत्साह में रहने की युक्तियाँ”21/02/1983“शान्ति की शक्ति”21/03/1983“भारत माता शक्ति अवतार द्वारा विश्व का उद्धार”07/04/1983“नष्टोमोहा बन प्रभु प्यार के पात्र बनो”11/04/1983“सहज पुरूषार्थी के लक्षण”13/04/1983“परचिन्तन तथा परदर्शन से हानियाँ”14/04/1983“सम्पन्न आत्मा सदा स्वयं और सेवा से सन्तुष्ट”21/04/1983“संगमयुगी मर्यादाओं पर चलना ही पुरूषोत्तम बनना है”24/04/1983“रूहानी पर्सनैलिटी”30/04/1983“परम पूज्य बनने का आधार”09/05/1983“ब्राह्मण जीवन का श्रृंगार - स्मृति, वृत्ति, और दृष्टि की स्वच्छता (पवित्रता)”15/05/1983“उड़ती कला में जाने की विधि और पुण्य आत्माओं की निशानियां”17/05/1983“संगम युग - मौजों के नज़ारों का युग”23/05/1983“छोड़ो तो छूटो!”03/12/1983“संगमयुगी ब्राह्मणों का श्रेष्ठ भाग्य”07/12/1983“श्रेष्ठ पद की प्राप्ति का आधार - ‘मुरली’”12/12/1983“एकाग्रता से सर्व शक्तियों की प्राप्ति”14/12/1983“प्रभु परिवार - सर्वश्रेष्ठ परिवार”19/12/1983“परमात्म प्यार - नि:स्वार्थ प्यार”27/12/1983“भिखारी नहीं सदा के अधिकारी बनो”29/12/1983“संगमयुग - सहज प्राप्ति का युग”31/12/1983“श्रीमत रूपी हाथ सदा हाथ में है तो सारा युग हाथ में हाथ देकर चलते रहेंगे”14/01/1984“डबल सेवाधारी स्वत: ही मायाजीत”07/03/1984“कर्मातीत, वानप्रस्थी आत्मायें ही तीव्रगति की सेवा के निमित्त”09/03/1984“परिवर्तन को अविनाशी बनाओ”10/04/1984“प्रभु प्यार - ब्राह्मण जीवन का आधार”01/05/1984“विस्तार में सार की सुन्दरता”11/05/1984“ब्राह्मणों के हर कदम, संकल्प, कर्म से विधान का निर्माण”03/12/1984“सर्व समर्थ शिक्षक के श्रेष्ठ शिक्षाधारी बनो”24/12/1984“ईश्वरीय स्नेह का महत्व”16/01/1985“भाग्यवान युग में भगवान द्वारा वर्से और वरदानों की प्राप्ति”16/02/1985“हर श्वांस में खुशी का साज बजना ही इस श्रेष्ठ जन्म की सौगात है”06/03/1985“होली का रूहानी रहस्य”15/03/1985“मेहनत से छूटने का सहज साधन - निराकारी स्वरूप की स्थिति”08/01/1986“धरती के ‘होली’ सितारे”01/03/1986“होली हंस बुद्धि, वृत्ति दृष्टि और मुख”22/03/1986“सुख, शान्ति और खुशी का आधार - पवित्रता”29/03/1986“शक्तिशाली रचना श्रेष्ठ संकल्प की रचना”09/04/1986“सच्चे सेवाधारी की निशानी”18/03/1987“सच्चे रूहानी आशिक की निशानियां”01/10/1987“ईश्वरीय स्नेह - जीवन परिवर्तन का फाउण्डेशन है”05/10/1987“ब्राह्मण जीवन का सुख - सन्तुष्टता व प्रसन्नता”14/10/1987“ब्राह्मण जीवन - बाप से सर्व सम्बन्ध अनुभव करने की जीवन”23/12/1987“मनन शक्ति और मगन स्थिति”27/12/1987“निश्चय बुद्धि विजयी रत्नों की निशानियाँ”06/01/1988“दिल के ज्ञानी तथा स्नेही बनो और लीकेज को बन्द करो”22/01/1988“हिम्मत का पहला कदम - समर्पणता”30/01/1988“हिम्मत का दूसरा कदम - ‘सहनशीलता’ (ब्रह्मा बाप की जीवन कहानी)”03/02/1988“ब्रह्मा मात-पिता की अपने ब्राह्मण बच्चों के प्रति दो शुभ आशाएं”16/02/1988“सदा उत्साह में रहकर उत्सव मनाओ”03/03/1988“होली कैसे मनायें तथा सदाकाल का परिवर्तन कैसे हो?”07/03/1988“भाग्यवान बच्चों के श्रेष्ठ भाग्य की लिस्ट”15/03/1988“नई दुनिया की तस्वीर का आधार वर्तमान श्रेष्ठ ब्राह्मण जीवन”19/03/1988“‘याद’ में रमणीकता लाने की युक्तियाँ”23/03/1988“दिलाराम बाप के दिलतख्त-जीत दिलरूबा बच्चों की निशानियाँ”15/11/1989“सच्चे दिल पर साहेब राज़ी”19/11/1989“तन, मन, धन और जन का भाग्य”23/11/1989“वरदाता को राज़ी करने की सहज विधि”01/12/1989“स्वमान से ही सम्मान की प्राप्ति”05/12/1989“सदा प्रसन्न कैसे रहें?”09/12/1989“योगयुक्त, युक्तियुक्त बनने की युक्ति”06/01/1990“होलीहँस की परिभाषा”10/01/1990“होलीहँस की विशेषतायें”01/03/1990“ब्राह्मण-जीवन का फाउण्डेशन - दिव्य बुद्धि और रूहानी दृष्टि”13/03/1990“संगम पर परमात्मा का आत्माओं से विचित्र मिलन”31/03/1990“रहमदिल और बेहद की वैराग वृत्ति”13/12/1990“तपस्या का फाउण्डेशन बेहद का वैराग्य”31/12/1990“तपस्या ही बड़े ते बड़ा समारोह है, तपस्या अर्थात् बाप से मौज मनाना”17/03/1991“सन्तुष्टमणि के श्रेष्ठ आसन पर आसीन होने के लिए प्रसन्नचित्त, निश्चिंत आत्मा बनो”03/04/1991“सर्व हदों से निकल बेहद के वैरागी बनो”11/12/1991“सत्यता की सभ्यता ही रीयल रॉयल्टी है”31/12/1991“यथार्थ चार्ट का अर्थ है - प्रगति और परिवर्तन”18/01/1992“बाप से स्नेह की निशानी - बाप समान बनना”02/03/1992“महाशिवरात्रि मनाना अर्थात प्रतिज्ञा करना, व्रत लेना और बलि चढ़ना”15/04/1992“ब्राह्मणों की दो निशानियाँ - निश्चय और विजय”24/09/1992“सत्य और असत्य का विशेष अन्तर”03/10/1992“ब्राह्मण अर्थात् सदा श्रेष्ठ भाग्य के अधिकारी”13/10/1992“नम्बरवन बनना है तो ज्ञान और योग को स्वरूप में लाओ”03/11/1992“रूहानी रॉयल्टी सम्पन्न आत्माओं की निशानियां”21/11/1992“कर्मों की गुह्य गति के ज्ञाता बनो”30/11/1992“सर्व खजानों से सम्पन्न बनो - दुआएं दो, दुआएं लो”20/12/1992“आज्ञाकारी ही सर्व शक्तियों के अधिकारी”09/01/1993“अव्यक्त वर्ष मनाना अर्थात् सपूत बन सबूत देना”18/02/1993“ब्राह्मण जीवन का श्वांस - सदा उमंग और उत्साह”07/03/1993“होली मनाना अर्थात् हाइएस्ट और होलीएस्ट बनना”26/03/1993“अव्यक्त वर्ष में लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ”18/11/1993“संगमयुग के राजदुलारे सो भविष्य के राज्य अधिकारी”02/12/1993“नम्बरवन बनने के लिए गुण मूर्त बन गुणों का दान करने वाले महादानी बनो”09/12/1993“एकाग्रता की शक्ति से दृढ़ता द्वारा सहज सफलता की प्राप्ति”16/12/1993“सच्चे स्नेही बन एक बाप द्वारा सर्व सम्बन्धों का साकार में अनुभव करो”23/12/1993“पवित्रता के दृढ़ व्रत द्वारा वृत्ति का परिवर्तन”09/03/1994“न्यारा-प्यारा, वन्डरफुल, स्नेह और सुखभरा अवतरण - शिव जयन्ती”09/01/1995“निश्चयबुद्धि की निशानियाँ - निश्चित विजयी और सदा निश्चिन्त स्थिति का अनुभव”16/11/1995“बापदादा की चाहना - डायमण्ड जुबली वर्ष को लगाव मुक्त वर्ष के रूप में मनाओ”31/12/1995“डायमण्ड वर्ष में फरिश्ता बनकर बापदादा की छत्रछाया और प्यार की अनुभूति करो”23/02/1997“साथी को साथ रख साक्षी और खुशनुमा के तख्तनशीन बनो”03/04/1997“पुराने संस्कारों को खत्म कर अपने निजी संस्कार धारण करने वाले एवररेडी बनो”12/12/1998“मेरे-मेरे का देह-अभिमान छोड़ ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रखो”30/11/1999“पास विद ऑनर बनने के लिए सर्व खजानों के खाते को जमा कर सम्पन्न बनो”31/12/1999“नई सदी में अपने चलन और चेहरे से फरिश्ते स्वरूप को प्रत्यक्ष करो”08/10/2002“आत्मिक प्यार की मूर्ति बन शिक्षा और सहयोग साथ-साथ दो''25/10/2002“ब्राह्मण जीवन का आधार - प्युरिटी की रॉयल्टी''30/11/2002“रिटर्न शब्द की स्मृति से समान बनो और रिटर्न-जर्नी के स्मृति स्वरूप बनो''15/12/2002“समय प्रमाण लक्ष्य और लक्षण की समानता द्वारा बाप समान बनो”18/01/2003“ब्राह्मण जन्म की स्मृतियों द्वारा समर्थ बन सर्व को समर्थ बनाओ”13/02/2003“वर्तमान समय अपना रहमदिल और दाता स्वरूप प्रत्यक्ष करो''15/12/2003“प्रत्यक्षता के लिए साधारणता को अलौकिकता में परिवर्तन कर दर्शनीय मूर्त बनो''25/03/2005“मास्टर ज्ञान सूर्य बन अनुभूति की किरणें फैलाओ, विधाता बनो, तपस्वी बनो''04/09/2005“शिक्षा के साथ क्षमा और रहम को अपना लो, दुआयें दो, दुआयें लो तो आपका घर आश्रम बन जायेगा”03/02/2006“परमात्म प्यार में सम्पूर्ण पवित्रता की ऐसी स्थिति बनाओ जिसमें व्यर्थ का नामनिशान न हो''31/10/2006“सदा स्नेही के साथ अखण्ड महादानी बनो तो विघ्न-विनाशक, समाधान स्वरूप बन जायेंगे''31/12/2007“नये वर्ष में अखण्ड महादानी, अखण्ड निर्विघ्न, अखण्ड योगी और सदा सफलतामूर्त बनना”

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